विद्युतकर्मियों की जेल भरो आंदोलन की घोषणा

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पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डा. आशीष गोयल द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिजली कर्मियों को धमकी देते हुए जेल का विकल्प पत्र भरने की बात करने से प्रदेश भर में बिजली कर्मियों में उबाल आ गया है और उनका गुस्सा फूट पड़ा है। 25 जून को आपातकाल की 50वीं जयंती पर प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने अन्याय और दमन के विरोध में निजीकरण का टेंडर होते ही जेल भरो अभियान चलाने का संकल्प जोरदार ढंग से व्यक्त किया।
    
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने सभी प्रबंध निदेशकों और उच्च अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो कर्मचारी जेल जाना चाहते हैं, रजिस्टर रखवा लिया जाए और दो दिन में उनसे जेल जाने का विकल्प ले लिया जाए। चेयरमैन ने बहुत तल्खी में कहा कि जो कर्मचारी जेल जाना चाहते हैं उन्हें वे ससम्मान जेल भिजवा देंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि यह बयानबाजी कर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने 50 साल बाद एक बार फिर आपातकाल की याद ताजा कर दी है।
    
संघर्ष समिति ने कहा कि विगत 7 महीनों से पावर कारपोरेशन के चेयरमैन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने हेतु इतने उतावले हो गए हैं कि वे झूठे आंकड़ों और धमकी का सहारा लेने पर उतर आए हैं। 
    
पावर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा निजीकरण हेतु विद्युत नियामक आयोग को भेजे गए झूठे आंकड़ों को विद्युत नियामक आयोग ने नकार दिया है और निजीकरण के आर एफ पी डाक्यूमेंट को वापस लौटा दिया है। इससे प्रबंधन पूरी तरह बौखला गया है और अब बिजली कर्मियों से रजिस्टर पर जेल जाने वालों को विकल्प देने की धमकी पर उतर आया है।
    
आपातकाल की 50वीं जयंती पर प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजलीकर्मियों ने विरोध सभा कर संकल्प व्यक्त किया कि वे अन्याय, दमन और सार्वजनिक संपत्ति की लूट के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाएंगे और टेंडर होते ही यह आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा कि संघर्ष करते हुए जेल भरो आंदोलन चलाने में बिजलीकर्मी कभी भी पीछे नहीं रहे हैं। वर्ष 2000 की हड़ताल में लगभग 25,000 बिजलीकर्मियों ने प्रदेश की जेलों को भर दिया था। जरूरत पड़ी तो 2025 में एक बार फिर इसे दोहराया जाएगा।
    
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कारपोरेशन के द्वारा विरोध सभा में जाने वाले कर्मचारियों की वीडियो बनाना, बड़े पैमाने पर प्रशासनिक आधार पर दूर दराज ट्रांसफर, यहां तक कि महिलाकर्मियों का परिवार और बच्चों से दूर दराज ट्रांसफर, अनुशासन नियमावली में तानाशाहीपूर्ण संशोधन कर बिना कारण बताए और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त कर देना आदि से भी जब बिजलीकर्मियों को नहीं डराया जा सका तब चेयरमैन डा. आशीष गोयल इस स्तर पर आ गए हैं कि प्रत्येक दफ्तर में रजिस्टर रखवा कर दो दिन में बिजलीकर्मियों से जेल जाने का विकल्प लेने के आदेश कर रहे हैं । 
    
संघर्ष समिति ने कहा कि इन धमकियों से बिजलीकर्मी डरने वाले नहीं है। आने वाले दिनों में निजीकरण के पीछे हो रहे मेगा भ्रष्टाचार का बिजली कर्मचारी उपभोक्ता परिषद, किसान संगठनों और व्हिसल ब्लोअर्स के साथ मिलकर लगातार पर्दाफाश करते रहेंगे। 
    
25 जून को वाराणसी, आगरा, मेरठ, मऊ, बलिया, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभायें हुईं।
        -विशेष संवाददाता

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