युद्ध के बीच इजरायल गये भारतीय मजदूरों के हालात

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
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ईरान पर हमले की शुरुआत करते हुए इजराइल-अमेरिका ने ईरान के स्कूलों पर मिसाइलें गिराईं जिसमें ईरान की 5 से 12 साल की 160 से अधिक निर्दोष मासूम बच्चियां मार दी गईं। अमरीकी-इजरायली हमलों में ईरान के कई बड़े नेता व अधिकारी मारे गए। प्रत्युत्तर में ईरान ने भी इजरायल व 8 अरब देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए हमला बोला है। 
    
दुनिया के अधिकांश देशों में तेल, गैस, का संकट पैदा हो गया है जिसके कारण अलग-अलग देशों की जनता परेशान है। हमारे ही देश में जिस तरह गैस सिलेंडर महंगे हो गये हैं और लम्बी लाइनें लगाने के बाद भी लोगों को गैस नहीं मिल पा रही है, इस बात की चर्चा हर तरफ हो रही है। 
    
इस पूरे युद्ध में उन मजदूरों की चर्चा कहीं पर भी नहीं है, जिन्हें उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा की सरकार ने इजरायल भेजा था। इन मजदूरों को इस युद्ध से कुछ समय पहले फिलीस्तीन पर इजरायली हमले के दौरान भेजा गया था। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने इन मजदूरों को इजरायल भेजते समय अपनी पीठ थपथपाई थी तथा इसका खूब प्रचार किया था।      
    
इंडियन एक्सप्रेस की सितंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों के लिए इस रोजगार योजना को अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू किया गया था। उस दौरान फिलिस्तीनी श्रमिकों को इजरायल में निर्माण स्थलों पर काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। 
    
उत्तर प्रदेश से चुने गए 2,700 से अधिक उम्मीदवारों को पिछले दो सालों में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा जारी विज्ञापनों के माध्यम से इजरायल में कुशल श्रमिकों को भेजने की एक सरकारी योजना के लिए चुना गया था। 2024 के अंत तक भारत से लगभग 5000 श्रमिकों को इजरायल भेजा गया। अपने देश में बेरोजगारी से तंग आकर इन मजदूरों ने अपनी जान को खतरे में डाला। इजरायल में काम पर जाने के लिये इन मजदूरों ने दोस्तों से, रिश्तेदारों से उधार लेकर, गहने तथा जमीन गिरवी रखकर, फसल व जमीनें बेच कर पैसे जुटाये थे।    
    
उस समय की खबरों के अनुसार इजरायल जाने के लिये आजमगढ़ के राजमिस्त्री गौतम चौहान (28) ने अपनी बहन के सोने के गहने गिरवी रखकर और अपने परिवार की आधी एकड़ जमीन बंधक रखकर इजरायल में मजदूर के रूप में काम करने के लिए 68,800 रुपये जुटाए थे। फतेहपुर के रहने वाले 45 वर्षीय फोरमैन छेदी लाल ने भी इसी कारण से अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखे थे।    
    
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के अधिकारियों पर 376 मजदूरों द्वारा इजरायल में उम्मीदवारों को भेजने के लिए मनमानी नीति अपनाने का आरोप लगाया गया था। इजरायल के टिकटों के लिए किए गए भुगतान की रसीदें दिखाते हुए मजदूरों ने एनएसडीसी पर मजदूरों को धोखा देने का आरोप लगाया था।   
    
इसके बाद से इजरायल ने इन श्रमिकों को गैर-निर्माण क्षेत्रों में अकुशल या औद्योगिक नौकरियों में फिर से तैनात करने की अनुमति दी है। 2024 के अंत तक, लगभग 5,000 श्रमिकों को सरकार से सरकार (G2G) मार्ग के माध्यम से और इतनी ही संख्या में श्रमिकों को व्यवसाय से व्यवसाय (B2B) मार्ग के माध्यम से भेजा गया था। इजरायल द्वारा इन श्रमिकों के लिए अन्य क्षेत्रों को खोलने के साथ, वर्ष 2025 में इस संख्या के बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई थी। इसके हिसाब से अब तक 10,000 से भी अधिक मजदूर इजरायल में हैं। और इस समय पूरे इजरायल पर ईरान द्वारा मिसाइलें दागी जा रही हैं। 
    
मजदूरों को इजरायल भेजने पर अपनी पीठ थपथपाने वाले योगी अब उनकी खबर तक नहीं ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत के मजदूरों को भारत वापस लाने के लिये कोई कार्यवाही अभी तक नहीं की है, न ही इस संबंध में अभी तक कोई बयान आया है। 
    
हमें यह याद रखना होगा कि वे मजदूर अपनी इच्छा से मौज-मस्ती करने के लिये नहीं गये थे? बल्कि भारत में बेरोजगारी से तंग आकर इजरायल में मजदूरी करने के लिये गये थे, जिससे विदेशी करेंसी भारत को मिलती है। भारत सरकार द्वारा एक समझौते के तहत कानूनी प्रक्रिया पूरी कर वीजा लेकर इजरायल गये थे। खबर है कि इजरायल में हमले का सायरन बजते ही बाकी जनता तो बंकरों में पहुंच जाती है पर भारतीय मजदूरों को बंकरों में भी छुपने की अनुमति नहीं दी जा रही है।      
    
युद्धों का बोझ हमेशा ही मजदूरों-मेहनतकशों पर डाला जाता है। एक अनुमान के मुताबिक समूचे पश्चिम एशिया में 1 करोड़ के आस-पास भारतीय मजदूर है जिनकी जान इस युद्ध से जोखिम में पड़ी है। एक ओर इजरायल व अरब देशों के प्रवासी मजदूर इस युद्ध के चलते जान का खतरा झेल रहे हैं दूसरी तरफ भारत-श्रीलंका-पाकिस्तान-बांग्लादेश के मजदूर-मेहनतकश रसोई गैस की तंगी का सामना कर रहे हैं। युद्ध की सर्वाधिक कीमत मजदूर-मेहनतकश ही भुगत रहे हैं। साम्राज्यवाद का अर्थ ही है युद्ध। केवल व केवल साम्राज्यवाद का अंत करके ही स्थायी शांति कायम हो सकती है। 

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