यूनान: वेतन और शिक्षा में सुधार के लिए छात्र-कर्मचारी सड़कों पर

Published
Sun, 11/01/2026 - 07:50
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21 अक्टूबर को यूनान (ग्रीस) में भी शिक्षा में सुधार और वेतन वृद्धि के लिए यूनान की राजधानी एथेंस सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए। हजारों छात्र और कर्मचारियों ने इसमें हिस्सा लिया। यूरोप में संघर्षों की लहर थमने के बजाय बढ़ रही है। वजह सभी जगह शिक्षा की बुरी स्थिति और बढ़ती महंगाई के अनुरूप वेतन न बढ़ना है। 
    
एथेंस में हो रहे प्रदर्शनों में नारा लगाया जा रहा है- ‘‘फ्रांस से लेकर ग्रीस तक शिक्षा के लिए धन दो’’। यह नारा यूरोप में हो रहे प्रदर्शनों की आपसी एकजुटता को ही दिखाता है। प्रदर्शन में शामिल हो रहे लोग साफ कह रहे हैं कि उन्हें यूरोप में हो रहे प्रदर्शनों से ताकत मिल रही है। 
    
ग्रीस की छात्र आबादी शिक्षा में बढ़ते खर्च को लेकर जहां परेशान है वहीं दूसरी ओर वह छात्र आबादी के लिए आवास की समस्या से भी जूझ रही है। छात्रों को जो आवास भत्ता या सब्सिडी मिलती है वह खर्च होने वाली राशि की आधी है। महंगाई के कारण खाने के खर्च में भी बढ़ोत्तरी हुई है। प्रदर्शनों के दौरान लगने वाला नारा- पढ़ाई करें या जीवित रहें- उनकी परेशानियों को व्यक्त करता है।
    
मजदूरों-कर्मचारियों की मुसीबत यह है कि जीवन यापन की लागत बढ़ती जा रही है। ईंधन के दाम बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य के लिए लोगों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन वेतन इस अनुरूप नहीं बढ़ रहा है। 
    
बड़े शहरों में आवास की समस्या स्पेन की तरह बढ़ रही है। इसका कारण रियल एस्टेट में विदेशी निवेशकों खासकर इजरायल की कंपनियों का निवेश रहा है। पाल्मो, जोइया, डायमोना, प्रोग्रीस आदि कई इजरायली कंपनियां हैं जो रियल एस्टेट में निवेश कर रही हैं। पिछले सालों में ग्रीस और इजरायल के बढ़ते संबंधों का यह परिणाम है। एक तरफ ग्रीस इजरायल से हथियार खरीद रहा है और जनता का पैसा उसमें खर्च हो रहा है दूसरी तरफ इजरायल की सेना के बड़े अधिकारियों की रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा मकानों के दामों और किराये में वृद्धि की जा रही है। 
    
ग्रीस की यूनियनों द्वारा प्रधानमंत्री थ्यारियाकोस मिट्सोटकीस से बातचीत के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वे प्रदर्शनकारियों की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। और एक तरह से गेंद जनता के पाले में डाल दी है कि वे अपनी समस्याओं के हल के लिए संघर्ष तेज करें और शासक वर्ग को मजबूर करें कि उनकी मांगें मानी जाएं। रोजी-रोटी का संघर्ष ग्रीस की जनता को कहां तक लेकर जाता है और इसमें क्रांतिकारी संगठन कैसे भूमिका निभाते हैं, यह देखने वाली बात है।    

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