गन्ना-चीनी और महिला मजदूर
चीनी हर घर की रसोई में इस्तेमाल होती है। ज्यादातर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। पर शायद ही चीनी खाते हुए कोई इसकी उत्पादन प्रक्रिया में महिला मजदूर
चीनी हर घर की रसोई में इस्तेमाल होती है। ज्यादातर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। पर शायद ही चीनी खाते हुए कोई इसकी उत्पादन प्रक्रिया में महिला मजदूर
देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक
हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल
बेल्जियम की एरिजोना सरकार मजदूर वर्ग पर नये हमले बोल रही है। एक ओर सरकार सैन्यीकरण पर खर्च बढ़ा रही है तो दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों के पेंशन, वेतन पर हमले के साथ सार्वज
दिल्ली लाल किले के पास विस्फोट और कश्मीर में हुई हालिया विस्फोट की घटना के बाद पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर सरकार द्वारा आतंक कायम किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ
पिछले कुछ सालों से अक्सर ही देखने में आ रहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते छात्रों की हताशा और निराशा उन्हें सड़कों पर उमड़ने को बाध्य कर दे रही है। इस हताशा और न
21 नवम्बर को मोदी सरकार ने जबरदस्त इश्तिहारबाजी के साथ चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने की घोषणा की। ये श्रम संहिताएं वर्ष 2019 व 2020 में संसद द्वारा पारित
महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति ने मानव इतिहास में एक नये युग की शुरुआत की थी। महान लेनिन और बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व में 1917 में रूस में संपन्न हुई इस क्रांति ने इतिहास में पहली बार किसी एक देश क
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि