कांवड़ यात्रा और धर्म के ठेकेदार

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कांवड़ यात्रा शुरू होते ही हिन्दू धर्म के संघी लम्पट ठेकेदारों को भी रोजगार मिल जाता है। रोजगार समाज में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का, गुंडागर्दी करने का, मारपीट करने का, तोड़-फोड़ मचाने का, जबरदस्ती मीट की दुकानें बंद कराने का। ऐसे ही धर्म के ठेकेदारों में एक स्वामी यशवीर महाराज है जो कांवड़ यात्रा शुरू होते ही हर साल चर्चाओं में आ जाता है। 
    
2023 में कांवड़ यात्रा के पहले ही इन महाशय ने कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले ढाबे, होटल, ठेले पर नेम प्लेट लगाने का आदेश दिया। जिसके बाद यू पी के मुख्यमंत्री ने इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया और फिर कुछेक अन्य राज्यों में भी यही आदेश लागू कर दिया गया। लेकिन जब इसकी शिकायत न्यायालय तक पहुंची तब न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। हालांकि व्यवहार में वही हुआ जो धर्म के ठेकेदार चाहते थे।
    
इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही इन महाशय ने अपने 5 हजार अंधभक्तों को सड़कों पर उतर दिया। जिनका काम कांवड़ मार्ग में पड़ने वाले ढाबों, होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा मालिकों के धर्म का पता लगाना था व हिन्दू कारीगरों-मालिकों की दुकानों पर भगवा झण्डा लगाना था। ताकि कांवड़ ले जाने वाले लोग इन ढाबों पर खाना खाएं। इन महाशय का मानना है कि मुसलमान के होटल में खाना, पानी या कुछ भी सामान लेने से कांवड़ियों का धर्म भ्रष्ट हो जाता है जो वह हरगिज नहीं होने देंगे। इसलिए उनके 5 हजार कर्मचारी हर जगह जाकर वहां काम करने वालों के आधार कार्ड चेक कर रहे हैं। अगर इससे भी मन नहीं भर रहा है तो कर्मचारियों की पैंट उतरवाकर चेक कर रहे हैं कि हिन्दू है या मुस्लिम। ऐसे जबरदस्ती किसी की निजी जानकारी लेने, आधार कार्ड चेक करने का काम सरकार या पुलिस करती रही है लेकिन अब ये धर्म के ठेकेदार कर रहे हैं जिन पर कोई रोक-टोक नहीं है। 
    
अब जब प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्रियों तक, नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक, धर्म गुरुओं से लेकर बाबाओं तक सब एक ही भाषा में कांवड़ यात्रा को महान कार्य घोषित कर देंगे, कावड़ियों पर फूल बरसाए जाएंगे, उत्पात मचाने वालों को संरक्षण दिया जाएगा, तो कांवड़ियों पर उसका असर पड़ेगा ही। हर बीतते साल के साथ कांवड़ यात्रा के दौरान, यात्रियों के साथ मार-पिटाई, गाड़ियों को तोड़ना, गाली-गलौच करना, बड़े-बड़े डीजे बजाते हुए डांस करते हुए रास्ता जाम करना, आम होता जा रहा है। इसकी तमाम झलकियां हरिद्वार से निकलने वाले हर रास्ते पर देखी जा सकती है। 
    
ऐसे ही कई कांवड़ियों को दुकान पर खाने का पैसा न देना पड़े इसके लिए आसान सा आरोप लगा दो कि ढाबे के मालिक ने खाने में मीट या अंडा मिला दिया। अगर वहां कोई मुसलमान काम कर रहा हो तो बस एक बार कहने की देर है उस दुकान को टूटने में व लोगों को उसे पीटने में देर नहीं लगेगी।
    
वैसे इस बार कई जगह पुलिस प्रशासन कांवड़ियों पर कार्यवाही करने की गुस्ताखी कर रहा है। जब हरिद्वार में तय रस्ते पर जाने के बजाय कांवडियों ने हाइवे पर चलने की जिद की और रास्ता जाम कर दिया, गाड़ियों को तोड़ना शुरू किया तब पुलिस ने उन पर कार्यवाही की। ऐसे ही रुड़की में गाड़ियां तोड़ने वाले कांवड़ियों को गिरफ्तार कर लिया, नारसन में (यू पी और उत्तराखंड के बार्डर पर) यशवीर महाराज को आने से रोक दिया, खाने के होटल में तुरंत खाद्य निरीक्षण की टीम को बुला कर मामला शांत कर दिया। लेकिन ये तो कुछ गिने-चुने मामले हैं और इनमें भी कोई ऐसा नहीं है कि कांवड़ियों पर कोई ठोस कार्यवाही की गई हो। बाकी जगह तो खुला खेल फर्रूखाबाद ही चल रहा है।
    
दरअसल सरकार के पास समाज में नागरिकों/नौजवानों को देने के लिए कुछ नहीं है। धार्मिक उन्माद फैलाकर सरकार नौजवानों का ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार से हटा कर धर्म की रक्षा, पाप धोने और समाज में नफरत का माहौल बनाने में लगा रही है। यूपी में ही 5 हजार से 27 हजार स्कूलों को विलयीकरण या बंद  कर रही है। यूपी में इसके खिलाफ बहुत विरोध चल रहा है। लेकिन योगी सरकार इस तरह के मुद्दे उठाकर लोगों को उन्मादी भीड़ में बदलने का काम कर रही है। और यह केवल यूपी की ही बात नहीं है देश के हर राज्य में किसी न किसी मुद्दे को लेकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है। हर राज्य में ऐसे तमाम धर्म के ठेकेदार हैं जो लोगों को बता रहे हैं कि आपको क्या करना है और क्या नहीं।
 

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