शोषण की चक्की में पिसते इंपीरियल आटो के मजदूर
इंपीरियल आटो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 21/1 कंपनी फरीदाबाद के सेक्टर 5 में स्थित है। यह कंपनी गाड़ी इंजन के लिए पार्ट्स बनाती है। फरीदाबाद के स्तर पर इंपीरियल
इंपीरियल आटो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 21/1 कंपनी फरीदाबाद के सेक्टर 5 में स्थित है। यह कंपनी गाड़ी इंजन के लिए पार्ट्स बनाती है। फरीदाबाद के स्तर पर इंपीरियल
8 दिसम्बर से कनाडा के क्यूबेक प्रांत के लाखों कर्मचारी एक सप्ताह की हड़ताल पर हैं। इनमें अध्यापक, स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मच
कल रात धरने पर बारिश हुई,
धरना स्थल पर ही कुछ पेड़ हैं
जो अपनी ओट से अपने
नीचे आने वाले जीवों को धूप, बारिश से
बचाते रहते हैं
जब बारिश होती है
‘भिक्षाम देही’ टीवी पर सीरियल चल रहा है। तिवारी जी गांव में बैठकर कोई नाटक देख रहे हैं। कभी किसी ब्राह्मण को भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते हुए देखते हैं, तो कभी किसी आश्रम
लालकुंआ/ वैसे तो अनिश्चितता पूंजीवादी एवं साम्राज्यवादी समाजों में लगातार बनी रहती है। निश्चितता केवल इस बात में निहित है कि संकटग्रस्तता की ओर बढ़ता समाज
रेनाल्ट-निसान आटो कम्पनी के स्पेयर पार्ट्स बनाने वाली जापानी यूनीप्रेस कारपोरेशन के मजदूर बीते 2 माह से संघर्षरत हैं। तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थित इस कंपनी ने यून
अमेरिका में लम्बे समय से चल रही आटो मजदूरों की हड़ताल को यूनियन नेतृत्व क्रमशः समाप्त करने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी आटो मजदूरां का ट्रेड यूनियन केन्द्र यूनाइटेड आटो वर्कर्
बिहार राज्य की जाति जनगणना के आंकड़े 2 अक्टूबर 2023 को जारी किए गए। देश के राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां दो खेमों में बंट गई हैं और देश को दो खे
मीडिया को आम तौर पर आम जनता अपनी समस्या के समाधान के तौर पर देखती रही हैं। लोगों का मानना होता था कि अगर हम अपनी समस्या मीडिया के सामने लेकर जाएंगे तो मीडिया उसको उजागर क
सिर्फ मेरे अकेले की लड़ाई नहीं है।
जुल्म, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ,
मैं जब निकलूं जुल्मी से जंग लड़ने,
उसको भी आना होगा तुमको भी आना होगा।
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि