युद्ध

यूक्रेन-रूस युद्ध पर ट्रम्प का पलटना

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अमेरिकी चुनाव में रूस-यूक्रेन युद्ध बेहद कम समय में रुकवाने का वादा करने वाले ट्रम्प अब अपने वायदे से पलटी मारते नजर आ रहे हैं। चुनाव के वक्त ट्रम्प ने पुतिन की तारीफ करत

रूस-यूक्रेन युद्ध व्यापक युद्ध की ओर बढ़ रहा है?

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यूरोपीय साम्राज्यवादी रूस पर और ज्यादा प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर चुके हैं। वे रूस के ऊर्जा क्षेत्र में और बैंक क्षेत्र में और कड़े प्रतिबंधों को लगा रहे हैं। वे रूसी साम्राज्यवादियों को आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही वे यूक्रेन को युद्ध में भारी मदद कर रहे हैं। 

इजरायल का ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला

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इजरायल ने ईरान के परमाणु व मिसाइल ठिकानों पर अपनी मिसाइलों से क्रूर हमला बोल दिया है। ‘आपरेशन राइजिंग लायन’ नामक इस सैन्य अभियान ने दुनिया में जंग का एक नया केन्द्र खुलने

साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा टकराव की ओर

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ट्रम्प के सामने चीनी साम्राज्यवादियों से मिलने वाली चुनौती से निपटना प्रमुख समस्या है। चीनी साम्राज्यवादियों और रूसी साम्राज्यवादियों का गठजोड़ अमरीकी साम्राज्यवाद के विश्व व्यापी प्रभुत्व को कमजोर करता है और चुनौती दे रहा है। इसलिए, हेनरी किसिंजर के प्रयोग का इस्तेमाल करने का प्रयास करते हुए ट्रम्प, रूस और चीन के बीच बने गठजोड़ को तोड़ना चाहते हैं। हेनरी किसिंजर ने 1971-72 में चीन के साथ सम्बन्धों को बहाल करके और चीन को सोवियत संघ के विरुद्ध खड़ा करने में भूमिका निभायी थी। 

युद्धों, नरसंहारों के बीच दुनिया में बदलते हालात

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रूस की सेनायें यूक्रेन में लगातार हमला करते हुए आगे बढ़ रही हैं। वे कुर्स्क और बोल्दगरोया में यूक्रेनी सेना को मुख्यतः पीछे धकेल चुकी हैं। अब वे यूक्रेन के सुमी, खारकोव और

इजरायल का ईरान पर हमला

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बीते दिनों इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला बोल दिया। मिसाइलों के जरिये लगभग दिन भर किये गये इस हमले में ईरान के 4 सैनिकों के मरने व सैन्य सामग्री के भारी नुकसान क

आलेख

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मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।