आम हड़ताल पर विरोध प्रदर्शन और सभायें

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केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा मोदी सरकार की मजदूर-मेहनतकश जन विरोधी नीतियों के विरोध में 9 जुलाई को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया था। संघर्षशील मजदूर संगठनों के देशव्यापी मंच मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने भी इसका समर्थन करते हुये मजदूरों से बढ़कर इस हड़ताल में शामिल होने एवं एक दिनी अनुष्ठान से आगे बढ़कर इसे मजदूरों की वास्तविक हड़ताल और पूंजीवादी व्यवस्था के विरुद्ध निरंतर जुझारू संघर्ष में तब्दील करने का आह्वान किया था। इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने भी मजदूरों की इस आम हड़ताल को अपना समर्थन देते हुये मजदूर-किसान एकता के नारे को बुलंद किया था। हड़ताल के दौरान जगह-जगह जुलूस-प्रदर्शन, सभा, पुतला दहन, ज्ञापन इत्यादि कार्यवाहियों के दौरान मजदूर विरोधी नये लेबर कोड्स, सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण, ठेका प्रथा, देश की खेती-किसानी को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने वाली नीतियों, भयंकर रूप ले चुकी बेरोजगारी, धर्म-जाति-भाषा-क्षेत्र के आधार पर लोगों को बांटने की साजिशों इत्यादि का पुरजोर विरोध किया गया; और, युद्ध नहीं शांति चाहिये व दुनिया के मजदूरों एक हो! जैसे नारे बुलंद किये गये। विरोध प्रदर्शनों में संगठित-असंगठित-कृषि मजदूरों ने भागीदारी की। स्कीम वर्कर्स की भागीदारी सर्वाधिक रही।
    
गुड़गांव में इस मौके पर कमला नेहरू पार्क में विशाल सभा का आयोजन किया गया जिसमें मोदी सरकार की नीतियों को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हितों को आगे बढ़ाने वाली और आर एस एस-भाजपा की राजनीति को समाज के लिये विघटनकारी बताया गया।
    
दिल्ली में आम हड़ताल पर जन अभियान -दिल्ली के बैनर तले जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया एवं अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार को प्रेषित किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने नये लेबर कोड्स, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, देश के प्राकृतिक संसाधनों की पूंजीवादी लूट, मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और दिल्ली सहित देश भर में मजदूरों-मेहनतकशों की बस्तियों पर चल रहे बुल्डोजर की कड़ी निंदा की और मोदी सरकार को फासीवादी सरकार बताया।
    
फरीदाबाद में आम हड़ताल के दिन इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा जुलूस निकालकर लघु सचिवालय पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने मजदूरों को देश पर आसन्न फासीवादी खतरे के प्रति आगाह किया और मोदी सरकार के हमलों के विरुद्ध एक वर्ग के रूप में एकजुट होने का आह्वान किया।
    
कुरुक्षेत्र में 9 जुलाई को जन संघर्ष मंच, मनरेगा मजदूर यूनियन, निर्माण कार्य मजदूर-मिस्त्री यूनियन, आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन इत्यादि ने नये बस स्टैंड से उपायुक्त कार्यालय तक जुलूस निकाला और वहां चल रहे कर्मचारियों के धरने पर शामिल हुये तथा राष्ट्रपति और हरियाणा के मुख्यमंत्री को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन पेश किये। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार एक ओर पूंजीपतियों के मुनाफों को बढ़ाने के लिये नये लेबर कोड्स ला रही है तो वहीं दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों को धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांट रही है।
    
करनाल में 9 जुलाई को जन संघर्ष मंच एवं मनरेगा मजदूर यूनियन द्वारा जिला सचिवालय के समक्ष धरना दिया गया, तदुपरान्त संयुक्त विरोध प्रदर्शन में भागीदारी की गई। इस दौरान वक्ताओं ने नये लेबर कोड्स को मजदूरों के कानूनी अधिकारों पर घोर हमला बताया।
    
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, शामली, सहारनपुर और बडौत में आम हड़ताल पर मजदूर संघर्ष संगठन ने विरोध प्रदर्शन के साथ अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को प्रेषित किये। जिसमें नये लेबर कोड्स, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण, सामाजिक सुरक्षा के खात्मे एवं नये आपराधिक कानूनों को देश की मेहनतकश जनता पर घातक हमला बताया गया।
    
