जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का आंखों देखा हाल

Published
Sat, 08/01/2026 - 15:50
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दिल्ली/ जंतर-मंतर पर हजारों छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हाथों में तख्तियां, बैनर और झंडे लिए छात्र अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगा रहे थे। हर एक मिनट में अलग-अलग कोने से नारों की आवाज कानों में पड़ती, हर नारा अपने में कोई न कोई गहरा मतलब, गुस्सा, व्यंग्य आदि लिए हुए होता था। पूरे क्षेत्र में पेपर लीक, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो ‘‘शिक्षा हमारा अधिकार है’’, ‘‘परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाओ’’ और ‘‘छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो’’ जैसे नारे गूंज रहे थे।
    
अलग-अलग छात्र शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे थे। कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। हाल के दिनों में जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है।
    
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। पूरे इलाके को बैरिकेडिंग से पाट दिया गया था। पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी। ऐसा लगता था जैसे आप किसी बाॅर्डर पर पहुंच गये हैं। इसके बावजूद प्रदर्शन में लोग अलग-अलग राज्यों से पहुंच रहे थे। बीच-बीच में छात्रों पर आंसू गैस व लाठियां भी चल रही थीं। इन सब के बावजूद भी आंदोलन पूरे जोश के साथ चल रहा था। 
    
पूरे वातावरण में छात्रों का जोश, एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति लड़ने का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था। यह आंदोलन एक अलग और बिल्कुल नये तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास था।
    
आंदोलन की एक नयी बात थी- आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से तमाम लोगों द्वारा की जाने वाली फूड डिलीवरी। पूरा जंतर मंतर का इलाका अलग-अलग इलाकों से आर्डर किए जाने वाले फूड डिलीवरी प्लेटफार्म स्विग्गी, जोमैटो आदि के डिलीवरी वालों से भर गया था। इस दृश्य से यह भी अंदाजा लग रहा था कि आंदोलन को छात्रों के अलावा भी विभिन्न तबकों से सहयोग-समर्थन काफी  मिल रहा था। 
    
सरकार और दिल्ली पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी वह इस आंदोलन में युवाओं को शामिल होने से रोकने में असमर्थ रही हालांकि सरकार ने पूरा प्रयास किया। तमाम मेट्रो स्टेशनों को बंद कर भी वह युवाओं की भागीदारी नहीं रोक पाई।
    
जंतर मंतर धरना-प्रदर्शन का आकर्षण का एक केंद्र उसमें मौजूद ळमर्द  लड़कियां यानी नई पीढ़ी की छात्राएं रहीं। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई। सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी भागीदारी ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। नई पीढ़ी की यह लड़कियां न सिर्फ अपने हक अधिकार के लिए आगे बढ़कर निडर होकर आवाज उठा रही थीं, बल्कि उनकी बेखौफ बेबाकी अंदाज से देश में मौजूद सत्ता, दक्षिणपंथी ताकतें, फासीवादी ताकतें भी सकते में पड़ गयी थीं। ये बेखौफ लड़कियां अभी तक भारतीय समाज में गढ़ी गई लड़कियों की छवि को तोड़ रही थीं। जिस वजह से यह लड़कियां संघ-भाजपा की ट्रोल आर्मी के सीधे निशाने पर आईं। इनको भारत की संस्कृति के लिए खतरे के बतौर दिखाया जाने लगा।
    
आंदोलन की एक बड़ी ताकत धरना स्थल पर मौजूद तमाम क्रांतिकारी, वामपंथी छात्र संगठनों से लेकर संशोधनवादी छात्र संगठन रहे। इनकी मौजूदगी इस पूरे आंदोलन का आंशिक ही सही पर राजनीतिकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी।
    
आंदोलन जिस जेन जी द्वारा चलाया जा रहा था उसमें देखने वाली बात यह थी कि विभिन्न उम्र के छात्र-छात्राएं धरनास्थल व धरनास्थल के  बाहर अपनी यथासंभव भूमिका को निभा रहे थे। चाहे वह आई हुई खाद्य सामग्री को तमाम लोगों तक पहुंचाना हो या धरनास्थल की सफाई करना हो। खुद को वालंटियर के बतौर प्रस्तुत कर वह अलग-अलग मामलों में अव्यवस्था न फैले, इस पर निगाहें बनाकर रखे थे।
    
एलजीबीटीक्यु प्लस समुदाय की भी एक ठीक-ठाक संख्या इस प्रदर्शन में बनी हुई थी। वह खुद को अपनी एक पहचान के बतौर सामने ला रही थी। 
    
इस तरह अगर देखें तो जंतर-मंतर का यह छात्र आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के युवाओं की बेचैनी, उम्मीदों और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रदर्शन भी था। यहां मौजूद छात्र-छात्राएं केवल परीक्षा व्यवस्था या रोजगार के सवाल नहीं उठा रहे थे, बल्कि वे एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे थे जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित हों। आंदोलन में दिखाई देने वाली एकजुटता, स्वयंसेवी भावना, विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी और देशभर से मिले समर्थन ने यह स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया था।
    
साथ ही, इस आंदोलन ने यह भी दिखाया कि आज की नई पीढ़ी विशेषकर छात्राएं सार्वजनिक जीवन में पहले से कहीं अधिक मुखर और सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। अलग-अलग वैचारिक धाराओं के छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और नागरिकों की उपस्थिति ने इस आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया। देश में लगातार छिनते जनवादी अधिकार व असहमतियों का गला घोंटने की कोशिशों के खिलाफ यह छात्र-युवाओं का एक जबरदस्त आंदोलन रहा। जंतर-मंतर का यह दृश्य उसी परंपरा की एक जीवंत अभिव्यक्ति था।         -दिल्ली संवाददाता
 

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