सेंचुरी मिल: यूनियन नेताओं को मिला चाटुकारिता का इनाम

Published
Sat, 05/16/2026 - 15:50
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सेन्चुरी मिल, जो आदित्य बिडला रियल एस्टेट (IBREL) लिमिटेड का हिस्सा थी, जिसका आई टी सी लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण पूर्ण होने के आखिरी चरण में हैं वहां एक अजीब तरीके का सन्नाटा, खामोशी शेष भी है और बेचैनी, छटपटाहट और असंतोष भी है। 
    
मिल में पिछला त्रिवार्षिक समझौता (फरवरी 2024- जनवरी 2027) जो अपने आखिरी वर्ष की दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है, उसमें एक संघर्ष देखने को मिला था, वो संघर्ष कई मामलों में अमूर्तता लिये हुए था। अगर उस संघर्ष के मूर्त पहलुओं की बात करें तो मुख्य रूप से दो बिन्दु थे- 

1. प्रबंधक और श्रम संगठनों की किसी भी प्रकार की वार्ता की पारदर्शिता
2. श्रम संगठनों की श्रमिकों के प्रति जवाबदेही
    
और आज ये दोनों बिन्दु जस के तस बने हुए हैं। मिल में सन्नाटा, खामोशी इसलिए बनी है कि मिल के आई टी सी लिमिटेड के अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, बेचैनी, छटपटाहट, चिंता इस बात की है कि नया प्रबंधक वर्ग जब आयेगा तो क्या करेगा?
    
शेष, असंतोष इस बात का है जिन मांगों के लिए संघर्ष हुआ था वो जस की तस बनी है या ये अन्य रूपों में बढ़ती ही जा रही हैं। जैसे समझौता 30 नवम्बर 2024 को सहायक श्रम आयुक्त, हल्द्वानी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ था, उसमें एक मुख्य मुद्दा वर्कलोड एवं पी एल एस पाॅलिसी (जो पावर सेविंग्स से सम्बन्धित है) या जो श्रमिकों को वित्तीय राहत देने का काम करता है इस पर आज की तिथि तक कोई बात नहीं बनी है। जिसे समझौता हस्ताक्षरित होने के आगामी 3 महीने में होना था। 
    
इसी बीच अप्रैल में प्रबंधक वर्ग श्रम संगठनों के 24 प्रतिनिधियों को गुजरात 7 दिवसीय भ्रमण पर भेजता है इसमें प्रबंधक वर्ग के एक उच्चाधिकारी भी शामिल रहते हैं। 
    
भ्रमण स्थल में सोमनाथ मंदिर, निष्कलंक मंदिर, द्वारकाधीश, मालिका तीर्थ, स्टेच्यु आफ यूनिटी आदि स्थल होते हैं। इसे श्रम संगठन धार्मिक यात्रा कहते हैं। प्रबंधक इनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रीमियम एसी बस, हाई क्लास एसी ट्रेन एवं उच्च स्तरीय होटलों में ठहरने की व्यवस्था करता है। श्रमिकों के अलावा ये चर्चा कई अधिकारियों के बीच में भी होती है कि ऐसा क्य मिल के समग्र विकास में इन श्रम संगठनों ने योगदान दिया जिससे खुश होकर प्रबंधक वर्ग ने इन्हें तोहफा दिया। 
    
इसका माकूल जवाब केवल एक ही है ‘‘प्रबंधक के प्रति चाटुकारिता’’ ये संज्ञा पूरे मिल के श्रमिकों एवं कर्मचारियों के बीच काफी  प्रचलित है। और ये बात पूरे 16 आने सही भी है। क्योंकि पिछले समझौते के समय इन नेताओं ने श्रमिकों के पीठ में छुरा भोंका था। अपने बच्चों की कसमें खायी थीं कि बगैर श्रमिक आबादी के सहमति हम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। लेकिन किया। 
    
एक तरफ भगवान के दर्शन दूसरी तरफ प्रबंधक के चरणों में दर्शन चर्चा तो ये भी है कि कहीं ये आगामी समझौते की पूर्व तैयारी तो नहीं? लाखों का खर्चा बेवजह प्रबंधक वर्ग खर्च तो नहीं करेगा। इस गठजोड़ को आगामी समझौते के लिए एक ‘‘साइलेन्ट एग्रीमेन्ट’’ माना जा रहा है। श्रमिकों को यह बात कौंध रही है कि हमारी वर्कलोड पाॅलिसी पर बात न करके ये नेता अय्याशी कर रहे हैं। विभागीय समस्याओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है और प्रबंधक, यूनियन का नापाक गठजोड़ नये कीर्तिमान रच रहा है। 
    
इसके बाद प्रबंधक वर्ग अपने विदाई समारोह में बालीवुड कलाकारों एवं वर्तमान में राजनेत्री उर्मिला मांतोडकर को बुलाता है और भव्य पार्टी का आयोजन करता है, स्टाफ वर्ग के लिए। 
    
जो कहीं से भी तर्क संगत नहीं लगता है कि प्रबंधक द्वारा लाखों, करोड़ों का बेफजूल का खर्च इन निरर्थक पार्टियों पर किया जाता है। इस सवाल की कसक तो नेताओं को भी रहती है कि ये सब क्यों? लेकिन पूछने वाले तो पहले ही भ्रमण कर आये हैं तो किस मुंह से पूछे ये सवाल। कहावत है कि हमाम में सब नंगे हैं, यह बात यहां चरितार्थ तो रही है। 
    
इन सबसे इतर बात है कि सेन्चुरी मिल ही नहीं पूरे देश की श्रमिक आबादी के ऊपर खतरा शुरू हो चुका है कि न्यू लेबर कोड लागू हो चुके हैं जिसका असर दिखना शुरू हो चुका है और मिल में कार्यरत छः श्रम संगठन केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़ी या सम्बद्ध है, उन्होंने कोई भी प्रतिरोध इन काले कानूनों का नहीं किया। 
    
एक महत्वपूर्ण बात और है कि नया मालिकाना आई टी सी लिमिटेड का बन रहा है। जब न्यू लेबर कोड केन्द्र सरकार लाई थी तो उस समय उद्योगपतियों के प्रमुख संगठन सी आई आई (भारतीय उद्योग परिसंघ) ने इसका स्वागत किया था। उसके इस समय के अध्यक्ष, अभी के आई टी सी लिमिटेड के चेयरमैन हैं। इसी से अंदाजा लगाना काफी है कि भविष्य कैसा होने वाला है। 
        -एक मजदूर, लालकुंआ

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