गहराता संकट बढ़ती बेरोजगारी

    अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2013 में बेरोजगारी और बढ़ेगी। और 2017 तक यह बढ़त जारी रहेगी। अपने वार्षिक वैश्विक बेरोजगारी रुझान को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन रिपोर्ट करता है कि 2013 में 51 लाख से 20.2 करोड़ बेरोजगार लोग बढ़ेंगे जो 2009 के सबसे उच्च स्तर से 19.8 करोड़ से भी ऊंचा है।<br />
    2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के शुरू होने के साथ ही विकसित एवं गरीब देशों में बेरोजगारी बढ़ी है। जो लोग रोजगार पर हैं, भी उनकी भी गरीबी बढ़ी। संकट से उबरने की तमाम झूठी घोषणाओं के बावजूद हालात निरंतर बिगड़ते ही चले गये। पिछले पांच सालों में विश्व आर्थिक विकास धीमा हुआ है। काम करने वाले गरीब लोगों की संख्या बढ़ी है। बड़ी संख्या में हतोत्साहित मजदूर श्रम बाजार से साथ-साथ बाहर हो रहे हैं ।<br />
    अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ- इण्टरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन) की रिपोर्ट के रुझान बराक ओबामा के झूठे दावों का भी खुलासा कर रहे हैं। जिसमें उसने कहा कि ‘अमेरिका और कहीं भी आर्थिक हालात सुधर रहे हैं।’ विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का यह संकट भी रोजगार खत्म कर रहा है और विशेष तौर पर विश्व के युवाओं की एक बड़ी आबादी को गरीबी में धकेल रहा है। यह संकट दुनिया की सरकारों में असंतोष पैदा कर रहा है जो इस प्रक्रिया को बढ़ा रहे हैं।<br />
    अगर युवाओं की बात करें तो आईएलओ के अनुसार उत्तरी अफ्रीका में 2012 में पुरुष युवा बेरोजगारी दर बालिग पुरुषों की बेरोजगारी दर से तीन गुना थी। युवा महिला बेरोजगारी दर बालिग पुरुषों से 6 गुना ज्यादा थी। परिवारों में रहने वाले 20 प्रतिशत मजदूर रोजाना 2 अमेरिकी डालर पर गुजारा करते हैं। पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा के बिना एक बड़ी आबादी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है।<br />
    आईएलओ के अनुसार विकसित अर्थव्यवस्था एवं यूरोपीय यूनियन में 2012 में बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत थी जिसके इस वर्ष बढ़ने और फिर 2014 में घटने के आसार हैं। लगभग 34 प्रतिशत काम तलाशने वाले 12 महीनों या उससे अधिक समय से बेरोजगार हैं। युवा बेरोजगारी यूरोप में सबसे ज्यादा है। कुछ देशों में तो 50 प्रतिशत के चरम स्तर पर है। ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है जो काम की तलाश करना छोड़ चुके हैं।<br />
    भारत में भी विकास दर तेजी से धीमी हुयी है। 4.9 प्रतिशत जो कि एक दशक में सबसे धीमा है। श्रमशक्ति का हिस्सा नाटकीय तौर पर गिरा है। मुख्य तौर पर विकसित देशों और यूरोपीय यूनियन क्षेत्र में औपचारिक बेरोजगारी संयुक्त राष्ट्र में 7.8 प्रतिशत और यूरो जोन में 11.8 प्रतिशत है। यहां तक कि ये ऊंचे आंकड़े गलतफहमी पैदा करते हैं। इसलिए कि इसमें दसियों लाख वे मजदूर जो काम की तलाश छोड़ चुके हैं, लंबे समय की बेरोजगारी से हतोत्साहित हो गये हैं, शामिल नहीं हैं।<br />
