केन्द्रीय बजट में मुल्ला नसीरूद्दीन
मुल्ला नसीरूद्दीन का एक किस्सा है। एक दिन मुल्ला नसीरूद्दीन अपने गधे को लेकर एक सराय में पहुंचा। वहां उसने लोगों के बीच गधे के सामने कुरान रखी और उसके पन्ने पलटने लगा। जब
मुल्ला नसीरूद्दीन का एक किस्सा है। एक दिन मुल्ला नसीरूद्दीन अपने गधे को लेकर एक सराय में पहुंचा। वहां उसने लोगों के बीच गधे के सामने कुरान रखी और उसके पन्ने पलटने लगा। जब
मोदी सरकार आये दिन भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी विकास दर के कसीदे गढ़ती है। कहा जाता है कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। और बस चंद साल ही बचे हैं जब
पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने एक नया विधेयक ‘शांति’ संसद से पारित कर राष्ट्रपति से हस्ताक्षरित करवा कानून बना दिया। इस कानून का शीर्षक ‘भारत के परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्ज
भारत के राष्ट्रीय खातों पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की निराशाजनक रिपोर्ट ने देश के वृहद आर्थिक आंकड़ों की संदिग्ध प्रकृति की ओर एक बार फिर ध्यान खींचा है। 26 नवं
इस वर्ष हमारे देश में जो-जो कुछ घटा (भारत-पाकिस्तान युद्ध, कथित आतंकवादी घटनाएं, पंजाब व अन्य राज्यों में बाढ़ से तबाही, गिरता रुपया, बढ़ती जाती बेरोजगारी व महंगाई आदि) उसक
पिछले कुछ सालों से अक्सर ही देखने में आ रहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते छात्रों की हताशा और निराशा उन्हें सड़कों पर उमड़ने को बाध्य कर दे रही है। इस हताशा और न
मोदी सरकार इस वक्त भारत की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का गुणगान करती रहती है और दावा करती है कि वह अगले दो-तीन वर्षों में दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगी। क्या भ
कभी मोदी ने रुपये के मूल्य को तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इकबाल से जोड़ दिया था। और कहा था कि दोनों में होड़ मची है कि कौन कितने नीचे गिरता है। आजकल जब रुपया लगातार न
अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एल आई सी) ने अडाणी समूह में 3.9 अरब डालर का निवेश किया है।
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।