उत्तराखण्ड : हिन्दुत्व की प्रयोगशाला

Published
Mon, 02/16/2026 - 06:00
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आजकल उत्तराखंड हिंदुत्व की प्रयोगशाला बना हुआ है। यहां लंपट, गुंडा तत्वों को हिंदुत्व के नाम पर गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिली हुई है। कभी पूर्वोत्तर के छात्र एंजल चकमा को मार दिया जाता है, कभी कश्मीरी शाल बेचने वालों पर हमला किया जाता है तो कभी बुल्ले शाह की दरगाह पर तोड़फोड़ की जाती है। इससे पहले भी उत्तरकाशी वगैरह में मुसलमानों के खिलाफ बवाल होता रहा है।         

अभी ताजा मामला कोटद्वार का है जहां बजरंग दल के गुंडों ने अपनी गुंडागर्दी दिखाकर एक मुस्लिम दुकानदार को अपनी दुकान का नाम बदलने के लिए दबाव बनाया। संयोग से एक अपना असली हिंदू शेर वहां पहुंच गया और इन गुंड़ों को वहां से दुम दबाकर भागना पड़ा। मगर दो दिन बाद इन गुंड़ों ने अपने सियारों की भीड़ को इकट्ठा करके वहां बवाल करने की कोशिश की। दीपक को और उसके परिवार को गंदी-गंदी गालियां देते हुए हमला करने का प्रयास किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि ये किस तरह से दीपक को गालियां देकर उकसाने और कोटद्वार का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे थे। मगर किसी तरह से मामला टल गया।
    
दरअसल बजरंग दल जैसे जितने भी संगठन हिंदुस्तान में मौजूद हैं ये ही हिंदुओं और देश के असली दुश्मन हैं। ये देश की तरक्की में एक रोडा हैं। इनका काम समाज में धर्म और जाति के नाम पर आतंक कायम करना है, समाज को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करना है।
    
हमारा संविधान देश के हर नागरिक को देश के किसी भी राज्य में आने-जाने की, रहने की, व्यापार करने की छूट देता है। हमारा संविधान हमें अपनी इच्छानुसार धर्म चुनने, शादी करने व खाने-पीने की भी आजादी देता है। फिर ये कौन होते हैं हमें रोकने वाले। मगर जबसे देश में हिंदू फासीवादी सत्ता पर विराजमान हुए हैं तब से इन संगठनों को गुंडागर्दी करने की खुली आजादी मिली हुई है। अल्पसंख्यक समुदाय और दलितों पर इनके हमले लगातार बढ़ रहे हैं। गौ हत्या, लव जेहाद, लैंड जेहाद और धर्म परिवर्तन के नाम पर ये मुसलमानों और इसाईयों पर हमले कर रहे हैं। दलितों पर तो पेशाब करने से लेकर थूक चटवाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
    
अब वक्त आ गया है कि इन आतंकी गुंडा संगठनों का डटकर मुकाबला किया जाय। नहीं तो हिंदुस्तान के सामाजिक ताने-बाने को, सामाजिक सौहार्द को ये आतंकी, गुंडा संगठन तहस-नहस कर देंगे। इनसे डरने के बजाय इनके सामने सीना तानकर खड़ा होने की जरूरत है जैसे कोटद्वार में दीपक खड़ा हो गया। वैसे भी ये संगठन गीदड़ों की फौज हैं, जो कमजोर निहत्थों और अकेले व्यक्तियों पर हमला करती है। कोटद्वार में भी इन्होंने पूरे उत्तराखंड से लोगों को इकट्ठा करके दीपक पर हमला करने की कोशिश की। इनकी हिम्मत ही नहीं है कि ये अकेले-अकेले दीपक तो क्या एक सामान्य से व्यक्ति का भी मुकाबला कर सकें।
    
आज दीपक को समाज के दूसरे इंसाफ पसंद और इंसानियत व भाईचारे में विश्वास रखने वाले लोगों के साथ की जरूरत है, हमें दीपक के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने की आवश्यकता है। सभी लोगों को प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि वह इस तरह के संगठनों, जो कि संविधान के खिलाफ काम करते हैं, कानून को अपने हाथ में लेकर समाज में अशांति फैलाने का काम करते हैं, ऐसे संगठनों पर बैन लगाया जाय। और ऐसे गुंडा तत्वों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाय।
        -भारत सिंह आंवला

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