    युवाओं को प्रभावित करने वाला रोजगार संकट भयानक है। इस समय विश्व भर में 7.38 करोड़  युवा बेरोजगार हैं। आईएलओ का अनुमान है कि आर्थिक गतिविधियों के धीमे होने के कारण 2014 में 5 लाख युवा और बेरोजगार बनेगे। विश्व युवा बेरोजगारी 2012 में 12.6 प्रतिशत थी और 2017 तक इसके 12.9 प्रतिशत होने की संभावना है। युवा बेरोजगारी दर विशेष तौर पर यूरोप में भीषण है, जहां यह ग्रीस एवं स्पेन में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा हो चुकी है।<br />
    विश्व वित्तीय संकट के पैदा होने पर युवाओं में लंबे समय की बेरोजगारी नाटकीय तौर पर बढ़ चुकी है। विकसित देशों में कुल युवाओं के 35 प्रतिशत बेरोजगार 6 माह या लंबे समय से बेरोजगार हैं, जो 2007 में 28.7 प्रतिशत से ज्यादा है।<br />
    यूरोप के देशों में कुल युवाओं के 12.7 प्रतिशत न तो किसी रोजगार में हैं और न ही शिक्षा या प्रशिक्षण में, जो संकट के पहले से 2 प्रतिशत ज्यादा है। आईएलओ रिपोर्ट कहती है कि संकट ने श्रम बाजार में युवाओं के लिए संभावनाएं नाटकीय तौर पर कम कर दी हैं।<br />
    आईएलओ के अनुसार वर्तमान में 39.7 करोड़ मजदूर भीषण गरीबी में जी रहे हैं और इसमें 47.2 करोड़ वे लोग जुड़ते हैं जो अपनी मौलिक जरूरतों को रोजमर्रा के आधार पर पूरा नहीं कर पाते। दुनिया की जनसंख्या के 12 प्रतिशत लोग परिवारों में रहते हैं जहां कम से कम एक व्यक्ति काम करता है लेकिन वे आवास, भोजन और अन्य जरूरतों के लिए निरंतर संघर्ष करते रहते हैं।<br />
    2013-14 में आर्थिक विकास होने के पूर्वानुमान के बावजूद यह आशंका की जा रही है कि दुनिया में बेरोजगार लोगों की संख्या उच्च स्तर पर जायेगी और 2014 में 20.5 करोड़ हो जायेगी। ये आंकड़े निश्चित तौर पर बेरोजगारी के वास्तविक स्तर से कम आंके गये हैं। ये सरकारी आंकड़े हैं जो उन लोगों को नहीं गिनते हैं जो बेरोजगारी भत्ता पाते हैं या जिन्होंने नौकरी ढूंढना छोड़ दिया है।<br />
    2012 में 40 लाख वैश्विक बेरोजगारी के बढ़ने में एक-चौथाई विकसित अर्थव्यवस्था तथा तीन-चौथाई अन्य क्षेत्रों, पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया और उप सहारा अफ्रीका सहित विशेषतौर पर ज्यादा बेरोजगारी की मार पड़ी है। रिपोर्ट 2012 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं में धीमी विकास दर और यूरोप में मंदी की स्थिति चिह्निनत करती है।<br />
    अन्य तात्कालिक रिपोर्ट दिखाती है कि अमेरिका में 4.75 करोड़ लोग कम आय वाले मजदूर परिवारों में रहते हैं।<br />
    दुनिया के बहुत से क्षेत्रों में बेरोजगारी के खिलाफ कोई ठोस काम नहीं किया गया। उपलब्ध रोजगारों में बुरे हालातों में काम होता है। अधिकतर मजदूरों को असुरक्षित कामों की ओर धकेला जा रहा है, जो कि अनौपचारिक क्षेत्र में हैं। दुनिया का शासक वर्ग आर्थिक संकट को रोकने या बचने के लिए मजदूर-मेहनतकश वर्ग पर और भी तीखे हमले कर रहा है और उनका जीवन स्तर गिरा रहा है।<br />
नोटः यह लेख WSWS के एक लेख ILO report: Global unemployment to hit record high in 2013 का हिंदी अनुवाद का अंश है जिसमें ILO की वेवसाइट से भी कुछ आंकड़े लिए गये हैं।<br />
 

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