मोदी राज में उजड़ती दुनिया

देश में जब से फासीवादी मोदी सरकार आई, पूरे देश में डर, भय, आतंक का माहौल बना हुआ है। किस राज्य में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता है। फिलहाल मणिपुर राज्य में पूरी तरह से आतंक-भय-दंगे के माहौल में वहां के लोग जी रहे हैं। कब किसकी मौत आ जाए कहा नहीं जा सकता। खूनी खेल में पूरा राज्य ही केन्द्र बना हुआ है। राज्य और केन्द्र में भाजपा की सरकार है। चार महीने से ज्यादा बीत गये फिर भी हिंसा का माहौल जारी है। धार्मिक जहर पिला पिला कर लोगों की नफरत को पैदा किया गया। उस नफरत की आग में पूरा मणिपुर जल रहा है। भाजपा उस आग में घी डाल कर आग को हवा दे रही है। शासक मौन हैं। राज्य को सेना के अधीन दे दिया गया है। पचास हजार से ज्यादा लोग शरणार्थी की तरह जी रहे हैं। शरणार्थियों का अपना घर उजड़ चुका है। 
    
हरियाणा राज्य के नूंह जिले में धार्मिक माहौल बनाकर बजरंग दल वालों ने दंगे का माहौल बना दिया। हिन्दू-मुसलमानों के बीच दंगा करा दिया, उस दंगे में छः लोगों की मौत हो गयी। भाजपा की सरकार ने मुसलमानों के घर को बुलडोजर चलवा कर तोड़ दिया और सरकार ने कहा कि घर अवैध तरीके से बने हुए थे इसलिए घरों को तोड़ दिया गया है। 
    
योगी सरकार की देन है बुलडोजर की प्रथा। भाजपा सरकारों ने घरों को तो तोड़ दिया जनता बेघर हो गई। किसी एक पंथ के घरों को तोड़ दिया गया, क्या न्याय है भाजपा का। घर तोड़ना तो आसान है घर बनाना बड़ा मुश्किल है। एक घर बनाने में सालों दर साल सोचना पड़ता है कि पैसे-रुपये की व्यवस्था कैसे की जाए, ताकि घर में पूरा परिवार रहे सके सुख शांति से, घर बनाने में पूरे जीवन की कमाई लग जाती है घर को सजाने में। घर बनाने में ईंट, सीमेंट, बालू, सरिया, कंक्रीट, मिस्त्री, मजदूर, साथ में घर के पूरे परिवार को मेहनत करनी पड़ती है तब जाकर घर का निर्माण हो पाता है। कोई अपना जेवर तक और पुश्तैनी जमीन तक बेच कर घर बनाते हैं। सरकार में बैठे मंत्री, विधायकों को सरकारी घर मिलता है। वेतन गाड़ी सारी सुविधा और खर्चा मिलता है। पक्ष या विपक्ष पूरा जीवन भर वेतन पाते हैं। उन्हें क्या मालूम कि जिसका घर टूटा है वह किस हालात में जिन्दा होगा। खुला आसमान है या तिरपाल है। गम के आंसू पीकर जिन्दा लाश की तरह होगा। घर एक निर्जीव चीज होता है। घर में रहने वाले लोग एक परिवार की तरह रहते हैं। घर किसी भी व्यक्ति को आदेश नहीं देता कि तुम अपराधी बनो या जुर्म करो या दंगा। घर में रहने वाला एक आदमी कसूरवार हो सकता है पूरे घर का परिवार नहीं। घर को तोड़े देने से घर के लोगों की तबाही-बर्बादी होती है। आर्थिक क्षति होती है। इसका सारा कसूर भाजपा की फासीवादी सरकार का है जो कि फासीवादी नीतियों पर चल रही है। जब तक ये सरकार रहेगी जुर्म जनता पर करती रहेगी। इस फासीवादी सरकार को जनता संघर्ष के दम पर ही उखाड़ फेंकेगी। 
        -रामकुमार वैशाली

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