गैर कानूनी ले आफ के खिलाफ मजदूरों का कम्पनी गेट पर धरना

Published
Thu, 07/16/2026 - 10:51
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रुद्रपुर/ भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड, प्लाट नं-18, सेक्टर-2, आई.आई.ई., सिडकुल पंतनगर के कर्मकार विगत 12-14 वर्षों से स्थाई रूप से कार्यरत हैं। प्रबंधन द्वारा अचानक 1  जुलाई 2026 से 14 अगस्त, 2026 तक (45 दिन) का ले आफ का फरमान ठीक एक दिन पूर्व 30 जून की सांय करीब 4ः30 बजे जारी कर दिया गया।
    
पूर्व में भी प्रबंधन द्वारा 27 दिसंबर 2018 को अचानक अविधिक रूप से 303 श्रमिकों की छंटनी कर दी गई थी, 47 श्रमिकों को अवैध ले-आफ देकर लंबे समय तक बैठा कर रखा गया था तथा एक श्रमिक को निलंबित कर दिया गया था। यह विवाद लंबे समय तक जारी रहा। छंटनी के मुद्दे पर माननीय औद्योगिक न्यायाधिकरण हल्द्वानी और माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल से श्रमिकों की जीत हुई थी, जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली में प्रबंधन ने चुनौती दी थी। अंततः 13 जुलाई 2023 को माननीय उच्चतम न्यायालय में एक समझौता सम्पन्न हुआ और प्लांट पुनः शुरू हुआ था। इसी के साथ ले-आफ श्रमिकों का भी एक समझौता माननीय श्रम न्यायालय काशीपुर में संपन्न और दाखिल हुआ था।
    
बताते चलें कि इस प्लांट में मोबाइल, एल.ई.डी., टीवी, पैनल, चार्जर, पी.सी.बी., इनवर्टर, टैबलेट, डोंगल इत्यादि का उत्पादन होता रहा है। कार्यरत श्रमिक टेक्निकल, डिप्लोमा, बीटेक इंजीनियर इत्यादि हैं और बतौर टेक्नीशियन कार्यरत हैं। समस्त श्रमिकों को पूर्व में कुशल श्रेणी का वेतन मिलता रहा था लेकिन अक्टूबर 2023 से प्लांट पुनः कार्यशील होने के बाद से किसी श्रमिक को कुशल श्रेणी के न्यूनतम वेतन का भी भुगतान प्राप्त नहीं हो रहा है। प्लांट पुनः शुरू होने के बाद प्रबंधन ने बड़े ही सचेतन ढंग से धीरे-धीरे कंपनी में काम लाना कम किया, कुछ दिन रिवर्क का कार्य चला, फिर योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधन ने उत्पादन को धीरे-धीरे बंद किया, यहां तक कि पार्टियों की ओर से आए हुए राॅ मैटेरियल को भी पंतनगर से भिवाड़ी (राजस्थान) प्लांट में शिफ्ट कर दिया और अब उसने मनगढ़ंत कहानी लिखकर पुनः ले-आफ घोषित कर दिया है, जो कि गैरकानूनी है। प्रबंधन का निराधार और गलत कथन है कि अभी उत्पादन नहीं है, जबकि इसी दौरान कम्पनी ने नोएडा में बड़ा प्लांट खोला, भिवाड़ी और हैदराबाद में भी उत्पादन इतना बढ़ गया है कि वहां भारी संख्या में भर्तियां चल रही हैं और लगातार ओवरटाइम में भी कार्य हो रहा है। 
    
