दोस्त दोस्त न रहा....

आख़िरकार वो दिन आ ही गया जब ट्रम्प दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद की दूसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं। यह उनके लिए बहुत खुशी का अवसर होगा। लेकिन इस खुशी के अवसर पर वे अपने पुराने 'दोस्त' को भूल गये। यह ट्रम्प ने अच्छा नहीं किया। जिस दोस्त ने उनको जिताने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये (हालांकि वो पिछली बार जीत नहीं पाये थे इसमें उस दोस्त की तो कोई गलती थी) उस दोस्त को अपने समारोह में न बुला कर उस दोस्त की बेइज्जती कर दी।

जब भी कोई किसी के यहाँ समारोह में जाता है तो उसके लिए नये-नये कपड़े सिलवा लेता है। अगर निमंत्रण आने में देर हो जाए तो वो सोचता है शायद देर से ही सही निमंत्रण तो आएगा ही। आख़िरकार पुराने दोस्त जो ठहरे। इसी आस में दोस्त ने नये कपड़े भी सिलवा लिए हों। लेकिन अब क्या होगा उन नये कपड़ों का। 

इस दोस्त ने ट्रम्प को पिछली बार अमेरिका में जाकर तो ट्रम्प के लिए प्रचार किया ही साथ ही अपने घर में बुलाकर भी ट्रम्प का भव्य स्वागत किया। भले ही इसके लिए उसे अपने घर की बदसूरती को छिपाने के प्रयास में काफी कुछ सुनना पड़ा था। लेकिन उस दोस्त ने कोई परवाह नहीं की। सबसे उसने ट्रम्प को नमस्ते कहवाया। लेकिन इन सबसे भारत में तो जीत मिल जाती परन्तु अमेरिका में ट्रम्प हार गये। 

इस दोस्त को ट्रम्प का पक्का यार बताने के लिए मीडिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। ट्रम्प को गले लगाते हुए, बांहों में बांहों को डालकर चलते हुए आदि आदि तस्वीरों के जरिये उसने यह बताने की कोशिश लगातार की कि देखो दोस्त की कितनी कदर है, दुनिया का सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति का कितना पक्का यार है दोस्त। ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर दोस्त को बुलाये जाने की चर्चा को भी मीडिया ने फोकस में लाने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही यह यकीन हो गया कि ट्रम्प अपने दोस्त को समारोह में नहीं बुला रहे हैं तो उसने समाचारों का टॉपिक ही बदल दिया। 

दरअसल ट्रम्प ने दोस्त के बदले उसके देश को निमंत्रण भेजा। आख़िरकार देश को ही तो उसे चूसना है।

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