उस दिन गुड़गांव से बरेली जाने के लिए टनकपुर एक्सप्रेस का इंतजार कर रहा था। ट्रेन का टाइम रात 10 बजे का था पर ट्रेन 30 मिनट लेट है, की उद्घोषणा बार-बार होते हुए 5 घंटे बाद ट्रेन आई। स्टेशन पर उद्घोषक से लेकर कोई भी ट्रेन का सही समय बताने में असमर्थ था। ज्यादातर बस का किराया देने में अक्षम मजदूरों के पास कोई और चारा भी नहीं था। मोबाइल की बैटरी भी जवाब दे चुकी थी और चार्जिंग प्वाइंट टूटे हुए थे। ऐसे में ट्रेन को कोसने और आपस में बात करने के अलावा कोई और चारा भी नहीं था।
मेरी निगाह दो नौजवान बच्चों पर जा रही थी जो बार-बार उठकर पटरी पर झांक रहे थे मानो उनके चेहरे को देखकर ट्रेन जल्दी आ जाएगी। उनकी इस गतिविधि को कई बार देख मैंने उनसे बोल दिया कि भाई आपकी इस व्यग्रता को ट्रेन नहीं देख रही है। आप बैठ जाएंगे तब भी ट्रेन के आने या न आने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनमें से एक नौजवान मुस्कुराते हुए मेरे पास आकर खड़ा हो पूछने लगा अंकल आप कहां जाओगे, ट्रेन क्यों लेट है, क्या हर बार ये ट्रेन लेट होती है..... सवाल खत्म होते तब कुछ जवाब देता। नौजवान को पास में बैठाने के बाद मेरे सवाल शुरू हो गए कि कहां जाओगे, क्या करते हो....। दोनों नौजवान आज सुबह ही तिलहर के पास के गाड़िया रंगीन से गुड़गांव आए थे। उन्हें कोई ठेकेदार या उसका एजेंट जो उनके गांव का था, लेकर आया था। रहने के लिए एक रूम में 4 लोग और 10 घंटे काम के बाद 10 हजार वेतन बोला गया था। कमरे का किराया वेतन से कटेगा या नहीं उन्हें पता नहीं था। एक नौजवान 17 साल के आस-पास था आधारकार्ड में उम्र बढ़ाकर 18 करवाई थी दूसरे ने भी अपनी उम्र बढ़वाई थी। 17 साल के नौजवान का सुबह इंटरव्यू में एक बायर बनाने वाली फैक्टरी में सलेक्शन हो गया था तो दूसरे का सलेक्शन नहीं हुआ था। लेकिन उसका अकेले मन नहीं लगेगा इसीलिए दोनों वापस घर जा रहे थे। ऐसा उनका बोलना था।
सुबह 4 बजे ट्रेन आने पर संयोग से एक ही डिब्बे और बर्थ पर हम बैठे थे। मैंने एक चाय ली और पारले जी बिस्कुट के साथ पीने लगा। उन्हें बिस्किट आफर किया तो एक ने मना कर दिया। एक ने दो बार के बाद दो बिस्कुट ले लिए। सभी मोबाइल की बैटरी चार्ज में मशगूल होने लगे लेकिन दो ही चार्जिंग प्वाइंट थे। ऊंघते हुए बतियाते हुए लोग खेती किसानी से लेकर देश-दुनिया की सरकार को कोसने से लेकर हिमायत कर रहे थे।
उन नौजवानों से मैं फिर मुखातिब हुआ जब उसने बोला कि अंकल अब आप फोन चार्ज कर लीजिए। मैंने उनसे पूछा अब गांव जाकर क्या करोगे तो बोला खेती में पिताजी का हाथ बटाऊंगा। दूसरे ने बोला कि दिहाड़ी या कुछ और। दोनों पढ़ाई आगे करने की भी सोच रहे थे। उनमें से 17 साल की उम्र वाले नौजवान का शरीर तप रहा था। उसने अपने बैग से एक गोली निकाली और वाशरूम के साथ लगी टोटी से पानी लेकर खा ली। मैं बोला बिना कुछ खाए आपने ये गोली क्यों खाई। उसने कोई जवाब नहीं दिया। बुज़ुर्ग महिला जो उसके पास में बैठी थी बोली अगले स्टेशन पर कुछ खा लेना और स्टेशन आ भी गया लेकिन उस नौजवान ने कुछ नहीं खाया। बिना पानी पिए बिना चाय पिए ये नौजवान शाम को 10 बजे से अगली दोपहर 2 बजे तक हमारे साथ थे। और अभी घर पहुंचने में उन्हें 5 घंटे और लगने थे।
ऐसे वाकयात कई बार ट्रेन यात्रा में मैं देख चुका हूं। बेरोजगार नौजवान के साथ क्या खिलवाड़ चल रहा है। जब इन नौजवानों का गुस्सा एकजुट हो फूटेगा तो सच में भूचाल आ जायेगा। -एक पाठक