राजनीति

आरक्षण हटाओ आंदोलन: सोशल मीडिया की नई लहर या फूट डालो राज करो की पुरानी नीति

/aarakshan-hatao-aandolan-social-media-ki-nai-lahar-ya-phoot-dalo-raaj-karo-ki

छात्रों के आंदोलन की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से उभर आया ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’। कुछ ही दिनों में यह सोशल मीडिया पेज इंस्टाग्राम, रेड

काकरोच सरदार और समाजवादी जनतांत्रिक मोर्चा

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

पूंजीवादी-सुधारवादी और क्रांतिकारी

/punjivaadi-sudhaarvaadi-aur-krantikari

जंतर मंतर पर छात्रों-युवाओं का संघर्ष सफलता के साथ समाप्त हो गया है। संघर्ष की 3 मांगों पर सहमति के बावजूद तीसरी मांग पर अभी भी रस्साकसी जारी है। काकरोच जनता पार्टी की 3

जनता जनार्दन की जय हो!

/janata-janardan-ki-jay-ho

अभी बहुत दिन नहीं हुए जब वाम-उदारवादी जनता को मरा हुआ घोषित कर रहे थे- कुछ खुलेआम तो कुछ अनकहे ढंग से। ये ही अब हालिया छात्र-युवा आंदोलन की आंशिक सफलता के बाद जनता की जयक

‘साहेब’ की विदेश यात्रा

/saheb-ki-videsh-yatraa

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों इण्डोनेशिया, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड की यात्रा की। इन तीनों देशों की यात्रा में सैन्य सहयोग व महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रंखला विकस

काकरोच पार्टी का आमरण अनशन

/cocroach-party-ka-aamaran-anashan

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से शुरू हुआ काकरोच जनता पार्टी का धरना प्रदर्शन जारी है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ शुरू हुआ यह प्रदर्शन 28 ज

जेन जी आक्रोश पर सवार हो आगे बढ़ती काकरोच जनता पार्टी

/zen-z-akhrosh-par-savaar-ho-aage-badhati-kakaroch-janata-party

भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को काकरोच कहे जाने की प्रतिक्रिया में काकरोच जनता पार्टी पैदा हुई थी। अमेरिकावासी अभिजीत दिपके द्वारा सोशल मीडिया पर व्यंग्

मोदी सरकार के बारह साल: हाल बेहाल

/modi-government-ke-twelve-years-haal-behaal

संघ परिवार और मुख्य धारा का मीडिया प्रधान सेवक के 12 सालों के कार्यकाल पर मंत्रमुग्ध है। ‘महामानव’ का इस पर आत्ममुग्ध होना स्वाभाविक है। इस आत्ममुग्धता को देखकर शेष हिंदू

तृणमूल कांग्रेस की टूटन-फूटन

/tranmool-congress-ki-tootan-phootan

जब से ममता बनर्जी पं.बंगाल का चुनाव हारी हैं तब से उनकी पार्टी में जबरदस्त टूटन-फूटन का दौर चल रहा है। कोई नेता पार्टी छोड़कर भाग रहा है तो कोई नेता अलग गुट बनाकर पार्टी म

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?