पंतनगर प्लांट खुलने के समय प्लांट में उत्पादन कार्य काफी मात्रा में था और ठेका श्रमिक भी कार्य कर रहे थे तथा ओवरटाइम में भी कार्य हो रहा था, लेकिन प्रबंधन ने जानबूझकर पंतनगर प्लांट में उत्पादन कार्य को धीरे-धीरे बन्द किया, ठेका श्रमिकों को बाहर किया और यहां उत्पादन के लिए उस समय मौजूद राॅ मैटेरियल की बीस हजार की किट भिवाड़ी प्लांट भेज दिया गया। पंतनगर प्लांट से धीरे-धीरे सभी जिम्मेदार अधिकारियों को हटा लिया गया है, वर्तमान में कोई फैक्टरी मैनेजर भी नहीं है। प्रबंधन कार्यरत श्रमिकों पर लगातार नौकरी छोड़ने/त्यागपत्र देने का दबाव बनाता रहा। कम्पनी में पूर्व में मिलने वाली सभी सुविधाएं बन्द हो चुकी हैं, कैंटीन की कोई सुविधा नहीं है और पानी, शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है तथा पावर कट की स्थिति में जैनरेटर की सुविधा, गर्मी में ए.सी, कूलर और पंखों तक की व्यवस्था ठप कर दी गई है। इस दबाव में कई श्रमिकों को धीरे-धीरे नौकरी छोड़ने पर विवश होना पड़ा।
    
प्रबंधन पंतनगर प्लांट के घाटे में होने का बहाना बनाकर इसे बंद करने की साजिश रच रहा है। क्योंकि उत्पादन कार्य पंतनगर प्लांट में लाने की जगह उसने प्लांट के एक हिस्से/भूभाग को गैरकानूनी रूप से मंजुश्री कंपनी के गोदाम के लिए दे दिया है। उसके किराए से श्रमिकों का वेतन दिया जाता है। इसके अलावा विगत 5 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में श्रमिकों के मद के कंपनी के 5 करोड़ रुपए जमा हैं, जिसके ब्याज का भी लाभ प्रबंधन को मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सम्पन्न समझौते को लगभग तीन साल हो चुके हैं लेकिन प्रबंधन द्वारा इस समझौते में श्रमिकों को दिए जाने वाले हित-लाभ से बचने या वंचित करने की नीयत से समझौते का अभी तक सशर्त पूर्णतः परिपालन नहीं किया गया है।
    
वर्तमान समय में सभी कार्यरत श्रमिक वर्ष 2018 के वेतन पर कार्य कर रहे हैं, प्रबंधन ने छः माह में वेतन वृद्धि का आश्वासन दिया था लेकिन उसका पालन भी आज तक नहीं किया, पूर्ववर्ती सुविधायें जैसे कैंटीन, परिवहन आदि भी बहाल नहीं हुईं। 
    
श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान भी नहीं मिल रहा है। जब यूनियन ने कुशल श्रेणी का सरकार द्वारा जारी न्यूनतम वेतन की मांग की, तभी प्रबंधन ने इससे बचने के लिए अचानक आनन-फानन में गैरकानूनी तरीके से ले-आफ घोषित कर दिया। 
    
यह भी बताते चलें कि पंतनगर प्लांट में पिछले कैलेंडर वर्ष में 130 से 140 स्थाई श्रमिक कार्यरत थे। इसके अलावा स्टाफ, सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मी, मेंटिनेंस कर्मी आदि मिलाकर लगभग डेढ़ सौ कार्यबल मौजूद रहा है। प्रबंधन ने साजिशन तरीके से महज 95 श्रमिकों की सूची संलग्न की है। इसमें कुछ स्थाई श्रमिकों, मेंटेनेंस कर्मी, 4 सुरक्षा कर्मियों, 2 सफाईकर्मियों आदि की संख्या इसमें शामिल नहीं है। 
    
खबर लिखे जाने तक मजदूर कार्यबहाली व बढ़ी हुई मजदूरी दिलवाने की मांग को लेकर कम्पनी के सामने धरने पर बैठे हैं साथ ही उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारियों से अपने साथ न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही श्रमिक संयुक्त मोर्चे द्वारा भी भगवती के मजदूरों के लिए योजना बनाकर कार्यक्रम बनाया गया है।  -रुद्रपुर संवाददाता
 

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