मारुति : बर्खास्त मजदूरों की कार्यबहाली का संघर्ष

गुड़गांव/ 15 फरवरी 2023 को मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जुलूस व धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम किया गया जिसमें मुख्य मांग मारुति सुजुकी के बर्खास्त मजदूरों को काम पर वापस लेने की थी।

गौरतलब है कि 18 जुलाई 2012 को मारुति सुजुकी मानेसर प्लांट में हुए अग्निकांड के बाद 546 स्थायी और ढेरों ठेका मजदूरों को बिना किसी जांच-पड़ताल के बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद चले मुकदमे में 13 मजदूरों को उम्र कैद की सजा हुई। मारुति मजदूरों की उस समय से कानूनी और जमीनी लड़ाई लगातार जारी है। पहले अपने 13 उम्रकैद पाए मजदूरों को जमानत के लिए संघर्ष रहा जिन्हें पिछले साल जमानत मिल गई। उसके बाद इन्होंने बर्खास्त मजदूरों की बहाली के लिए संघर्ष को तेज कर दिया। इसको लेकर 2 दिन की भूख हड़ताल पिछले साल के अंत में की गयी और उसके बाद 15 फरवरी को धरना-प्रदर्शन व जुलूस निकाला।

15 फरवरी को राजीव चौक में इकट्ठा होकर लघु सचिवालय गुड़गांव तक जलूस निकाला गया और उसके बाद लघु सचिवालय में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस धरना-प्रदर्शन में मारुति सुजुकी के बर्खास्त मजदूरों ने अपनी बात रखी और कहा कि जब तक हमें प्लांट में वापस नहीं लिया जाता तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

धरना-प्रदर्शन में अन्य मजदूर यूनियनों और संगठनों के वक्ताओं ने भी बात रखी। इसमें मुख्य बात यह रही कि मजदूरों को कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जमीनी लड़ाई को भी मजबूत करना होगा और आज समय की मांग बन गई है कि मजदूर पूंजीपतियों द्वारा मजदूरों के बीच में किए गए भेद को मिटा कर स्थाई, ठेका, अप्रेन्टिस आदि मजदूरों की व्यापक एकता को मजबूत करें और अपने संघर्षों को तेज करें। तभी मजदूर पूंजीपतियों के हमलों का मुकाबला कर पाएंगे और अपने अधिकारों को पाने के साथ-साथ एक बेहतर समाज भी कायम कर पाएंगे।

धरना-प्रदर्शन लगभग 5ः00 बजे तक चला, उसके बाद उपायुक्त महोदय को संबोधित ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में मुख्य मांग यह थी कि मारुति सुजुकी के बर्खास्त मजदूरों को काम पर लिया जाए और पूरे औद्योगिक क्षेत्र में चल रही गैर कानूनी ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए।

धरना-प्रदर्शन में बर्खास्त मजदूरों के अलावा औद्योगिक क्षेत्र की मारुति सुजुकी, बेलसोनिका, हीरो और अन्य यूनियनों के पदाधिकारियों ने भागीदारी की। इसके अलावा मारुति सुजुकी मानेसर प्लांट, बेलसोनिका यूनियन और हिताची के ठेका मजदूरों ने भी शिफ्ट के बाद धरना स्थल पर पहुंचकर भागीदारी की। धरना प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, मजदूर सहयोग केंद्र, इफ्टू (सर्वहारा), श्रमिक संग्राम कमेटी, ग्रामीण मजदूर यूनियन और अन्य मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। -गुड़गांव संवाददाता

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि