अब शहीदों की प्रतिमाओं से भी इन्हें डर लगने लगा है

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
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23 मार्च 2026 को जबकि भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस पर लोग उन्हें याद कर रहे थे, उसी रात तड़के 3 बजे भाजपा सरकार द्वारा शाहजहांपुर में नगर निगम के पास 1972 में स्थापित की गई अशफाकउल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह की प्रतिमा को बुलडोजर से ढहा दिया गया; और आनन-फानन में टूटी हुई प्रतिमा को डम्प यार्ड में बहुत ही अपमानजनक तरीके से रात में ही फेंक दिया गया।
    
सरकार के इस कुकृत्य का जब चौतरफा विरोध शुरू हुआ तो सरकार को अपने कदम पीछे खींचते हुए दो दिन बाद ही आनन-फानन में प्रतिमायें फिर से स्थापित करने को मजबूर होना पड़ा। पर सरकार-शासन ने जनता से माफी मांगने की जरूरत तक नहीं समझी। हद तो तब हो गयी जब मूर्ति गिराने का आदेश देने वाले अधिकारी ही नये उद्घाटनकर्ता बन गये। 
    
याद रहे कि काकोरी काण्ड के इन तीनों शहीदों ने अपने अन्य साथियों के साथ काकोरी में रेल रोककर अंग्रेजी खजाना लूट लिया था, जो कि अंग्रेजी सरकार के लिए एक चुनौती था। इसी के कारण 1927 में अशफाकउल्लाह खान, रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। गौरतलब है कि अशफाकउल्लाह खान और रामप्रसाद बिस्मिल की दोस्ती देश में ‘‘साझी शहादत-साझी विरासत’’ और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।
    
अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली यह सरकार जिस फासीवादी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है उसमें इन अमर शहीदों के विचार बाधा हैं। इसीलिए सरकार रात के अंधेरे में प्रतिमा को तोड़ने एवं फेंकने की कार्रवाई करती है।
    
शहीदों को अपमानित करने वाली इस कार्यवाही पर शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, रामनगर, काशीपुर आदि जगहों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध दर्ज किया गया। 
        -विशेष संवाददाता

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