राजस्थान गिग बिल : मजदूरों की भलाई के नाम पर नौटंकी
बीते दिनों राजस्थान सरकार ने प्लेटफार्म आधारित गिग मजदूरों के कल्याण के नाम पर एक बिल पारित किया। इसे ‘प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण व वेलफेयर) बिल 2023’ नाम दिय
बीते दिनों राजस्थान सरकार ने प्लेटफार्म आधारित गिग मजदूरों के कल्याण के नाम पर एक बिल पारित किया। इसे ‘प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण व वेलफेयर) बिल 2023’ नाम दिय
श्रम ब्यूरो के उद्योगों के सालाना सर्वे (SSI) के आंकड़ों के मुताबिक संगठित क्षेत्र की सभी फैक्टरियों ने ठेके पर कर्मचारी रखने शुरू कर दिए हैं। इससे देश में श्रम बल को ठेके
देहरादून/ प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड नैनीताल के बैनर तले भोजनमाताओं ने राजधानी देहरादून में विशाल प्रदर्शन कर भयंकर शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज बु
अपनी न्यायपूर्ण एवं कानून सम्मत मांगों के साथ लंबे समय से संघर्ष कर रहे बेलसोनिका के मजदूर अंततः प्रबंधन की हठधर्मिता एवं श्रम विभाग व प्रशासन के अधिकारियों के मजदूर विरोधी रुख के कारण हड़ताल पर जान
गुड़गांव, आईएमटी मानेसर/ बेलसोनिका प्रबंधन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर बेलसोनिका यूनियन का संघर्ष लगातार जारी है। बेलसोनिका मजदूर दिनांक 4 मई 2023 से कंपनी गेट के बाहर बेलसोनिका यू
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के कर्मचारियों का 15 दिन लंबा धरना चला था। इस धरने में इंजीनियर से लेकर मजदूर तक सब शामिल थे। इसमें स्थायी कर्मचारी से लेकर संविदा/निविदा पर काम करने वाले क
रुद्रपुर/ विगत 15 दिसंबर 2022 को जिला प्रशासन व श्रम विभाग की मध्यस्थता में इंटरार्क कंपनी प्रबंधन एवं यूनियन के मध्य लिखित समझौता संपन्न हुआ। और इंटरार्क की सिडकुल पंतनगर एवं किच्
गुड़गांव/ बेलसोनिका प्रबंधन ने दिनांक 21 अप्रैल 2023 को 11 और मजदूरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। बेलसोनिका प्रबंधन फर्जी दस्तावेजों के नाम पर अब तक 17 मजदूरों को नौकरी से बर्ख
तमिलनाडु की सरकार द्वारा 21 अप्रैल को विधानसभा में तमिलनाडु (तमिलनाडु संशोधन) 2023 विधेयक पेश किया गया था। इस विधेयक के द्वारा कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन होगा और 12 घंटे के कार्यदिवस का नि
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।