गाजा में भुखमरी : मानवता के खिलाफ क्रूर अमानवीय हमला

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इजरायली जियनवादी शासकों का गाजा में नरसंहार जारी है। अभी इसका प्रमुख रूप गाजा में मानवीय सहायता पर रोक लगा भुखमरी के हालात पैदा करना बना हुआ है। नन्हे मासूम बच्चे भोजन के अभाव में कुपोषण का शिकार बन मारे जा रहे हैं। दुनिया भर में इजरायली शासकों के इन कुकृत्यों के खिलाफ तीखा असंतोष देखा जा रहा है। जिसके दबाव में 27 जुलाई को घने आबादी क्षेत्र के लिए मानवीय सहायता भेजने पर इजरायली शासक मजबूर हुए।
    
जनवरी में इजराइल-हमास युद्ध विराम के बाद मार्च से ही इजरायली शासकों ने इसका उल्लंघन करना शुरू कर दिया था। मई के अंत तक यहां नाकाबंदी लगा दी गई। फिर अंतर्राष्ट्रीय दबाव में अमेरिकी-इजरायली शासक समर्थित गाजा मानवतावादी फाउंडेशन (ळभ्थ्) के जरिए राहत सामग्री वितरण करने की बात की गई। इस फाउंडेशन से सहायता लेने के दौरान निहत्थे गाजावासी इजरायली सेना की गोलियों का निशाना बन रहे हैं। खराब वितरण व्यवस्था के चलते भी कई लोग मारे गए। यह सहायता के नाम पर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की इजरायली कोशिश भर है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सहायता प्राप्त करने की कोशिश में लगभग 1000 लोग मारे जा चुके हैं। सहायता समूहों ने ‘बड़े पैमाने पर भुखमरी’ फैलने की चेतावनी दी है।
    
चिकित्साकर्मियों ने कुपोषित मरीजों से अस्पतालों के भरे होने की दुखद दास्तान बताई है। भूख से मर रहे मरीजों का इलाज करने के लिए डाक्टरों के पास अस्पतालों में जगह नहीं बची है। 25 जुलाई को कुपोषित 5 माह की बच्ची ने अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया। दक्षिणी गाजा के नासेर अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि अस्पताल के गलियारों से लेकर बाथरूम के दरवाजे तक मरीज भर्ती हैं। यदि अगले कुछ घंटों में भी हालातों में सुधार नहीं हुआ तो खुले आसमान के नीचे मरीजों का इलाज करना होगा।
    
इजरायली शासक और सेना गाजा में भुखमरी की स्थिति को मानने से इनकार कर रहे हैं। 26 जुलाई की रात मानवाधिकार संगठन फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (थ्थ्ब्) के कार्यकर्ताओं के सहायता ले जा रहे जहाज को समुद्री सीमा पर 70 मील पहले ही रोक लिया गया। ऐसा ही मामला जून में सामने आया था जब ‘मेडेलीन’ जहाज पर सहायता ले जा रहे यूरोपीय सांसद और कार्यकर्ताओं के दल को रोका गया था। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने मानवीय सहायता के अपनी सरकार के वायदे पर नाराजगी जताई और इसे ‘हमास के आगे आत्मसमर्पण’ कह डाला। ऐसे में मानवीय सहायता के लिए गलियारा देने के इजरायली शासकों के वायदे पर मुश्किल से ही भरोसा किया जा सकता है।
    
दरअसल इजरायली शासक व अमेरिकी साम्राज्यवादी गाजा में भुखमरी पैदा कर वहां के नागरिकों को देश छोड़ने को मजबूर करना चाहते हैं। वे सोचते हैं कि भूखे बच्चों की खातिर फिलिस्तीनी लोग देश छोड़ देंगे। पर फिलिस्तीनी लड़ाकू कौम का अब तक का व्यवहार बताता है कि उन्हें भूखे मरना मंजूर है पर अपनी धरती इजरायल को सौंपना मंजूर नहीं है। फिलिस्तीनी अवाम इजरायल से मुक्ति संघर्ष में त्याग-कुर्बानी की नयी गाथा रच रही है।
    
इजरायली शासकों का विरोध खुद इजरायल में बढ़ रहा है। इन प्रदर्शनों की प्रमुख मांगें हमास द्वारा बंदी बनाए गए इजरायली नागरिकों को वापस लाने, गाजा में युद्ध विराम करने की है। अमेरिका-इजरायल द्वारा युद्ध विराम वार्ताकारों को वापस बुला लेने के बाद इजरायल भर में विरोध प्रदर्शन और तेज हुए हैं।
    
इजरायली-अमेरिकी शासक गाजा में भुखमरी के हालात पैदा करने के जिम्मेदार हैं। मां की गोद में मर रहे मासूम से लेकर असहाय डाक्टरों की देखरेख में मारे जा रहे कुपोषित हर इंसान के हत्यारे यही हैं। दुनिया भर में इनका जितना विरोध हो रहा है, उससे ज्यादा की जरूरत है। यह हर तरह की लानत-मलामत के हकदार हैं। मानवता के सबसे क्रूर दुश्मन हैं।
 

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