शेखर टेक्नॉलाजी एलएलपी, शेखर इंटरनेशनल कंपनी की सामान्य तस्वीर

Published
Mon, 02/16/2026 - 06:00
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शेखर टेक्नॉलाजी, शेखर इंटरनेशनल कंपनी फरीदाबाद के एफआईटी सेक्टर-57, प्लाट नंबर- बी10 और बी9 में स्थित है। कंपनी वजन के आधार पर भरने वाली और स्वचालित पाउच पैकिंग मशीन, पैकेजिंग मशीन की निर्माता और निर्यातक है। कंपनी में मुख्य रूप से स्वचालित पाउच पैकिंग मशीनें बनाने का काम होता है। जैसे- चाय, नमकीन, मसाले, चिप्स, चीनी, ड्राई फ्रूट्स, चावल वजन के आधार पर भरने वाली स्वचालित पाउच पैकिंग मशीनें बनाई जाती हैं। ज्यादा मात्रा की पैकिंग मशीनें व 25 किलोग्राम तक की बैग पैकिंग मशीनें भी बनाई जाती हैं। कंपनी में लीनियर बेयरिंग टेक्नॉलाजी से काम होता है। यह उच्च सटीकता और रैखिक गतियों के लिए उपयोग की जाती है। यानी सीधी रेखा में चरण दर चरण चलने वाली प्रक्रिया है जो पूर्वानुमानित क्रम में चलती है बिना किसी महत्वपूर्ण विचलन के, जब इनपुट बदलने पर आउटपुट सीधे अनुपातिक रूप में बदलता है।
    
कंपनी के मालिक का नाम मयंक शेखर है। कंपनी का ब्रांड ‘मंकी’ (डनदाल) है। कंपनी में तैयार मशीन जिनकी कीमत एक डेढ़ लाख से लेकर कई लाखों तक है। भारत के हर बड़े शहरों में, नेपाल में और अफ्रीकी महाद्वीप के देशों में सप्लाई होती है।
    
कंपनी में 70 से 80 लोग काम करते हैं। अधिकतर मजदूर इंजीनियरिंग वर्क्स की श्रेणी का काम करते हैं जैसे- ड1ज्त्, लेथ, सीएनसी और ग्राइंडर मशीनें। कंपनी में वेल्डरों की, फिटरों की, इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग वालों की, मशीन में लगने वाले कम्प्यूटर प्रोग्रामिंगों की अलग-अलग टीमें मौजूद हैं। यहां सभी टीमें डिजाइन के हिसाब से ही काम करती हैं। हेल्पर मजदूरों का काम भी काफी पेंचीदा है।
    
कंपनी में एक भी मजदूर परमानेंट श्रेणी का नहीं है चाहे वह कितने भी सालों से, चाहे स्थाई प्रकृति का काम ही क्यों न कर रहा हो। स्टाफ के लोगों में कुछ परमानेंट हैं। कंपनी में दो ठेकेदारों के तहत मजदूर काम करते हैं। इंटरव्यू कंपनी का प्रबंधक वर्ग ही लेता है। पैसे के लेन-देन की बातें भी कंपनी के प्रबंधक लोगों से ही होती हैं। ठेकेदार जब भी किसी आपरेटर को, मजदूर को कंपनी में लाता है तो कंपनी के ऐसे कसीदे गढ़ता है, जैसे मजदूर को स्वर्ग में भेज रहा हो जैसे- कंपनी में छुट्टियों का भी पैसा मिलता है, बोनस भी मिलता है, हर साल पैसा भी बढ़ता है, साफ-सुथरा काम है मानो आपकी पक्की नौकरी है।
    
कंपनी में हकीकत क्या है? जब एक लेथ आपरेटर (मेजर) को कंपनी में काम करते-करते लगभग 5 साल पूरे होने को थे, उसको अचानक शाम को 4ः30 बजे कहा जाता है कि आपकी आज से सेवा समाप्त हुई। उसके बार-बार कहने पर भी, मिन्नतें करने पर भी, क्या हो गया आप क्यों मेरे साथ ऐसा कर रहे हो, अभी दो-ढाई महीने बाद मेरी लड़की की शादी है जब तक तो काम करने दो पर उसको काम से निकाल दिया जाता है। कुछ समय बाद पता चलता है कि भरी गर्मियों में जब मजदूरों को टंकी का गर्म पानी ही पीना पड़ रहा था तो कुछ मजदूर एक साथ मिलकर प्रबंधन से बात करने गए तब बात की शुरुआत इस मजदूर ने ही की थी बस यही इस मजदूर का अपराध था जिसकी सजा उसको नौकरी से निकाल कर दी गई। नहीं तो ड्यूटी के इतने समय के दौरान न तो किसी से कोई झगड़ा और न ही काम पर कोई शिकायत इस मजदूर ने कभी दी थी।
    
रही बात छुट्टी के पैसे और बोनस देने की, कंपनी में दिवाली के समय पर बोनस दिया जाता है और जनवरी की सैलरी के साथ जोड़कर छुट्टियों का पैसा दिया जाता है। वहीं दूसरी तरफ कंपनी मजदूरों को न तो कोई चाय देती है और न ही कोई टी ब्रेक देती है। अब दोनों के पैसे से तुलना करके देखते हैं। मान लेते हैं किसी आपरेटर की तनख्वाह 18,000 रुपये है और मूल वेतन 12,000 रु. है, अगर बोनस की गणना की जाए तो लगभग 12,000 रु. और अगर कंपनी 15 छुट्टियों का भी पैसा दे रही होगी तो 6,000 रु. बैठा। यानी 12,000$6,000=18,000 रु.। इसी प्रकार दो चाय और दो बार ब्रेक का पैसा जोड़ा जाए 11,700$6,240=17,940 (आधे घण्टे प्रतिदिन ब्रेक के हिसाब से वर्ष में 312 दिन में कुल ब्रेक 312ग्1/2 त्र 156 घण्टे त्र 156»8 त्र 19.5 दिन का पैसा त्र 19.5ग्600 रुपये दिहाडी त्र 11,700 रु. व चाय का प्रतिदिन 20 रु. के हिसाब से महीने में 26 दिन का पैसा त्र 26ग20 त्र 520 रुपये व वर्ष का 520ग12 त्र 6,240 रुपये) तो हम साफ-साफ देख रहे हैं कि कंपनी हमारे पैसे की ही कटौती कर बोनस और छुट्टी के नाम पर हमें दे रही है।
    
कंपनी का समय सुबह 8ः30 से शाम को 6ः00 बजे तक का है यानी 9 घंटे, 8 घंटे ड्यूटी और 1 घंटा ओवर टाइम, सभी मजदूर सुबह 8ः30 बजे से 1ः00 तक लगातार काम करते हैं फिर आधा घंटा लंच का ब्रेक फिर 1ः30 बजे से शाम को 6ः00 बजे तक लगातार काम करते हैं यानी लंच से पहले 4ः30 घंटे लगातार काम और लंच के बाद 4ः30 घंटे लगातार काम व कोई ब्रेक नहीं। वैसे अगर व्यवहार में देखा जाए तो कंपनी 9 घंटे में ही 12 घंटे का काम मजदूरों से ले रही है। क्योंकि कंपनी मालिक और प्रबंधन एक-एक मिनट का मजदूरों का हिसाब रखता है कि वह क्या कर रहे हैं। कंपनी ने मजदूरों का गेट पास बंद कर दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही यह साफ हो गया है कि अब मजदूरों की छुट्टियां भी कम हो जाएंगी। पहले 1 जनवरी की छुट्टी कंपनी की तरफ से मिलती थी इस बार भी कंपनी ने 1 जनवरी को छुट्टी रखी परंतु 25 जनवरी को उसकी जगह पर काम कराया। इस बात से यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सब कुछ मालिक और प्रबंधन की मर्जी पर है मजदूरों का अपना कोई अधिकार नहीं है।
    
कंपनी मजदूरों को मेहनत करने वाले और फिर पेट भरने वाले एक जानवर से ज्यादा नहीं समझ रही है। किसी त्यौहार में छुट्टी की सूचना छुट्टी से पहले वाले दिन शाम को 5ः30 बजे मजदूरों को दी जाती है। मजदूर कहीं आने-जाने, किसी से मिलने-जुलने, कोई रिजर्वेशन कराने में इन छुट्टियों का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता है। इस दिवाली में कंपनी ने मजदूरों को 19 अक्टूबर की शाम को बताया कि 20 और 21 की दिवाली की छुट्टी रहेगी, 22 को कंपनी चली और 23 को फिर छुट्टी रही परंतु 23 तारीख की छुट्टी का पैसा उन्ही मजदूरों को मिला जिन्होंने 22 तारीख को ड्यूटी की। जो मजदूर 22 को ड्यूटी नहीं कर पाए उनको 23 का पैसा नहीं दिया गया।
    
कंपनी में काम कर रहे हेल्पर मजदूरों का आज पांच-पांच साल काम करने के बाद भी वेतन 12,000-13,000 रु. ही है हालांकि हेल्पर मजदूरों का काम भी काफी दिमाग लगाने वाला है।
    
कंपनी मालिक कुछ गौशालाओं की देख-रेख में सीधा खर्च करते हैं। उनके परिवार के अन्य लोग जैसे कि महिलाएं गौशाला को देखती हैं। मजदूरों की मेहनत का पैसा निचोड़ो, उनको हमेशा नौकरी के आतंक के साए में काम करवाओ और पुण्य पाने के लिए गौशाला में खर्च करो। कंपनी मालिक का एक प्लांट फरीदाबाद सेक्टर-6 में भी है।         -फरीदाबाद संवाददाता

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