‘हिन्दू सम्मेलन’ : हिन्दू फासीवादी अभियान के हिस्से

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में पूरे देश में जगह-जगह ‘हिन्दू सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है। ये ‘हिन्दू सम्मेलन’ 15 जनवरी 2026 से शुरू हुए हैं। पूरे देश में ऐसे एक लाख सम्मेलन होने हैं। रिपोर्ट के अनुसार 15 मार्च तक ऐसे ‘हिन्दू सम्मेलनों’ में करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने भागीदारी की है। ये सम्मेलन पूरे शताब्दी वर्ष में चलने हैं। 
    
इन ‘हिन्दू सम्मेलनों’ का घोषित उद्देश्य ‘हिन्दू एकता’, ‘समाज समरसता’, ‘सांस्कृतिक जागृति’, ‘सनातन धर्म के मूल्यों का संरक्षण’, ‘पारिवारिक मूल्यों’ को बढ़ाना, ‘पर्यावरण संरक्षण’, ‘स्वदेशी’ चीजों पर जोर, ‘नागरिक अनुशासन’ आदि, आदि बताया गया है। 
    
इन ‘हिन्दू सम्मेलनों’ को हर शहर, हर गांव में होता देखा जा सकता है। ‘सम्मेलन’ का आयोजन पूरी तड़़क-भड़क व उत्तेजना फैलाने वाले प्रदर्शनों के साथ होता है। ‘हिन्दू एकता’ को बढ़ावा देने के नाम पर उत्तेजक भाषण दिये जाते हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को निशाने पर लिया जाता है। ‘वर्ग’ और ‘जाति’ की सामाजिक सच्चाइयों पर पर्दा डालने के लिए ‘हिन्दू एकता’ पर जोर दिया जाता है। 
    
ये ‘हिन्दू सम्मेलन’ उन राज्यों में जहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव हैं वहां ज्यादा जोर-शोर से आयोजित हो रहे हैं। दक्षिण भारत में खासकर कर्नाटक में इन हिन्दू सम्मेलनों पर अत्यधिक जोर है। यही बात उत्तर प्रदेश पर लागू होती है। उत्तराखण्ड को संघ-भाजपा ने एक नई ‘हिन्दू प्रयोगशाला’ बनाया हुआ है। अतः यहां भी ‘हिन्दू सम्मेलन’ दनादन आयोजित किये जा रहे हैं। 
    
इन हिन्दू सम्मेलनों में अक्सर गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय हिन्दुओं की भरमार होती है। खाते-पीते हिन्दू कम ही संख्या में होते हैं। अक्सर वे सम्मानित और मंचासीन होते हैं जबकि आम गरीब, निम्न मध्यवर्गीय हिन्दू स्त्री-पुरुष भीड़ के हिस्सा भर होते हैं। लम्पट तत्व इन हिन्दू सम्मेलनों के दौरान पूरी उग्रता के साथ सक्रिय होकर आम मेहनतकशों पर रोब जमाने व आतंक फैलाने का काम करते हैं। ‘सभ्य जनों’ की मीठी-मीठी बातों का जहरीला असर होता है। समाज में मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा को एकदम आम बना दिया गया है। ‘हिन्दू सम्मेलन’ में कहने को ‘हिन्दू एकता’ की बातें की जाती हैं जिसका स्वाभाविक परिणाम मुसलमानों व ईसाईयों के प्रति नफरत भरना होना है। 
    
‘हिन्दू सम्मेलन’ संघ-भाजपा की हिन्दू फासीवादी परियोजना के एक हिस्से के तौर पर फासीवादी अभियान है। फिलहाल आम मजदूर-मेहनतकशां के पास इनकी उपेक्षा व बायकाट ही रास्ता है।  

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