शाही एक्सपोर्ट के मजदूरों का संघर्ष

Published
Sat, 08/01/2026 - 15:50
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पिछले दिनों हरियाणा में मजदूर आंदोलन के दबाव में अप्रैल 2026 में हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाया। जिसके बाद से ही हरियाणा के तमाम कंपनी मालिक पागलों की तरह मजदूरों को और अधिक लूटने के लिए, उन्हें दरिद्रता की जिंदगी में ढकेलने को आमादा हो गए।
    
फरीदाबाद में अधिकतर कंपनी मालिकों ने अपने यहां काम करने वाले ज्यादातर कुशल, अति कुशल मजदूरों को या तो अर्ध कुशल या हेल्पर मजदूर का वेतन देकर काम करवाना शुरू कर दिया। या ज्यादातर मजदूरों की छंटनी करके उन्हीं मजदूरों की नयी भर्ती दिखाकर अर्ध कुशल मजदूर के वेतन पर काम पर रख लिया गया है। या नए भर्ती होने वाले मजदूरों को अर्ध कुशल मजदूर या हेल्पर का वेतन देकर कुशल मजदूरों का काम करवाया जा रहा है। या मजदूरों का ओवर टाइम बंद करके उन्हें सप्ताह में पांच दिन का काम दिया जा रहा है और शनिवार की छुट्टी का पैसा भी मजदूरों की सैलरी से ही काटा जा रहा है लेकिन कंपनियों ने सैलरी बढ़ाने के नाम पर मजदूरों के ऊपर काम का बोझ बढ़ा दिया है। टारगेट में बढ़ोत्तरी कर दी गई है।
    
इसी कड़ी में शाही एक्सपोर्ट कंपनी के मालिक एवं मैनेजमेंट ने मिलकर अपनी कंपनी के मजदूरों के हक पर ही डाका डाल दिया है। इस कंपनी में अभी तक मजदूरों को 20 प्रतिशत बोनस प्रतिवर्ष दिया जाता रहा है। लेकिन हरियाणा में अप्रैल माह में सैलरी बढ़ने के बाद शाही एक्सपोर्ट के मैनेजमेंट ने जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में मजदूरों से कहा कि कंपनी घाटे में है और कंपनी अब मजदूरों को दिवाली पर 8.33 प्रतिशत ही बोनस देगी। 
    
मजदूर इस बात को समझ गए कि कंपनी एक हाथ से उनका वेतन मजबूरन बढ़ा रही है और दूसरे हाथ से बोनस कटौती करके छीन रही है। जिसके खिलाफ शाही एक्सपोर्ट के मजदूरों का गुस्सा 17 जुलाई 2026 को फूट पड़ा और बड़ी संख्या में सभी डिपार्टमेंट के मजदूर अपना-अपना काम सुबह से ही बंद करके सेक्टर-28, मेट्रो स्टेशन के पास मथुरा रोड को जाम करने के मकसद से सड़क पर उतर गए। भारी पुलिस बल लगाकर ही मजदूरों को सड़क जाम करने से रोका गया। इसके बाद मैनेजमेंट ने चालाकी से मजदूरों को वार्ता के लिए कंपनी के गेट के अंदर बुलाया और बाहर से ताला लगवा दिया। मजदूर महिलाएं गेट हिलाते हुए लगातार गेट से बाहर जाने का प्रयास करती रहीं। इस दौरान श्रम विभाग के अधिकारी, लेबर इंस्पेक्टर एवं डीएलसी तक मजदूर महिलाओं को समझाते रहे कि कंपनी घाटे में है, आपको कानूनन बोनस 8.33 प्रतिशत सही दिया जा रहा है।
    
मजदूर भी अपनी 20 प्रतिशत बोनस की मांग पर अड़े रहे। मजदूरों ने कहा कि शाही एक्सपोर्ट की पूरे देश के स्तर पर 65 कंपनियां हैं और इसके बाद भी हाल ही में फरीदाबाद में एक और नई कंपनी शाही एक्सपोर्ट की खोली जा रही है जिनका मुनाफा अरबों रुपए में है। अगर कंपनी घाटे में है तो वह नई-नई कंपनियां कैसे खोल रही है और हम इस साल का बोनस नहीं मांग रहे हैं बल्कि जिस साल हमने कंपनी में पूरे साल भर काम किया है, यानी कि वर्ष 2025-26 का बोनस मांग रहे हैं।
    
मजदूर जिन परिस्थितियों में शाही एक्सपोर्ट कंपनी के अंदर काम करते हैं वह अमानवीय हैं। कंपनी के अंदर मशीनों पर मजदूरों से 150 से लेकर 180 पीस प्रति घंटा उत्पादन लिया जाता है और अगर कोई मजदूर किसी कारणवश उत्पादन पूरा न कर पाए तो उसको बेइज्जत किया जाता है। ऐसे में महिला मजदूर अगर अपनी किसी शारीरिक दिक्कत के कारण बाथरूम जाना चाहे तो भी उन्हें सोचना पड़ता है।
    
18 जुलाई को कंपनी मैनेजमेंट के द्वारा कंपनी के अंदर एवं कंपनी के आने-जाने के रास्तों पर लगभग 500 मीटर के क्षेत्र पर भारी पुलिस बल लगाया गया, वाटर कैनन की गाड़ियां गेट पर लगाई गईं और मजदूरों के अंदर दहशत पैदा करने की कोशिश की गयी। लेकिन इसके बावजूद मजदूर गेट से लगभग 300 मीटर की दूरी पर एक पार्क में इकट्ठा हो रहे थे। पुलिस प्रशासन, मैनेजमेंट ने पूरा दिन मजदूरों को 8.33 प्रतिशत बोनस लेकर काम करने को कहा, मनाने-धमकाने का प्रयास किया लेकिन मजदूर महिलाएं व पुरुष मजदूर अपनी जायज मांग 20 प्रतिशत बोनस की मांग पर अड़े रहे।
    
20 जुलाई 2026 को कंपनी मैनेजमेंट के द्वारा मजदूरों को वार्ता के लिए अंदर आने को कहा जिस दौरान सभी पुरुष मजदूर मैनेजमेंट से वार्ता के लिए अंदर गए। वार्ता के दौरान भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। जो मजदूर वार्ता के लिए गए थे उन्हें कंपनी मैनेजमेंट ने पुलिस प्रशासन के दम पर गेट से बाहर नहीं आने दिया एवं भारी पुलिस बल लगाकर महिला मजदूरों को भी पार्क से लाठी चार्ज करवाकर हटा दिया। इस दौरान चार महिलाओं को पुलिस वैन में बैठाकर मारा-पीटा गया एवं उन्हें गिरफ्तार करके सेक्टर-31 थाने में ले जाया गया। मजदूर पुनः एकजुट न हो जाएं इस डर की वजह से पुलिस ने मजदूरों को लगभग 2 किलोमीटर दूर तक डंडा फटकारते हुए भगाया।
    
लाठी चार्ज के दौरान एक महिला को डंडों से चोट लगी व कपड़े फटे एवं एक पत्रकार के भी पुलिस ने कपड़े फाड़े। जो लोग वीडियो बना रहे थे उनके मोबाइल से वीडियो डिलीट की गई एवं धमकाया गया। थाने में भी मजदूर महिलाओं को मानसिक तौर पर काफी ज्यादा टार्चर किया गया। इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं औद्योगिक ठेका मजदूर यूनियन के साथी थाने में डिटेन की गई महिला मजदूरों से मिले और मजदूरों का हौंसला बढ़ाने का प्रयास किया और उन्हें थाने से छुड़ाया। संगठन के साथियों ने मजदूर महिलाओं को बिना किसी अपराध के थाने में बिठाने को गलत बताया एवं उन्हें छोड़ने को कहा।
    
थाना अध्यक्ष ने संगठन के साथियों को अपनी गारंटी पर मजदूरों को ले जाने की बात कही लेकिन जब संगठन के साथियों ने अपनी गारंटी पर मजदूर महिलाओं को छुड़ाने के लिए लेटर लिखा तो पुलिस वाले पलट गए और कहने लगे कि हम सभी महिला मजदूरों को उनके घर छोड़ कर आएंगे। लेकिन शाम तक पुलिस ने मजदूरों को नहीं छोड़ा और मजदूर महिलाओं को थाने में बिठाकर मानसिक तौर पर परेशान करते रहे।
    
