युद्ध विरोधी नारों के साथ मनाया गया शहादत दिवस

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
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इस बार भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहादत दिवस युद्ध की गूंज के बीच साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया। 22 व 23 मार्च को विचार गोष्ठी, युद्ध विरोधी सभा, साम्राज्यवाद विरोधी मार्च, ट्रंप-नेतन्याहू का पुतला दहन, प्रभात फेरी इत्यादि विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर अमेरिका-इसराइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध की कड़ी भर्त्सना की गई। कार्यक्रमों के दौरान ‘‘साम्राज्यवाद का नाश हो’’, अमेरिका-इजराइल गठजोड़ मुर्दाबाद, ‘‘ईरान की सड़कें लहूलुहान, याद दिलाता वियतनाम’’, ‘‘साम्राज्यवाद तेरी कब्र खुदेगी, एशिया की धरती पर’’ इत्यादि नारों के साथ ईरान पर थोपे गये युद्ध का भारी विरोध किया गया। 
    
दिल्ली की शाहबाद डेरी में 22 मार्च को विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों द्वारा ‘‘साम्राज्यवादी युद्ध, फासीवादी नफरत और शहीद भगतसिंह’’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन कर साम्राज्यवाद के लुटेरे चरित्र को उजागर किया गया। तदुपरांत, युद्ध विरोधी नारों के साथ साम्राज्यवाद विरोधी मार्च निकाला गया। 
    
गुड़गांव में 22 मार्च को इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा ‘‘ईरान पर हमला और साम्राज्यवाद’’ विषय पर विचार गोष्ठी की गई। तदुपरांत, युद्ध विरोधी नारों के साथ साम्राज्यवाद विरोधी मार्च निकाला गया। गुड़गांव में ही 23 मार्च को इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में प्रभात फेरी निकालकर अमर शहीदों को याद किया गया।
    
फरीदाबाद में 22 मार्च को इंकलाबी मजदूर केंद्र और परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा 22 मार्च को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। तदुपरांत, युद्ध विरोधी नारों के साथ ट्रंप और नेतन्याहू के पुतलों को आग के हवाले किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पहले अमेरिकी साम्राज्यवाद के संरक्षण में इजराइल द्वारा गाजा में भयंकर नरसंहार किया गया और अब अमेरिका-इजराइल गठजोड़ द्वारा ईरान में मासूमों की हत्यायें की जा रही हैं। कार्यक्रम में आजाद नगर संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। फरीदाबाद में ही 23 मार्च को इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा आजाद नगर मजदूर बस्ती एवं सरुरपुर में प्रभात फेरी निकालकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
    
हरिद्वार में 22 मार्च को संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के बैनर तले विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों एवं फैक्टरी यूनियनों ने युद्ध विरोधी रैली निकालकर अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोध किया। हरिद्वार में ही 23 मार्च को भेल मजदूर ट्रेड यूनियन द्वारा भगतसिंह चौक पर भगतसिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि सभा की गयी। इसके अलावा 23 मार्च को कनखल में जन अधिकार मंच द्वारा श्रद्धांजलि सभा की गई। 
    
कोटद्वार में 23 मार्च को अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर साम्प्रदायिकता और जातिवाद विरोधी- मानवता मंच का गठन किया गया। 
    
काशीपुर में 22 मार्च को विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों द्वारा पंत पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि साम्राज्यवाद मानवता का दुश्मन है।
    
जसपुर के ग्राम निवारमुंडी में 23 मार्च को विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार एक फासीवादी सरकार है जिसकी विदेश नीति अमेरिका परस्त है। जसपुर में ही तहसील में शहीद यादगार कमेटी द्वारा 23 मार्च को भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगतसिंह रूस की समाजवादी क्रांति से बहुत अधिक प्रभावित थे और भारत में भी समाजवादी समाज कायम करना चाहते थे। 
    
रामनगर में 22 मार्च को संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले युद्ध विरोधी आम सभा का आयोजन किया गया। आम सभा में वक्ताओं ने कहा कि ईरान पर थोपे गये युद्ध के कारण पूरी दुनिया में तेल-गैस की कीमतों में उछाल आ रहा है। होटलों, ढाबों, हास्टलों एवं अन्य बहुत से उद्योगों में कामकाज प्रभावित होने के कारण मजदूरों को अपना रोजगार गंवाना पड़ रहा है। रामनगर में ही 23 मार्च को परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा प्रभात फेरी निकालकर अमर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रामनगर के नजदीक सुंदरखाल में भी 23 मार्च को एक सभा का आयोजन किया गया। वन अधिकार समिति द्वारा आयोजित इस सभा में अमेरिका-इजराइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर किये जा रहे हमलों की कड़ी भर्त्सना की गई। 
    
हल्द्वानी में 22 मार्च को परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा ‘‘साम्राज्यवादी युद्ध और भगतसिंह’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा तेल-गैस संसाधनों पर कब्जे के लिये पहले वेनेज़ुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया और अब ईरान पर हमला बोल दिया गया। कार्यक्रम में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भाकपा (माले), भीम आर्मी और अम्बेडकर मिशन से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी की।
    
लालकुआं में 23 मार्च को इंकलाबी मज़दूर केंद्र और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा श्रद्धांजलि सभा कर साम्राज्यवाद का पुतला दहन किया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्यवादियों द्वारा लाये गये पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल के विरोध में भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में धमाका किया था। आज मोदी सरकार भी मजदूरों को गुलामी की नई बेड़ियों में जकड़ने के लिये नये लेबर कोड़ लेकर आई है।
    
रुद्रपुर में 23 मार्च को श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न क्रांतिकारी-प्रगतिशील संगठनों व फैक्टरी यूनियनों के कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क में एक सभा का आयोजन किया। तदुपरांत भगतसिंह चौक तक जुलूस निकालकर भगतसिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। सभा में वक्ताओं ने साम्राज्यवादी युद्ध का विरोध करने के साथ मजदूर विरोधी 4 नये लेबर कोड़ रद्द करने की मांग की।
    
बरेली में 22 मार्च को ‘‘साम्राज्यवादः कल और आज’’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों, यूनियनों, फेडरेशनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे जनता के नायकों को उनके विचारों से काटकर, उन्हें पगड़ी व जनेऊ में दिखाकर, जाति-धर्म के खांचे में बांटा जा रहा है।
    
मऊ में 23 मार्च : शहादत दिवस के अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा मशाल जुलूस निकालकर सभा की गई।
    
बलिया में 22 मार्च को इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण पर विचार गोष्ठी की गयी। तदुपरांत ईरान पर जारी साम्राज्यवादी हमलों के विरोध में नुक्कड़ सभायें की गयीं।
    
कुरुक्षेत्र में 22 मार्च को जन संघर्ष मंच द्वारा संध्या फेरी का आयोजन किया गया। इसके बाद 23 मार्च को शहीद भगतसिंह दिशा संस्थान स्थित भगतसिंह की विशाल प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शहर में जुलूस निकाला गया एवं जनसभा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि इंकलाब का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि शोषण मुक्त समाजवादी व्यवस्था की स्थापना है।
    
गोहाना में 23 मार्च को जन संघर्ष मंच द्वारा भगतसिंह चौक स्थित भगतसिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। तदुपरांत आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि भगतसिंह महान विचारक और रणनीतिकार थे। उन्होंने क्रांतिकारी विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिये अदालतों का प्लेटफार्म की तरह इस्तेमाल किया।      -विशेष संवाददाता

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