विविध

विज्ञान को निगलने पर उतारू आरएसएस का ग्रहण

भारतीय विज्ञान कांग्रेस प्रति वर्ष जनवरी पहले सप्ताह में आयोजित की जाती है। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग आर्थिक सहयोग (फण्ड) कर आयोजन में मदद करता रहा था। इस साल 3 स

अभिनेता और मजदूर

वो अपने जन्म से पहले ही चर्चा में था, जिस वक्त उसके जन्म की घोषणा की चर्चा तमाम मीडिया में सुर्खियां बटोर रही थी, ठीक वही वक्त था जब माटी अपने गर्भ से लोहा उगलने की तैयार

बिल्किस बानो, हिंदू फासीवादी और सुप्रीम कोर्ट

गुजरात सरकार ने केंद्र सरकार की सहमति से बिलकिस बानो गैंगरेप के 11 दोषियों को ठीक 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ बिलकिस की ओर से याचिका लगी। जिस पर स

सत्ता के खेल में प्यादे को जिंदा रखना

मेवात के नूंह दंगों में आरोपी, कुख्यात और बदनाम व्यक्ति बिट्टू बजरंगी जो संजय एनक्लेव फरीदाबाद का रहने वाला है, आजकल फिर सुर्खियों में है। मेवात के नूंह दंगों में मोनू मा

किसी भी कीमत पर चुनावी जीत हासिल करने की साजिश

भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत पर लोकसभा के चुनाव जीतना चाहती है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं को जेल में डालना, नेताओं की खरीद-फरोख्त, विपक्षी पार्टियों के बैंक खातों को

सावित्री बाई फुले-फातिमा शेख की याद में विभिन्न कार्यक्रम

सावित्री बाई फुले एक महान समाज सुधारक और योद्धा थीं जिन्होंने 19वीं सदी में ब्राह्मणवादी वर्जनाओं को साहसपूर्वक तोड़ते हुये सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक अन्धविश्वास के विर

राजा बिस्कुट के मजदूरों का सम्मानजनक समझौता

हरिद्वार/ हरिद्वार सिडकुल स्थित राजा बिस्कुट के मजदूरों का लम्बा संघर्ष सम्मानजनक समझौते के साथ समाप्त हो गया है। प्रबंधन मजदूरों की ग्रेच्युटी, बोनस सहि

आलेख

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।