यह हमारे यहां नहीं हो सकता!
नेपाल की हालिया घटनाओं के बाद उदारवादी और वाम-उदारवादी एक स्वर से कह रहे हैं कि हमारे यहां ऐसा नहीं हो सकता। इसके लिए भांति-भांति के तर्क दिये जा रहे हैं।
नेपाल की हालिया घटनाओं के बाद उदारवादी और वाम-उदारवादी एक स्वर से कह रहे हैं कि हमारे यहां ऐसा नहीं हो सकता। इसके लिए भांति-भांति के तर्क दिये जा रहे हैं।
हरियाणा का जिला गुड़गांव जो कि मिलेनियम सिटी के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला कई वजहों से चर्चा में रहा है। पहला तो यह कि यह हरियाणा की अर्थव्यवस्था के लिए मुख्य जिला बन
हरियाणा के भिवानी के एक गांव की रहने वाली 19 वर्षीय प्ले स्कूल की शिक्षिका मनीषा 11 अगस्त को मेडिकल कालेज (नर्सिंग) में एडमिशन की पूछताछ के बाद लापता हो जाती है। घर न पहु
रामनगर/ उत्तराखंड में रामनगर के मालधन में पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग की मिलीभगत से अवैध शराब का धंधा जमकर फल-फूल रहा है। इससे क्षेत्र की महिलाएं बेहद
लालकुंआ/ दिनांक 27 अगस्त को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने गाजा पट्टी पर इजरायली हमले के विरोध में इजराइल व अमेरिका के गठजोड़ का पुतला फू
15 अगस्त, 1947 को भारत ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद हुआ था। इस आजादी को हासिल करने के लिये देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, नौजवानों और महिलाओं ने बेमिसाल कुर्बान
हल्द्वानी/ परिवर्तनकामी छात्र संगठन के आह्वान पर उत्तराखंड में क्लस्टर योजना लागू करने पर 15 अगस्त को हल्द्वानी के दमुवाढूंगा में ‘‘शिक्षा का अधिकार और क
कपड़े बेचने वाली ‘अमेरिकन ईगल’ नामक आर्थिक घाटे में चल रही कंपनी ने 23 जुलाई 2025 को गोरी त्वचा, सुनहरे बाल और नीली आंखों वाली अभिनेत्री सिडनी स्वीनी को बतौर माडल लेते हुए
विगत 20 अगस्त को काशीपुर, उत्तराखण्ड में कक्षा नौ के छात्र ने स्कूल में अपने शिक्षक को गोली मार दी। छात्र आए दिन शिक्षक की डांट-फटकार से आहत था। शिक्षक की शिकायत पर पुलिस
बीते दिनों तेलंगाना व गुजरात उच्च न्यायालय ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर दो परस्पर विरोधी निर्णय दिये। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने जहां सरकार को इन्हें नियमित करने का आदेश दि
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।