नाइजीरिया में अनाज संकट

अफ्रीकी महाद्वीप का एक देश नाइजीरिया इन दिनों अनाज संकट से जूझ रहा है। 1 अप्रैल को दक्षिण-पश्चिम में ओंडो राज्य की राजधानी अकूरे में जनता ने भूख के कारण गोदामों और ट्रकों में भरा अनाज लूट लिया और उससे पहले 31 मार्च को केब्बी राज्य की राजधानी बिरनिन केब्बी में भी ऐसा ही हुआ। इन अनाज के बैगों पर नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टीनीबू का नाम लिखा था। 
    
जब आम जनता जिसमें मजदूर, दुकानदार और नौजवान थे, ने देखा कि गोदाम में अनाज उतारा जा रहा है तो वे वहां इकट्ठा होने लगे। पुलिस ने उनको तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। लेकिन जब वहां पर दो और ट्रकों में अनाज आया तो निराश लोगों का धैर्य टूट गया और उन्होंने पुलिस पर पथराव कर उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया। और ट्रकों में भरे अनाज के बोरों को लेकर चले गये। 
    
अगले दिन सेना और पुलिस ने गोदाम के आस-पास दुकानों के दुकानदारों पर यह इल्जाम लगाया कि उन्होंने अनाज लूटने में लोगों की मदद की है और अनाज लूटा है। इसी मुठभेड़ में सेना ने एक दुकानदार को गोली मार दी। 
    
अनाज लूटने की ये घटनाएं कई और राज्यों से भी आ रही हैं। इससे पहले कई महीनों से लोग अनाज उपलब्ध करवाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। 
    
नाइजीरिया में अनाज संकट और उससे पैदा होने वाली भुखमरी तेज गति से बढ़ रही है। नाइजीरिया की कुल आबादी करीब 22 करोड़ है। और इसमें से 10 करोड़ आबादी भुखमरी की शिकार है। ज्ञात हो कि 2023 में 66 लाख की आबादी भुखमरी की शिकार थी। इसमें से 5 लाख की आबादी गंभीर कुपोषण की शिकार है। 
    
जब कोरोना संकट का काल चल रहा था तब नाईजीरिया के सबसे बड़े शहर लागोस में फ़ूड बैंक ने 2,40,000 महिलाओं और बच्चों की मदद की थी लेकिन 2023 में 7 लाख लोगों ने मदद करने की अपील की।
    
नाइजीरिया में इस अनाज संकट के कुछ निश्चित कारण हैं।
    
29 मई 2023 में वर्तमान राष्ट्रपति बोला टीनूबी सत्ता में आये थे। सत्ता में आने के बाद बोला टीनूबी ने ईंधन पर दी रही सब्सिडी खत्म कर दी। इससे ईंधन की कीमतें 200 प्रतिशत बढ़ गयीं। इस बढ़ी महंगाई ने लोगों की अनाज खरीदने की क्षमता कम कर दी। हालत यह हो गये कि एक मज़दूर 3 लोगों के परिवार को अपनी एक माह की तनख्वाह से केवल एक सप्ताह का ही भोजन उपलब्ध करवा पा रहा है। तीनों वक्त के भोजन के बजाय एक वक्त का भोजन मिलने के कारण कुपोषण बढ़ता गया।
    
इसके अलावा राष्ट्रपति ने नाइजीरिया की मुद्रा के व्यापार में ढील दे दी। फलस्वरूप मुद्रा के दाम तिहाई तक गिर गये और आयात मुश्किल हो गया।
अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने राष्ट्रपति बोला टीनूबी की नीतियों की काफी सराहना की। और नाइजीरिया को कर्ज चुकाने की पर्याप्त क्षमता वाले देश के रूप में चिन्हित किया। इससे समझा जा सकता है कि साम्राज्यवादी इस भुखमरी के पीछे हैं। 
    
नाइजीरिया आर्थिक संसाधनों के रूप में सम्पन्न देश है। यहां पेट्रोलियम का दुनिया का 10वां बड़ा भंडार है जो 237 साल तक चल सकता है। इसके अलावा यहां 40 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई के लायक है जिससे अनाज की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। लेकिन देशी-विदेशी पूंजी ऐसा नहीं चाहती। पूंजीपति अनाज का नियंत्रण अपने हाथों में लेकर मुनाफा कमाना चाहते हैं। 
    
इसके अलावा पिछले सालों में आयी बाढ़ ने भी अनाज संकट को बढ़ाया है। दरअसल जब पिछले साल किसान धान बोने की तैयारी कर रहे थे तब पड़ोसी देश कैमरुन ने अपने बांध का पानी छोड़ दिया और नाइजीरिया के अंदर तीन जलाशयों का पानी आने से हजारों एकड़ भूमि पानी में डूब गयी और धान न बोने से उत्पादन गिर गया। बाढ़ आने का 2005 से जंगलों की अंधाधुंध कटाई भी एक कारण है। 
    
इसके साथ ही किसानों के सामने एक अन्य संकट भी है। कुछ गिरोह किसानों से कर (वसूली) इकट्ठा करते हैं। ये गिरोह कर न देने वाले किसानों की हत्या तक कर देते हैं। सेना भी इन गिरोहों से किसानों की रक्षा नहीं कर पाती। किसानों से वसूल की गयी यह राशि काफी ज्यादा होती है। इस कारण भी किसान खेती छोड़ अन्य काम तलाश करने लगते हैं।
    
अफ्रीकी देश प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश हैं लेकिन साम्राज्यवादियों का यहां लगातार हस्तक्षेप रहा है। आजाद होने के बावजूद भी ये देश साम्राज्यवादियों के आर्थिक नव उपनिवेश बने हुए हैं और इनके संकट के लिए यह कारक महत्वपूर्ण है। नाइजीरिया भी इसी तरह के संकट का शिकार है।

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