फासीवाद

मुखौटे के पीछे असली चेहरा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को 2025 में सौ साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर आरएसएस ‘100 इयर्स आफ संघ जर्नी : न्यू होराइजन्स’ नामक व्याख्यान श्रृंखला चला रहा है। इस एक साल में प

उत्तराखण्ड के 25 साल : पूंजीपति मालामाल - मेहनतकश जनता कंगाल

उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये। मोदी और धामी ने इस मौके को ऐसे रूप में पेश करने की कोशिश की मानो गंगा फिर से धरती पर अवतरित हो गयी हो। उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये तो

दिल्ली विस्फोट : मोदी सरकार की विफलता

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दिल्ली विस्फोट में 13 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इस विस्फोट पर अपनी खुफिया विफलता स्वीकारने के बजाय हमेशा की तरह ‘दोषी बख्शे नहीं जायेंगे’ का राग छेड़ने का

नयी शिक्षा नीति के भूत-प्रेत

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संघी ठीक इसी वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या उसका मन माफिक इस्तेमाल करते हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि आज की वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा वेदों में आधुनिक विज्ञान को नहीं ढूंढा जा सकता। इसी तरह आज की वैज्ञानिक पद्धति से प्राचीन भारत में परमाणु बम, मिसाइल या हवाई जहाज के अस्तित्व को नहीं प्रमाणित किया जा सकता। इसीलिए वे अपनी सुविधानुसार इस वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या तोड़ते-मरोड़ते हैं। और कोई चारा न होने पर ये सापेक्षिकतावादी या संदेहवादी रुख अख्तियार कर लेते हैं। आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धति को संदेह के दायरे में लाकर ये अपनी बेसिर-पैर की बातों को जायज ठहराने का प्रयास करते हैं।

हिन्दू फासीवाद के लंपट दस्ते

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नवनिर्वाचित संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा अम्बेडकर कालेज के एक प्रोफेसर सुजीत कुमार को थप्पड़ मारने की घट

पी एफ नियमों में आशंकित करने वाले बदलाव

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएफ में कर्मचारियों के जमा पैसों के निकासी के नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किये हैं, जिससे करीब 7 करोड़ ईपीएफ अंशधारकों में चिंता और ब

एस.आई.आर. : बिहार के बाद अब 12 राज्यों में फासीवादी परियोजना

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चुनाव आयोग बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण कराने के बाद अब इसे पूरे देश पर थोपने को उतारू है। इस सम्बन्ध में 28 अक्टूबर से 7 फरवरी तक 12 राज्यों में एस आई आर की घोषणा चुनाव

आई लव मुहम्मद : मुसलमान समाज की प्रतिक्रिया और फासीवादी दमन

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हिंदू फासीवादी मोदी सरकार एवं भाजपा शासित राज्य सरकारों में हर तरह से जनवाद और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जनता को फासीवादी आतंक के साये में जीने मजबूर किया जा रहा ह

उत्तराखंड में रोज तीन बच्चे लापता

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देश और देश के अलग-अलग राज्यों में अपराधों को बताने के लिए सरकारी संस्थाएं हर साल एक रिपोर्ट तैयार करती हैं और उस रिपोर्ट को जारी करती हैं ताकि देश में अपराधों की स्थिति क

आलेख

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जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि