बेलसोनिका मजदूरों का संघर्ष जारी

गुड़गांव/ बेलसोनिका प्रबंधन ने दिनांक 21 अप्रैल 2023 को 11 और मजदूरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। बेलसोनिका प्रबंधन फर्जी दस्तावेजों के नाम पर अब तक 17 मजदूरों को नौकरी से बर्खास्त कर चुका है तथा यूनियन गतिविधियों में शामिल होने पर 13 मजदूरों को निलम्बित कर चुका है, जिनमें तीन यूनियन पदाधिकारी भी शामिल हैं। अब तक बेलसोनिका प्रबंधन ने कुल 30 मजदूरों को निलंबित व नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। बेलसोनिका प्रबंधन ही नहीं अपितु गुड़गांव औद्योगिक इलाके की अन्य वेंडर फैक्टरियों के मालिक भी ‘‘फर्जी दस्तावेजों’’ को स्थाई श्रमिकों की छंटनी करने का हथियार बना चुके हैं या बना रहे हैं।
    दिनांक 1 मार्च को फर्जी दस्तावेजों के नाम पर की जा रही छंटनी पर रोक लगाने, सामूहिक मांग पत्रों के समाधान हेतु यूनियन द्वारा किए गए 6 घंटे के टूल डाउन के बाद श्रम विभाग ने हस्तक्षेप कर विवादों को निपटाने के लिए यूनियन व प्रबंधन की वार्ताएं शुरू कीं तथा 10 दिनों के भीतर विवादों को निपटाने का आश्वासन भी दिया था। सहायक श्रम आयुक्त महोदय की मध्यस्थता में चल रही समझौता वार्ताओं के दौरान प्रबंधन के अड़ियल व उकसावे पूर्ण रुख को देखते हुए श्रम अधिकारी को यथास्थिति व शांति बनाए रखने के लिखित आदेश/निर्देश तक जारी करने पड़े तथा इसके साथ ही प्रबंधन के इस अड़ियल व उकसावे पूर्ण कार्यवाही को देखते हुए सहायक श्रम आयुक्त ने विवाद के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारी (अतिरिक्त उपायुक्त महोदय) की मध्यस्थता में वार्ताओं को शुरू कराना पड़ा। दिनांक 21 मार्च 2023 को अतिरिक्त उपायुक्त महोदय गुरुग्राम की मध्यस्थता में वार्ता हुई। वार्ता में मामले को समझते हुए अतिरिक्त उपायुक्त महोदय ने प्रबंधन को फैक्टरी के भीतर मजदूरों की भर्ती के मापदंड/क्राइटेरिया के दस्तावेज लाने को कहा था। लेकिन प्रबंधन आज तक भी यह दस्तावेज ना तो श्रम अधिकारियों के पास पेश कर सका और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों के पास। क्योंकि ऐसा कोई भी दस्तावेज बेलसोनिका प्रबंधन के पास नहीं है। केवल बेलसोनिका प्रबंधन ही नहीं अपितु गुड़गांव औद्योगिक इलाके की तमाम वेंडर व अन्य फैक्टरियों के पास मजदूरों की भर्ती का ऐसा कोई मापदंड या क्राइटेरिया नहीं है। फैक्टरी में मजदूरों की भर्ती का मापदंड व क्राइटेरिया एक ही है कि मजदूर की उम्र 18 साल की होनी चाहिए तथा उसके हाथ-पैर सही सलामत हों ताकि वह मशीन की गति के साथ भाग-भाग कर कार्य कर सके। बेलसोनिका प्रबंधन ने श्रम विभाग में प्रशासनिक अधिकारी के यथास्थिति तथा शांति के आदेश/निर्देशों को ही नहीं तोड़ा बल्कि समझौता वार्ताओं के दौरान श्रमिकों को निलम्बित व बर्खास्त कर वह श्रम अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी के शांति तथा यथास्थिति के आदेश/निर्देश की धज्जियां उड़ा रहा है। और यहां तक कि मशीनों पर छह-छह माह के लिए भर्ती कर ठेका मजदूरों को लगाकर श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां भी उड़ा रहा है। प्रबंधन के इस रवैय्ये के खिलाफ श्रम विभाग मौन है तथा प्रशासन मालिक की सेवा में फैक्टरी में पुलिस मुहैय्या करा प्रबंधन की छंटनी की मंशा को अंजाम देने में फैक्टरी मालिक की सीधे तौर पर मदद कर रहा है।                                       प्रबंधन के इस तानाशाहीपूर्ण रवैय्ये तथा श्रम विभाग व प्रशासन के मालिकों के साथ गठजोड़ का मजदूर यूनियन पुरजोर तरीके से विरोध करती रही है।
    दिनांक 28 अप्रैल 2023 को बेलसोनिका यूनियन ने मारुति सुजुकी मजदूर संघ के साथ जुलूस निकाल कर अपनी मांगों का ज्ञापन उपायुक्त महोदय गुरुग्राम को सौंपा। इस जुलूस में बेलसोनिका मजदूरों के परिजनों ने भी हिस्सा लिया। 
    बेलसोनिका यूनियन के महासचिव ने बताया कि बेलसोनिका प्रबंधन फर्जी दस्तावेजों का हवाला देकर 10-15 सालों से कार्य कर रहे श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त कर रहा है। अतिरिक्त उपायुक्त महोदय व श्रम अधिकारी की मध्यस्थता में चल रही समझौता वार्ताओं के दौरान समझौता अघिकारियों के लिखित शांति व यथास्थिति के आदेशों/निर्देशों की उल्लंघना कर प्रबंधन अशांति व उकसावे पूर्ण कार्यवाहियां कर श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त कर रहा है। बेलसोनिका प्रबंधन ठेका श्रमिकों को मशीनों पर लगाकर उनसे मुख्य उत्पादन का कार्य करवा रहा है जो कि श्रम कानूनों में अनुचित श्रम अभ्यास की कार्रवाही बनती है जिस पर श्रम विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।
    प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की प्रतिनिधि रीना ने बात रखते हुए कहा कि प्रबंधन श्रमिकों को बर्खास्त कर उनके परिवारों में तनाव व भय का माहौल पैदा कर रहा है। बर्खास्त श्रमिकों के परिवारों के हालात काफी खराब हो चुके हैं। मजदूर व उनके परिजन इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे। 
    इसी प्रकार मारुति के बर्खास्त 546 श्रमिकों का मामला आज 11 साल बाद भी न्यायालय में लंबित है। आज तक भी इन श्रमिकों को न्याय नहीं मिला है।     
    अंत में यूनियन के प्रधान ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि यूनियन अब कठोर निर्णय लेगी। प्रबंधन की इस तानाशाही के खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाएगी।
ज्ञापन में ये मांगें की गयीं-
1. बेलसोनिका के सभी निलंबित व बर्खास्त श्रमिकों को तत्काल काम पर वापस लिया जाए।
2. फर्जी दस्तावेज के नाम पर छिपी छंटनी बन्द की जाए। अनुचित श्रम अभ्यास कर रहे बेलसोनिका प्रबंधक के खिलाफ सख्त कानूनी कारवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए।
3. मारुति से बर्खास्त किए गए 546 श्रमिकों को काम पर वापस लिया जाए।
4. बेलसोनिका कम्पनी में तैनात सभी बाउंसरों व अराजक तत्वों को तत्काल बाहर किया जाए।
5. बेलसोनिका कम्पनी में गैर कानूनी भर्ती पर रोक लगाई जाए।
6. बेलसोनिका में लम्बित सभी सामूहिक मांग पत्रों का समाधान किया जाए। 
        -गुड़गांव संवाददाता
 

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।