रिपोर्ट

वेतन वृद्धि समझौता के लिए किर्बी के मजदूरों का संघर्ष तेज

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हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल

उत्तराखंड उपनल संविदाकर्मियों का आंदोलन

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देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक

4 लेबर कोड्स लागू होने का देशव्यापी विरोध

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मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये

राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ते भाजपाई

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हल्द्वानी/ विगत 16 नवम्बर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के उजाला नगर में मंदिर के पास बछड़े का सिर मिलने की खबर फैली। खबर फैलते ही इसे साम्प्रदाय

महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति ने मानव इतिहास में एक नये युग की शुरुआत की थी। महान लेनिन और बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व में 1917 में रूस में संपन्न हुई इस क्रांति ने इतिहास में पहली बार किसी एक देश क

भोजनमाताओं ने विकास के पाखण्ड की पोल खोली

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उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर 9 नवम्बर को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा रामनगर, हरिद्वार और लालकुंआ में सभायें कर धामी सरकार पर अमानवीय शोषण करने का आरोप ल

‘‘अंधराष्ट्रवाद और मीडिया’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन

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लखनऊ/ नागरिक अखबार द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करण भाई सभागार में ‘‘अंधराष्ट्रवाद और मीडिया’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेम

सेन्चुरी मिल : मालिकाना बदला पर श्रमिकों के हालात नहीं

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लालकुंआ/ सेन्चुरी पेपर मिल भारत में एकल स्थान पर पल्प, पेपर, बोर्ड और टिश्यू का उत्पादन करने वाली सबसे बड़ी विनिर्माण सुविधाओं में से एक है। इसकी कुल उत्प

माब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के साथ घरना-प्रदर्शन

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रामनगर (उत्तराखंड) के छोई व  बैलपड़ाव में 23 अक्टूबर के घटनाक्रम में मॉब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग ने अब आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। इस मा

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?