21 जुलाई को मैनेजमेंट और मजदूरों की फिर वार्ता हुई जिस दौरान भी मैनेजमेंट मजदूरों को 20 प्रतिशत बोनस के बदले 8.33 प्रतिशत बोनस देने पर अड़ा रहा। जो मजदूर काम पर वापस गये उनसे 8.33 प्रतिशत के बोनस लेटर पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में संघर्ष में आगे आकर बोलने वाले मजदूरों को काम से निकाल दिया।
    
फरीदाबाद स्थित शाही एक्सपोर्ट के 15/1, मथुरा रोड स्थित प्लांट में भी 18 जुलाई को मजदूर आक्रोशित हो काम बंद कर मशीनों पर बैठ गये जिनको बड़ी संख्या में पुलिस लगाकर डराया गया। इसी तरह गाजियाबाद स्थित प्लांट में भी मजदूरों ने बोनस कटोती के खिलाफ तीन दिन हड़ताल की। संघर्ष के दबाव में मैनेजमेंट ने चालाकी से हस्ताक्षर किए बिना कम्पनी में 20 प्रतिशत बोनस का नोटिस चस्पा किया और मजदूरों को धोखा दिया। बाद में लड़ने वाले मजदूरों को काम से निकाल दिया। इसी तरह नोएडा फेस-2 में भी शाही एक्सपोर्ट कंपनी के मजदूरों ने अपने बोनस कटौती के खिलाफ संघर्ष किया।
    
शाही एक्सपोर्ट कंपनी के मालिक ने अपनी पूंजी के मुनाफे के लिए एवं पुलिस प्रशासन भले ही अपने आकाओं की तिजोरियों के खजाने की रक्षा के लिए मजदूरों के आंदोलन को दमन के द्वारा दबाने की कोशिश में सफल हुआ लेकिन इस दमन से मजदूरों का हौंसला और बुलंद ही होगा। आज मैनेजमेंट-पुलिस प्रशासन भले ही खुश हो लें। लेकिन इन्हीं पूंजीपतियों के अति मुनाफा कमाने और मंहगाई, बेरोजगारी आदि के कारण मजबूर हो फिर एक बार मजदूर आवाज उठाऐंगे। -फरीदाबाद संवाददाता

 

शाही एक्सपोर्ट कंपनी के बारे में

शाही एक्सपोर्ट कंपनी की शुरुआत 1974 में कुछ मशीनों के साथ आनंद आहूजा की मां सरल आहूजा के द्वारा की गई थी। आज के समय में इस कंपनी के प्रबंधक निदेशक आनंद आहूजा के पिता हरीश आहूजा हैं।
    
मौजूदा समय में शाही एक्सपोर्ट कंपनी की भारत के नौ राज्यों फरीदाबाद, दिल्ली एनसीआर, नोएडा, हैदराबाद, सोलन, त्रिपुरा, बैंगलोर, शिमोगा, मैसूर आदि शहरों-जगहों में 65 प्लांट्स व तीन प्रोसेसिंग मिल स्थित है। जिनमें 67 प्रतिशत महिला मजदूरों के साथ लगभग 1 लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं जो कि कंपनी के लिए 14 करोड़ 40 लाख कपड़ों से ज्यादा हर साल बनाते हैं।
    
फरीदाबाद स्थित शाही एक्सपोर्ट इंडस्ट्रियल एरिया प्लाट नंबर 1 नियर मेट्रो स्टेशन सेक्टर 28 फरीदाबाद में आज के समय में लगभग 5 से 6000 मजदूर काम करते हैं जिनमें बड़ी संख्या में महिला मजदूर हैं जो कि लगभग 2.5 लाख से 3.5 लाख कपड़े (गारमेंट्स) हर महीने तैयार करते हैं। 
    
शाही एक्सपोर्ट कंपनी अमेरिका और यूरोप की गैप, डेक्थलान, वालमार्ट, जेसी पेनी, मैक्स, पोलो आदि कंपनियों के लिए डेनिम जींस, जोगिंग्स, ट्रेक पैंट्स, पतलून, पजामा व इसकी अन्य इकाइयां टाप्स कैजुअल वियर, ड्रेस शर्ट, कैजुअल पैंट्स, महिलाओं/पुरुषों की कमीज, चिकन, हुडी, क्रु गर्दन, कार्गो शर्ट, रात्रि वस्त्र, ऊनी जैकेट आदि बनाती हैं।

 

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