मजदूरों के पास निरंतर संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं
हरिद्वार/ किर्बी बिल्डिंग सिस्टम लिमिटेड, सिडकुल हरिद्वार के मजदूरों का संघर्ष जारी है। इस बीच 9-10 महीनों से लगातार संघर्ष में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। प्
हरिद्वार/ किर्बी बिल्डिंग सिस्टम लिमिटेड, सिडकुल हरिद्वार के मजदूरों का संघर्ष जारी है। इस बीच 9-10 महीनों से लगातार संघर्ष में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। प्
देहरादून/ प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने 26 अक्टूबर 2025 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ‘समान नागरिक संहिता : जनवाद का विस्तार या फासीवादी हमला’ वि
गुड़गांव/ दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को गुड़गांव प्रशासन ने सेक्टर-12, गुड़गांव के पास प्रेम नगर में लगभग 25 झुग्गियों को तोड़ दिया। यहां पर लगभग 80 के आस-पास झु
रामनगर/ उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करने के विरोध में रामनगर में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा विरोध प्रद
इजराइल द्वारा गाजा में किये गये नरसंहार के दो साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान गाजा पट्टी में आधिकारिक तौर पर ही 70 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं; हालांकि मरने वालों
पंजाब की भीषण बाढ़ में पीड़ित जनता को राहत पहुंचाने के लिए 23 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक विभिन्न स्थानों पर आपदा राहत मंच द्वारा मेडिकल कैम्प लगाया गया। आपदा राहत मंच प्रोग्रे
हरिद्वार/ इंकलाबी मजदूर केन्द्र का सातवां केन्द्रीय सम्मेलन 4-5 अक्टूबर को हरिद्वार में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरूआत में निवर्तमान अध्यक्ष ने झण्डारोहण
हिंदू फासीवादी मोदी सरकार एवं भाजपा शासित राज्य सरकारों में हर तरह से जनवाद और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जनता को फासीवादी आतंक के साये में जीने मजबूर किया जा रहा ह
शहीद भगतसिंह हमारे देश के ऐसे महान क्रांतिकारी रहे हैं जो कि अपने जन्म (28 सितम्बर, 1907) और अपनी शहादत (23 मार्च, 1931) के इतने सालों बाद भी देश के मजदूरों, किसानों और य
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?