विविध

शासक पूंजीपति वर्ग का दिवालियापन

पूंजीपति वर्ग की भूमिका एकदम फालतू हो जानी थी

आज की पुरातन व्यवस्था (पूंजीवादी व्यवस्था) भी भीतर से उसी तरह जर्जर है। इसकी ऊपरी मजबूती के भीतर बिल्कुल दूसरी ही स्थिति बनी हुई है। देखना केवल यह है कि कौन सा धक्का पुरातन व्यवस्था की जर्जर इमारत को ध्वस्त करने की ओर ले जाता है। हां, धक्का लगाने वालों को अपना प्रयास और तेज करना होगा।

ओवरटाइम भाग-2

मजदूरों का ओवरटाइम

पृथ्वी लगातार तीव्र गति से अपने अक्ष पर घूम रही है। प्रत्येक 24 घंटे में मानव जाति इसे अगले दिन में बदलता हुआ देखती है। परंतु फैक्टरी का जीवन पृथ्वी के घूमने के हिसाब से

भारतीय अर्थव्यवस्था बदहाल

पिछले वित्त वर्ष में संगठित रिटेल सेक्टर के कारोबार में 4 प्रतिशत की गिरावट आई

नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अब जनता की आशाओं पर तुषारापात होने लगा है। पिछले 10 साल से सत्ता पक्ष ने अपनी गढ़ी कहानियों के जरिये लोगों में कुछ बेहतर करने की उम्मीद

सर्वे कम्पनी के मजदूरों का शोषण

हल्द्वानी/ जीआईएस कंसोर्टियम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एच-112, प्रथम तल, सेक्टर 63, नोएडा, उत्तर प्रदेश, भारत, 201-301 ऑनलाइन सर्वे करने वाली कंपनी है, जिस

‘‘बुलडोजर न्याय’’ : उत्तर प्रदेश से राजस्थान

बुलडोजर न्याय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चलाई जा रही ‘‘बुलडोजर न्याय’’ की नीति आज देश के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान आदि में भी देखने को म

यूनिफाइड पेंशन स्कीम : कर्मचारियों को भरमाने की कोशिश

नये-नये नामों से योजनायें पेश कर जनता को भरमाने और अपना उल्लू सीधा करने में माहिर नरेंद्र मोदी द्वारा अब यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) नाम से एक नई योजना लाकर ओल्ड पेंशन स्क

यौन हिंसा और उसके खिलाफ फूटा आक्रोश

यौन हिंसा के खिलाफ आक्रोश

सख्त कानून, कठोर सजा, पुलिस का खौफ जैसी चीजें यौन हिंसा के समाधान में इंच भर भी असर नहीं डालती हैं क्योंकि इन सभी तौर-तरीकों में उस जमीन को कभी निशाना नहीं बनाया जाता है जहां से ऐसे क्रूर अपराधी बार-बार जन्म लेते हैं। यह जमीन अपराधियों को बार-बार जन्म देती है परन्तु समाधान के तौर पर अपराधी का खात्मा जमीन का खात्मा नहीं साबित होता है। इस वक्त पूरे देश में फूटे जनाक्रोश में भी इस बात को देखा जा सकता है। 

पहाड़ों से पलायन

यह वाकया पहाड़ों से यानी उत्तराखण्ड के पहाड़ों से जुड़ा है। एक दौर था कि जब उत्तराखण्ड को अलग राज्य बनाने के लिए आम जनता बड़ी मशक्कत और जद्दोजहद में लगी थी। वह उत्तराखण्ड राज

हरियाणा : न्यूनतम वेतन बढ़ाने हेतु सभा-प्रदर्शन

मजदूरों का 8 घंटे का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये लागू करो

फरीदाबाद/ फरीदाबाद (हरियाणा) में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 29 अगस्त को मजदूरों का 8 घंटे का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए करने व हरियाणा सरकार द्वारा मजदूरो

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?