कोलंबिया भूकम्प की चपेट में
10 जून को कोलंबिया में आये 7.4 तीव्रता के भूकम्प ने समूचे कोलंबिया को एक झटके में गमगीन कर दिया। भूकम्प के दौरान दर्जनों इमारतें और उनमें रहने वाले लोग रेत के महल की तरह
10 जून को कोलंबिया में आये 7.4 तीव्रता के भूकम्प ने समूचे कोलंबिया को एक झटके में गमगीन कर दिया। भूकम्प के दौरान दर्जनों इमारतें और उनमें रहने वाले लोग रेत के महल की तरह
जुलाई माह के अंत में सिउटा नाम का एक छोटा सा स्थान पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। सिउटा मोरक्को से सटा हुआ एक परिक्षेत्र है जो कि स्पेन के कब्जे में है। सिउटा मोरक्को
जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है।
1971 में संयुक्त राज्य अमेरिका दिवालिया होने की कगार पर था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने वैश्विक वित्त व्यवस्था को एक वादे के आधार पर खड़ा किया था। प्रत्येक डॉलर सो
पहले से ही 4 वर्ष से रूस-यूक्रेन युद्ध की मार झेल रही विश्व अर्थव्यवस्था अब ईरान युद्ध के साथ नये खतरों का सामना कर रही है। ईरान युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव अ
विश्व की सभी प्रमुख राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 ने दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के समय वैश्विक स्तर पर अमीरों व गरीबों के बीच बढ़ती आर्थिक असमानता के अध्ययन के लि
अभी हाल ही में विश्व असमानता रिपोर्ट, 2026 प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व असमानता लैब और यूरोपीय संघ से सहायता प्राप्त एक अनुदान की
अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ 18 अक्टूबर को लाखों युवा, श्रमिक, विद्यार्थी व आम जन सड़कों पर उतरे। इसे ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन की दूसरी लहर कहा गया। 2700 से ज्यादा प
अंगोला में 1 जुलाई से ईंधन सब्सिडी में कटौती कर दी गयी है। इस कटौती के खिलाफ मिनीबस टैक्सी एसोसिएशन ने 28 जुलाई को तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया। इस ईंधन सब्सिडी में कट
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?