ग्रामीण मजदूरों का अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन

मऊ-बलिया/ 12 जनवरी को ग्रामीण मजदूर यूनियन बलिया की ओर से तहसील मुख्यालय रसड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया गया। धरने से पहले दर्जनों महिला और पुरुष मजदूरों ने मार्च निकाला। मार्च के दौरान ग्रामीण मजदूरों की समस्याओं से सम्बन्धित नारे लगाने के साथ पूंजीवाद-साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, फासीवाद मुर्दाबाद, मजदूर विरोधी श्रम कानून वापस लो, किसान विरोधी नीतियां रद्द करो, महिलाओं का उत्पीड़न मुर्दाबाद, दलितों का उत्पीड़न मुर्दाबाद, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न मुर्दाबाद, हिन्दू-मुस्लिम भाई-चारा जिन्दाबाद, मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद आदि नारे लगाये गये। 
    
तहसील परिसर में धरने के दौरान सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने ग्रामीण मजदूरों की समस्याओं पर विस्तारपूर्वक बात की। वक्ताओं ने कहा कि बलिया, मऊ ही नहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में ग्र्रामीण मजदूरों की जिन्दगी दिन पर दिन बदहाल होती जा रही है। सभी तरह के ग्रामीण मजदूरों, वे चाहे मकान, सड़क, पुल-पुलिया, रास्ता, नाली बनाने वाले निर्माण मजदूर हों अथवा भट्ठा मजदूर हों, पेन्टर हों, फर्नीचर बनाने वाले हों, प्लम्बर हों, खेतिहर मजदूर हों, शादी समारोह में काम करते हों सबकी हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। पहले की तुलना में काम कम मिल रहा है लेकिन मजदूरी में बढ़ोत्तरी बहुत कम होती है। वह भी काफी समय के बाद। ज्यादातर कामों में मजदूरी कई साल से ज्यों की त्यों बनी हुयी है। किसी-किसी काम में तो मजदूरी घटी है। एफसीआई के गोदामों में काम करने वाले मजदूर वर्षों से एक ही रेट पर काम कर रहे हैं। तमाम कामों में बड़े ठेकेदारों के अलावा कुछ बिचौलिये ठेकेदार मजदूरों का भयानक शोषण कर रहे हैं। काम की कमी के कारण मजदूरों की मजदूरी में बिचौलिये ठेकेदारों द्वारा की जा रही कटौती बढ़ती जा रही है। मजदूरों को संगठित होकर उसके शोषण के खिलाफ संघर्ष करना होगा। 
    
वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र व प्रदेश की सरकारें पूंजीपतियों के फायदे के लिए काम करती हैं, ऐसी स्थिति में मजदूरों, किसानों, मेहनतकशों व आम जनता की परेशानियां तो दिन प्रति दिन बढ़ेंगी ही। पूंजीपरस्त किसान विरोधी नीतियों के कारण खेती-किसानी की हालत बिगड़ती जा रही है। इसलिए खेतिहार मजदूर काम की कमी से परेशान होने के साथ-साथ बहुत कम मजदूरी पर काम करने के लिए मजबूर हैं। 
    
सभा को यूनियन अध्यक्ष रामजी सिंह, ग्रा.म.यू. बलिया के जिलाध्यक्ष दूधनाथ, ग्रा.म.यू.बलिया के महामंत्री विन्ध्यांचल, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के डा. सत्यनारायण व ज्ञानदेव सिंह ने सम्बोधित किया। क्रालोस के लालू तिवारी व इमके के मुनीब ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किये। 
    
 29 जनवरी को ग्रामीण मजदूर यूनियन मऊ की ओर से मऊ कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। महिला मजदूरों सहित दर्जनों पुरुष मजदूरों ने हिस्सा लिया। धरना-प्रदर्शन में जयराम गढ़, भवनाथ पुर, जादेडीह, हरदसपुर, हरपुर दर्पन रायनपुर व जयसिंहपुर के मजदूरों ने शिरकत की। ग्रामीण मजदूरों की समस्याओं से सम्बन्धित नारों के साथ-साथ क्रांतिकारी नारों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गयी। 
    
धरने के दौरान सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मजदूर विरोधी चार श्रम कानूनों को लाकर पूंजीपति वर्ग ने समूचे मजदूर वर्ग पर भयानक हमला बोल दिया है। ग्रामीण इलाके में काम की कमी के कारण जो ग्रामीण मजदूर औद्योगिक शहरों की ओर काम पाने की उम्मीद में पलायन कर रहे हैं, उन्हें या तो शहरों में भी काम नहीं मिलता या तो बहुत ही कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर होते हैं। उनमें से ज्यादातर को ठेका मजदूर बनकर ठेकेदार के शोषण का शिकार होना पड़ता है।
    
वक्ताओं ने कहा कि पूंजीपतियों की हितैषी भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पार्टियों और इनके नेताओं से मजदूरों, गरीबों की भलाई की उम्मीद करना बेकार है। ये सभी पार्टियां पूंजीपतियों की दोस्त और मजदूरों-किसानों व आम जनता की दुश्मन हैं। इसलिए मजदूरों, किसानों को जाति, धर्म, क्षेत्र के नाम पर बांटने की पूंजीपतियों की साजिश को नाकाम करना होगा। हर जाति व धर्म के मजदूरों को किसानों व आम जनता के साथ एकता कायम करके अपनी समस्याओं को हल कराने की लड़ाई को तेज करना होगा। अपनी फौरी मांगों के लिए लड़ते हुए आर्थिक लड़ाई को वर्ग संघर्ष में बदलना होगा। 
    
सभा को ग्रा.म.यू. अध्यक्ष राम जी सिंह, ग्रा.म.यू. के महामंत्री संजीव कुमार, इमके के लालू प्रसाद, रामजन्म, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के सिकन्दर व विजय कुमार ने सम्बोधित किया।
    
धरना-प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को सम्बोधित विभिन्न मांगों वाला ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। मनरेगा में 100 दिन का काम देने व काम न देने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने, न्यूनतम मजदूरी 500 रु. करने व उसे लागू करने, महिला मजदूरों को पुरुष मजदूरों के बराबर वेतन देने, बीमार मजदूरों का मुफ्त इलाज करने, कार्यस्थल पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था करने, मजदूरों के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करने व काम करने में अक्षम बूढ़े, बीमार व अपंग मजदूरों को उचित मासिक गुजारा भत्ता देने की मांगें की गयीं।
        
 -मऊ संवाददाता 

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