सरकारी अस्पताल के खस्ताहाल: धरना-प्रदर्शन
रामनगर/ रामनगर के सरकारी अस्पताल की खस्ता हालत पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों द्वारा 24 अगस्त को अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किय
रामनगर/ रामनगर के सरकारी अस्पताल की खस्ता हालत पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों द्वारा 24 अगस्त को अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किय
रसड़ा (बलिया)/ 24 अगस्त को रसड़ा तहसील मुख्यालय पर ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा ग्रामीण मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर जुलूस निकाला गया। जुलूस कई रास्तों
हरिद्वार/ 20 अगस्त 2026 को चिन्मय डिग्री कालेज के निकट विभिन्न संगठनों द्वारा गुजरात के सूरत में संघर्षरत मजदूरों पर पुलिस प्रशासन व गुंड़ों द्वारा बर्बर
हरिद्वार/ उत्तराखण्ड के किसान संगठनों ने अपनी विभिन्न न्यायपूर्ण मांगों के लिए बीते दिनों 3 दिवसीय जिला मुख्यालयों पर धरने का आह्वान किया। इसी कड़ी में उत
फरीदाबाद/ 26 अगस्त को फरीदाबाद के बीके चैक में, ‘‘फरीदाबाद जन संघर्ष समिति’’ के बैनर तले बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन किया गया।
दार्जिलिंग पहाड़ियों के गाड़ीधुरा और पंखाबाड़ी के बीच स्थित लांगव्यू चाय बागान कभी दार्जिलिंग के सबसे बड़े बागानों में से एक था। इसकी उत्पादकता भी काफी अधिक थी। 1879 में स्था
प्रतिवर्ष 31 जुलाई को हमारे देश के प्रगतिशील-क्रांतिकारी संगठन महान क्रांतिकारी उधमसिंह का शहादत दिवस और महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिवस मनाते हैं। उधमसिंह, जि
रुद्रपुर/ 10 अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं बरसी पर मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों एवं यूनियनों ने श्रमिक संयुक्त
सेन्चुरी मिल जो पिछले 42 वर्ष या चार दशक से कागज उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखे हुए थी उसका नाम ‘‘सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल’’ से अब आई टी सी लिमिटेड हो चुका है जि
राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों के संसद मार्च के दौरान पुलिस और अर्ध सैन्य बलों द्वारा भारी दमन चक्र चलाया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?