आई टी सी ने किया सेंचुरी मिल का अधिग्रहण

Published
Sun, 08/16/2026 - 15:50
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सेन्चुरी मिल जो पिछले 42 वर्ष या चार दशक से कागज उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखे हुए थी उसका नाम ‘‘सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल’’ से अब आई टी सी लिमिटेड हो चुका है जिसकी आधिकारिक घोषणा 1 अगस्त 2026 को हुई। 
    
आई टी सी द्वारा अधिग्रहण के बाद यह भारत की सबसे बड़ी एकीकृत पेपरबोर्ड और पेपर कम्पनी बन गयी है। 31 मार्च 2025 के व्यापार हस्तांतरण समझौते के तहत सेंचुरी (जो कि पहले आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट लिमिटेड की एक प्रभाग थी) का इसकी सम्पत्ति, देनदारियां, अनुबंध और कर्मचारी समेत आई टी सी द्वारा अधिग्रहण 1 अगस्त 26 को पूरा हो गया। यह अधिग्रहण एक चालू व्यवसाय के रूप में किया गया है। आई टी सी का यह अधिग्रहण 3498 करोड़ रु. का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण है। 
    
इस अधिग्रहण के पूर्ण होने का इंतजार सभी को था। पर सबसे ज्यादा आशंका सेंचुरी मिल के श्रमिकों की थी कि भविष्य कैसा होने वाला है। जब 31 मार्च 2025 को मालिकाना बदलने की घोषणा हुई थी तो उसके बाद से जुलाई 2026 तक मिल परिसर में पूर्ण सन्नाटा पसरा रहा था।
    
1 अगस्त 26 को कारखाने के प्रशासनिक भवन के समीप आई टी सी पी एस पी ओ के लोगो (लोगों कम्पनी का प्रतीक एवं विशेष चिन्ह) का अनावरण किया गया एवं इस खुशी एवं उत्साह में कारखाने की मुख्य कैंटीन में 1 अगस्त 26 को मिल के सभी स्थायी श्रमिकों के लिए लंच एवं डिनर की व्यवस्था प्रबंधन की तरफ से की गयी। 
    
इससे पूर्व जुलाई माह के अंत में आदित्य बिरला समूह एवं आई टी सी लिमिटेड दोनों संयुक्त रूप से सभी स्थायी श्रमिकों के लिए एक स्थानांतरण पत्र जारी करते हैं एवं उस पत्र पर श्रमिकों की सहमति, सभी नियम एवं शर्तें दर्ज होती हैं जिनके बिन्दु निम्नवत हैं-

1. रोजगार का स्थानांतरण - i. दिये गये साथी का नाम का रोजगार ABREL से ITC लिमिटेड में स्थानांतरण किया जा रहा है।
ii. स्थानांतरण की तारीख एक निश्चित होगी जिसकी सूचना ABREL द्वारा लिखित में अलग से दी जायेगी, तब तक आप ABREL के श्रमिक बने रहेंगे।

2. सेवा की निरंतरता और लाभः i.स्थानांतरण तिथि से ABREL उनका नियोक्ता नहीं रहेगा और केवल ITC ही उनका नया नियोक्ता रहेगा। 
ii. आई टी सी में आपकी सेवा को बिना रुकावट माना जायेगा, में बिताई गयी पिछली सेवा अवधि को आई टी सी द्वारा मान्यता दी जाएगी।
iii. ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट (अर्जित अवकाश), भविष्य निधि (P F) और अन्य वैधानिक लाभ (Statutary Benefit) जो ABREL में संचित थे वे आई टी सी को ट्रांसफर कर दिये जायेंगे। आई टी सी अपने नियमों के अनुसार इन लाभों और भुगतानों के लिए उत्तरदायी होगा। 

3. वित्तीय उत्तरदायित्व और शर्तेंः i. स्थानान्तरण तिथि तक के सभी संचित कर्मचारी लाभों को आई टी सी को सौंपने के बाद भविष्य में होने वाले किसी भी वेतन, भत्ते या लाभों के भुगतान के लिए ABREL जिम्मेदार नहीं होगा।
ii. कर्मचारियों को अपने व्यक्तिगत डेटा (जैसे बैंक खाता विवरण, व्यक्तिगत जानकारी) का उपयोग करने, स्टोर करने और आई टी सी या उसके सेवा प्रदाताओं को ट्रांसफर करने की स्पष्ट सहमति देनी होगी।
iii. यह स्थानान्तरण पूरी तरह से ABREL और आई टी सी के बीच व्यावसायिक सौदे के सफलतापूर्वक पूरा होने पर और कर्मचारी द्वारा समय पर हस्ताक्षरित प्रति जमा करने पर निर्भर है।
    
मूल बात यह है कि इस स्थानान्तरण पत्र से दोनों नियोक्ता अधिग्रहण के बाद उपजे कई सारे सवालो का जवाब देते हैं एवं अपनी समस्त कागजी औपचारिकताएं पूर्ण करते हैं। 
    
1 अगस्त को सभी स्थायी श्रमिकों को लंच एवं डिनर का या भोज का कार्यक्रम सफल रहता है  इसी के साथ सब आई टी सी प्रबंधन सभी कर्मचारियों (स्टाफ एवं स्थायी श्रमिकों) को 14 सूचीनुमा गिफ्ट हेम्पर एवं अस्थायी या ठेका श्रमिकों को 8 सूचीनुमा गिफ्ट हेम्पर देता है जिसमें एक टी-शर्ट के साथ आई टी सी के अन्य उत्पाद रहते हैं। फिर उसके बाद प्रबंधन श्रमिकों के परिजनों को 1 किग्रा. मिठाई एवं 1 मनी प्लांट गिफ्ट स्वरूप देता है। 
    
