जारी है मजदूर आंदोलन का दमन

Published
Sat, 05/16/2026 - 15:50
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नोएडा में हुए मजदूर आंदोलनों से इतना घबरा गयी है कि वह अब मई दिवस की महान परंपरा को भी नहीं मनाने दे रही है। मई दिवस के शहीदों को याद करने से भी मजदूर संगठनों को रोकने की कोशिश कर रही है। योगी सरकार का यह कदम पूंजीपतियों को खुश करने का भी एक कदम है।  
    
इसी कड़ी में योगी सरकार की बरेली पुलिस ने इंकलाबी मजदूर केंद्र के बरेली शहर सचिव ध्यानचंद्र मौर्य एवं लाल जी कुशवाहा को 30 अप्रैल को शाम 6ः00 बजे डिटेन कर 5 घंटे तक सीबीगंज थाने में रखा। उसके बाद देर रात लगभग 11ः15 बजे से अगले आदेश तक उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया। मई दिवस से ठीक पहले इस तरह से डिटेन करना एवं हाउस अरेस्ट करना देश में चल रहे मजदूर आंदोलनों से पूंजीपति वर्ग एवं उसके प्रशासन के भय को दिखाता है। 
    
इंकलाबी मजदूर केंद्र की बरेली इकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के लिए तैयारी की कड़ी में 30 अप्रैल को शाम 6ः00 बजे से परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में मई दिवस का पर्चा वितरण कर एक छोटा जुलूस निकाला जाना था। लेकिन कार्यक्रम में जाने के दौरान दोनों कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन द्वारा डिटेन कर लिया गया। 
    
गौरतलब है कि देशभर में जारी मजदूरों के आंदोलनों ने सरकारों को सकते में डाल रखा है। मजदूर आज काम के घंटे 8 करने, वेतन को बढ़ाने, सुरक्षा इंतजाम ठीक करने एवं मजदूर विरोधी नई श्रम संहिताओं को रद्द करने जैसी अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। लेकिन पूंजीपतियों की पक्षधर सरकारें मजदूरों की जायज मांगों को मानने के बजाय दमन एवं दुष्प्रचार का सहारा लेकर इन आंदोलनों को कुचलने का प्रयास कर रही हैं। 
    
उत्तर प्रदेश व बरेली के हालात भी देश से अलग नहीं हैं। बरेली में स्थित फैक्टरियों में भी मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न चरम पर है। बरेली जिले में परसाखेड़ा, रजऊ जैसे औद्योगिक क्षेत्र सहित दुकानों, माॅलों में 8 घंटे कार्य दिवस, न्यूनतम वेतनमान जैसे कानून का पालन नहीं हो रहा है। मजदूरों से 8-10 हजार में 12-12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। महिलाओं को इससे भी कम वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में गैरकानूनी श्रम अभ्यास (Unfair Labour Practice) करने वाले मालिकों-प्रबंधकों पर कार्यवाही करने के बजाय बरेली जिला प्रशासन द्वारा मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को ही निशाना बनाया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि मजदूरों की आवाज को ही कुचल दिया जाए। ऐसे में मई दिवस का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। 
    
मजदूर नेताओं को हाउस अरेस्ट करने का कारनामा योगी सरकार ने उ.प्र. की विभिन्न जगहों पर किया। एक्टू के लखनऊ प्रदर्शन को रोकने के लिए कई नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया। 
    
दिनांक 8 मई और 9 मई को हरिद्वार में कैंपस और हेमिल्टन कम्पनी में वेतन वृद्धि के लिए हुए मजदूर आंदोलन में शामिल इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं और मजदूरों पर हरिद्वार पुलिस ने इन कंपनियों के साथ षड्यंत्र के तहत फर्जी मुकदमे कायम कर दिये हैं। 
    
अप्रैल माह में जब मानेसर-नोएडा में वेतन वृद्धि का संघर्ष शुरू हुआ तो हजारों की संख्या में मजदूर सड़क पर उतर आये। मजदूर न केवल न्यूनतम वेतन को लागू करने बल्कि न्यूनतम वेतनमान में वृद्धि की भी मांग कर रहे थे। मजदूर आंदोलनों के संघर्ष की तपिश सरकारें बर्दाश्त नहीं कर पायीं और उन्हें मजदूरों के वेतनमान में मामूली सी घोषणा करनी पड़ी। लेकिन साथ ही उन्होंने मजदूरों का दमन भी किया। कई मजदूर नेताओं और हजारों मजदूरों को जेल में डाल दिया गया। अभी भी कई मजदूर और मजदूर नेता जेल में हत्या के प्रयास में जेल में बंद हैं। कुछ पर रासुका भी लगा दी गयी है।         

हरियाणा और योगी सरकार की तर्ज पर ठीक ऐसा ही व्यवहार अब उत्तराखंड की धामी सरकार कर रही है। उसने इंकलाबी मजदूर केंद्र व प्रगतिशील महिला एकत केन्द्र के कार्यकर्ताओं समेत समेत 22 लोगों पर दो मुकदमे दर्ज कर दिये हैं। पहला मुकदमा हैमिल्टन कंपनी के एच आर मैनेजर की तहरीर पर दफा 126(2), 190, 191(2), 52, 53 के तहत व दूसरा मुकदमा कैम्पस एक्सिवीयर के एच आर मैनेजर की तहरीर पर इन्हीं धाराओं में दर्ज किया गया है। 
    
लेकिन पूंजीपति वर्ग और उसकी सरकारें बार-बार यह भूल जाती हैं कि दमन से कभी मजदूर आंदोलन नहीं थमे हैं। वे कुछ मजदूर नेताओं और मजदूरों को जेल में डाल सकते हैं, मई दिवस के शहीदों की तरह फांसी पर लटका सकते हैं लेकिन एक वर्ग के बतौर मजदूर वर्ग अजेय है। मजदूर वर्ग हर दमन के बाद और बड़ी संख्या में मजदूरों को बलिदान के लिए तैयार करता है। 
        -विशेष संवाददाता

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