फिलिस्तीन में इजरायली हमले के खिलाफ दिल्ली में कन्वेंशन
दिल्ली/ जन अभियान-दिल्ली द्वारा 25 अगस्त को ‘इजरायली हमला और फिलीस्तीन मुक्ति संघर्ष की चुनौतियां’ विषय पर गढ़वाल भवन में एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया।
दिल्ली/ जन अभियान-दिल्ली द्वारा 25 अगस्त को ‘इजरायली हमला और फिलीस्तीन मुक्ति संघर्ष की चुनौतियां’ विषय पर गढ़वाल भवन में एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया।
9 सितम्बर को विधायक कार्यालय पर विरोध-प्रदर्शन की घोषणा
स्थाई मजदूरों को ठेके पर नियोजित करने के खिलाफ आंदोलनरत हैं मजदूर
शहीद उधमसिंह सिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी नायक हैं, जिन्होंने भारत से लंदन जाकर जलियांवाला बाग कांड के मुख्य आरोपी जनरल ओ’ ड्वायर को गोली से उड़ा दिया था। वे श
दिल्ली/ 3 अगस्त को न्यूनतम वेतन एवं अन्य श्रम अधिकारों को लागू करवाने के लिए बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूर पंचायत का आयोजन किया गया। मजदूर एकता समिति
प्रशासन ने आकर दिया समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन; विधायक की ओर से समाधान के लिए मंगलवार तक का लिया गया समय
बदायूं/ दिनांक 12 अगस्त 2024 को आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन जनपद बदायूं के नेतृत्व में स्थान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बदायूं पर धरना प्
बांग्लादेश में लंबे समय से आरक्षण विरोधी आंदोलन और प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद अराजकता का माहौल बना हुआ है। क्योंकि ये आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रहा ब
हम किराए पर मकान लेते हैं। हम किराए पर गाड़ी लेते हैं। हम किराए पर बीवी लेते हैं....चौंक गए???
जुलाई के महीने के साथ ही उत्तर भारत की सड़कों पर एक विभीषिका शुरू होती है। इस विभीषिका को कांवड़ यात्रा कहा जाता है। भगवा कपड़ों में उत्तर भारत के राजमार्गों पर चल रहे ये का
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?