आई टी सी प्रबंधन अपने उसी उत्सव या समारोहह को आगे बढ़ाते हुए 3 अगस्त 26 को स्टाफ कालोनी ग्राउण्ड में टाउनहोल मीटिंग जिसका शीर्षक ‘‘संगम प्रारम्भ समारोह’’ रहता है, बुलाता है जिसमें सभी स्थायी श्रमिक आमंत्रित रहते हैं। और वहीं कुछ ऐसा होता है जो पुराने प्रबंधक को बार-बार पानी पीने पर मजबूर कर देता है। श्रम संगठनों के मुंह पर तमाचानुमा या उनके मुंह पर कालिख पुतने जैसा लगता है और सभी श्रमिकों के दिलों की आवाज, सभी मजदूरों के चेहरे पर रौनक एवं ऐसा भाव सा आता है कि अब पिछले 42 साल तक की तरह अब नहीं चलने वाला। ऐसा होना किसी की भी कल्पना से परे था। 
    
होता कुछ यूं है कि ‘‘संगम प्रारम्भ समारोह’’ के कार्यक्रम के तहत दोनों नियोक्ताओं को योजना, सहयोग, विकास और साझा सफलता की शुरूआत पर अपनी नीतियों पर परिचय देना था खासकर आई टी सी लिमिटेड को। सबसे पहले मिल के पूर्व सी ई ओ अधिग्रहण के कारणों पर चर्चा करते हुए कार्यरत सभी श्रम संगठनों का हमेशा साथ हमेशा बना रहा इसका बखान करते हैं। उसके बाद नये एच आर -सी एस आर साहब अपने आई टी सी साम्राज्य का परिचय देते हैं। उसके बाद वो आह्वान करते हैं कि किसी भी श्रमिक साथी का आई टी सी लिमिटेड के बारे में कोई सवाल हो तो वे पूछ सकते हैं।
    
फिर क्या था? मानो मिल के श्रमिक इस लम्हे का इंतजार न जाने कब से कर रहे हों। श्रमिकों ने अपनी पुरानी वेतन विसंगति की बात उठाई; पिछले समझौते के लम्बित बिन्दुओं को उठाया; श्रम संगठनों और मजदूरों के बीच बनी गहरी खाई का विषय उठाया; पुराने प्लांटों के जर्जर हालात को उठाया; श्रम संगठनों के पदाधिकारियों का कभी चुनाव न कराना उठाया; फिर उसके बाद श्रमिक समस्याएं उठाते चले गये और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे तो अंत में एच आर साहब को यह बोलना पड़ा कि मुझे अगली मीटिंग भी करनी है। 
    
सवाल जवाब सेशन में नये प्रबंधन ने कुछ जवाब भी दिये जैसे आई टी एस के लम्बित बिन्दुओं का वे अध्ययन करेंगे। अगर सवालों की प्रकृति को गहराई से समझें तो यही समझ में आता है कि 95 प्रतिशत सवाल यूनियनों की बदमाशी या नकारात्मक कार्यपद्धति का भंडाफोड़ ही करते थे। नये प्रबंधक ने इशारों में यह दर्शाया कि उन्हें यहां कोई पेंच फंसा हुआ नजर आ रहा है।
    
जब श्रमिक खड़े होकर नये प्रबंधक से सवाल पूछ रहे थे तो पूरे टाउनहाॅल परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट ही सुनाई दे रही थी, जैसे मानो सभी श्रमिकों के दिल की आवाज निकल रही हो। 
    
उसी दौरान पुराने प्रबंधन और तथाकथित श्रम संगठनों का मुंह पानी-पानी हो रहा था; उनके माथे पर पसीना आने लगा था, मानो इस गठजोड़ की नंगई नये मालिक के सामने आ गई हो।
    
नये प्रबंधन ने ट्रेड यूनियन कल्चर या ट्रेड यूनियन तौर-तरीके के बारे में भी अपने विचार स्पष्ट किये कि आई टी सी के संस्थानों में एक जगह 16 यूनियनें कार्यरत हैं वहां कभी किसी भी तरीके की कोई हड़ताल आज तक नहीं हुई। श्रम संगठनों के कार्यों में आई टी सी कभी दखलअंदाजी नहीं करती, किसी यूनियन के प्रति न ही दुश्मनाना या दोस्ताना रुख रखती है। हर श्रमिक या यूनियन के अपने मूलभूत अधिकार हैं और उन अधिकारों का प्रबंधन सम्मान करता है। आई टी सी ने एक बात और भी बताई कि श्रमिकों की किसी भी तरीके की समस्या के लिए ट्रेड यूनियनों से ही बात करेगी।
    
अब जागरूक श्रमिकों को यह बात ज्यादा स्पष्ट हो गयी है कि उनके हर सवालों के जवाब के लिए, मजदूरों की सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक नयी, जुझारू, लोकतांत्रिक, जनवादी, संघर्षशील एवं लड़ाका यूनियन की जरूरत है जहां सभी श्रमिक अपनी बात दिल खोलकर कर सकें, जहां चुनाव हों, जवाबदेही एवं पारदर्शिता हो।
    
अब मजदूरों के सामने चुनौती है कि यह कार्यभार कैसे पूरा किया जाए। सामने नया मालिक, आगामी एल टी एस 2027 फरवरी से शुरू होने वाला है एवं पुराने घाघ एवं बागड़बिल्ले नेता भी हैं। इन सभी चुनौतियों का मुकाबला श्रमिक अपने भरोसे एवं अपनी सामूहिक ताकत से ही करेंगे।             -लालकुंआ संवाददाता

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