मुख्य न्यायाधीश की गणेश पूजा में मोदी जी

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश देश के सबसे प्रमुख संवैधानिक पद ही नहीं बल्कि इस बात के द्योतक हैं कि इन पदों पर बैठे लोगों का आचरण ऐसा होगा कि वह देशवासियों के लिए अनुकरणीय होगा। ऐसा सोचना व कल्पना करना शायद पहले तब भी संभव होता परन्तु अब तो इसकी कल्पना करना भी संभव नहीं है। 
    
धर्म किसी भी व्यक्ति का निजी मामला है और ठीक इसी तरह से जब वह अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार पूजा-अर्चना कर रहा होगा तो वह उसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करेगा। सार्वजनिक प्रदर्शन का अर्थ ही है कि वह व्यक्ति अपने परलोक की नहीं बल्कि इहलोक की चिंता कर रहा है। और चाहता है कि उसके धार्मिक प्रदर्शन को आधार बनाकर माना जाए कि वह बहुत ही धार्मिक, नेक आदमी है। और अगर कोई उसके बारे में, उसके द्वारा किये गये कार्यों अथवा उसके द्वारा लिये गये फैसलों पर सवाल उठाता है तो वह सीधे धर्म पर, उसके आराध्य देव पर सवाल उठा रहा है। इस तरह धार्मिक कर्मकाण्डों का प्रदर्शन एक दैवीय आवरण का काम करता है जिसकी आड़ में कुछ भी किया जा सकता है। उल्टा, ‘कुछ भी किये जाओ उसे धर्म के आवरण में छुपाये जाओ’।
    
आखिर मुख्य न्यायाधीश को क्या आवश्यकता है कि वह अपने धार्मिक विश्वास व कर्मकाण्ड का प्रदर्शन करें? और मोदी जी को क्या आवश्यकता है कि वह गर चन्द्रचूड के घर गणेश पूजा में शामिल हुए हैं तो वह अपनी तस्वीर को प्रचारित-प्रसारित करें। वे ऐसा कर के क्या हासिल करना चाहते हैं। क्या वे यह साबित करना चाहते हैं कि वे आपस में मौसेरे भाई हैं। उनके बीच अंतरविरोध ढूंढने वाले नहीं जानते कि वे आपस में किस रिश्ते में बंधे हैं। 

सम्बन्धित लेख

छिपा हुआ संघी

 

आलेख

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?