हरिद्वार में 9 जुलाई को संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा द्वारा चिन्मय डिग्री कालेज पर सभा कर जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकाली गई। इस मौके पर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित किये गये। सभा में वक्ताओं ने न्यूनतम वेतन 30 हजार रु. प्रतिमाह किये जाने की मांग की एवं रात की पाली में महिला मजदूरों से काम कराने के कानून का पुरजोर विरोध किया।
    
काशीपुर में इस मौके पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा सभा कर क्षत्री चौराहे पर मोदी सरकार का पुतला फूंका गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध किया और बढ़ती महंगाई के प्रति अपने आक्रोश को जाहिर किया। 
    
रामनगर में आम हड़ताल के मौके पर प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के आह्वान पर क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों की भोजनमाताओं द्वारा कार्य बहिष्कार कर व्यापार मंडल कार्यालय से उपजिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाला गया और खंड शिक्षा अधिकारी व उपजिलाधिकारी के माध्यम से अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया। ज्ञापन में भोजनमाताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा एवं न्यूनतम वेतन दिये जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
    
रामनगर के ही मालधन में भी प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के आह्वान पर क्षेत्र के स्कूलों की भोजनमाताओं ने कार्य बहिष्कार कर आम हड़ताल में भागीदारी की। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार बेहद मामूली मानदेय पर भोजनमाताओं से बेगारी करा रही है।
    
हल्द्वानी में 9 जुलाई को बुद्ध पार्क में विशाल सभा का आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं ने उत्तराखंड में कलस्टर के नाम पर सैंकड़ों स्कूलों को बंद करने की सरकार की योजना का भारी विरोध किया।
    
नैनीताल में 9 जुलाई को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा तल्लीताल पर सभा कर कमिश्नरी तक जुलूस निकाला गया एवं कुमाऊं कमिश्नर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर भोजनमाताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिये जाने की मांग की।
    
रुद्रपुर में आम हड़ताल पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले गल्ला मंडी में धरना एवं सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने नये लेबर कोड्स को तत्काल रद्द करने की मांग की। इसके अलावा उत्तराखंड में कलस्टर के नाम पर भारी संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना को मजदूर-मेहनतकश जनता के बच्चों से शिक्षा छीनने का षड़यंत्र बताया। 
    
पंजाब के लुधियाना में 9 जुलाई को समराला चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार, पंजाब की भगवंत मान सरकार समेत विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा देशी-विदेशी पूंजीपतियों के पक्ष में लागू की जा रही नीतियों ने मजदूर-मेहनतकश जनता की हालत बद से बदतर बना दी है।
    
बरेली में 9 जुलाई को बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन के बैनर तले सभा का आयोजन किया गया जिसमें सत्ता पर काबिज फासीवादी ताकतों और एकाधिकारी पूंजीपतियों के गठजोड़ को देश की मजदूर-मेहनतकश जनता का सबसे बड़ा दुश्मन बताया गया। 
    
मऊ में आम हड़ताल के मौके पर कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला एवं सभा की गई। तदुपरान्त सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया। 
    
बिहार के पटना में आम हड़ताल पर बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन द्वारा बुद्धा स्मृति पार्क पर आम सभा कर डाक बंगला चौराहे तक मार्च निकाला। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने बिहार में वोटर लिस्ट के पुनर्निरीक्षण के नाम पर साधनहीन जनता को परेशान करने और मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश का सख्त विरोध किया। 
    
इसके अलावा बिहार के ही सासाराम में आम हड़ताल के दिन ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा विरोध प्रदर्शन के साथ पुरानी जी टी रोड को बंद कर हड़ताल में भागीदारी की गई।
    
कर्नाटक में आम हड़ताल पर कर्नाटक श्रमिक शक्ति ने बैंगलोर में संयुक्त विरोध प्रदर्शन में भागीदारी की। इसके अलावा मांड्या, चित्रदुर्ग, दावनगेरे, चिकमंगलूर, रायचूर, कोपल्ला आदि जिलों में हुये प्रदर्शनों में भी सक्रिय रूप से भागीदारी की।              -विशेष संवाददाता
 

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