कोई भी बात उठाओ, बात इंकलाब तक जायेगी
ऐसे में जब ‘अद्भुत करिश्मे’ की जरूरत हो तब छोटे-मोटे मदारियों की कला से काम नहीं चल सकता है। तत्काल तो इस बात की एक आवश्यकता बनती है कि हिन्दू फासीवादी आंदोलन को चुनौती और शिकस्त दी जाए परन्तु यह ‘अद्भुत करिश्मे’ का एक अंक होगा। क्योंकि आज के सारे ‘लोकतंत्र खतरे में है’ या ‘‘संविधान खतरे में है’’ की पुकार लगाने वाले कभी नहीं चाहेंगे भारत के मजदूर-मेहनतकश ऐसा ‘अद्भुत करिश्मा’ करें जो उनका भी विनाश कर दे।