इस बार मजदूर आंदोलन की नई लहर और पुलिसिया दमन के साये के बीच जोश और गुस्से-आक्रोश के साथ मई दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा न्यूनतम वेतन 30 हजार रु. प्रतिमाह करने, 4 नये लेबर कोड रद्द करने एवं गुड़गांव-मानेसर व नोएडा से गिरफ्तार सभी मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने की मांगें देशव्यापी रूप से उठाई गईं।
गौरतलब है कि अप्रैल माह में देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन बढ़ोत्तरी की मांग के साथ मजदूरों के स्वतः स्फूर्त उभार ने जहां सरकारों को सकते में डाल दिया, वहीं मजदूरों ने भी अपनी ताकत को पहचाना। मजदूरों के इस वर्गीय उभार, जो कि अभी भी जारी है, के परिणामस्वरूप हरियाणा सरकार को न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को 20 प्रतिशत से कुछ अधिक की वृद्धि करनी पड़ी।
लेकिन, साथ ही, हरियाणा के गुड़गांव-मानेसर और उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों का भारी दमन भी किया गया। मानेसर में शांतिपूर्ण रूप से जारी मजदूरों के आंदोलन में फैक्टरी प्रबंधकों ने भाड़े के गुड़ों की मदद से अराजकता पैदा की और फिर पुलिस ने मजदूरों पर भारी लाठीचार्ज किया। पुलिस ने 56 मजदूरों, जिनमें 20 महिला मजदूर हैं, को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया साथ ही, आंदोलन में सक्रिय मासा के घटक संगठन इंकलाबी मजदूर केंद्र के 6 कार्यकर्ताओं को 12 अप्रैल की देर रात अगुवा कर लिया गया। बाद में, 13 अप्रैल को PUDR (पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स) के साथियों के दवाब में पुलिस को न सिर्फ कार्यकर्ताओं को किस थाने में रखा गया है यह बताना पड़ा, अपितु उसी दिन शाम को उन्हें कोर्ट में भी पेश करना पड़ा। पुलिस द्वारा इमके कार्यकर्ताओं पर फर्जी और गैर जमानती धाराओं में मुकदमे दर्ज किये गये हैं। इसी तरह नोएडा में भी फैक्टरी प्रबंधकों से जुड़े लोगों के साथ पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से आंदोलन में अराजकता पैदा की गई और मजदूरों का भारी दमन और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं। यहां भी कुछ मजदूर कार्यकर्ताओं पर फर्जी और गैर जमानती धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया गया। पुलिस द्वारा गुड़गांव-मानेसर और नोएडा, दोनों ही जगहों से गिरफ्तार मजदूर कार्यकर्ताओं को साजिशकर्ता के रूप में पेश कर मीडिया ट्रायल भी चलवाया गया और इस तरह मजदूर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें की गईं।
मजदूर आंदोलन और मजदूर कार्यकर्ताओं के इस दमन का आज चैतरफा विरोध हो रहा है। न सिर्फ मजदूर संगठन, अपितु संयुक्त किसान मोर्चा भी, एवं महिला व छात्र-युवा संगठन, जनवादी संगठन तथा बुद्धिजीवी, कलाकार, पत्रकार और वकील भी इस दमन चक्र का खुलकर विरोध कर रहे हैं। मजदूरों खासकर ठेका मजदूरों का अमानवीय शोषण पूरे देश में मुद्दा बन गया है।
मासा द्वारा इसी दमन पर केंद्रित कर देशव्यापी स्तर पर मई दिवस मनाये जाने का आह्वान किया गया था। इसके तहत घटक संगठनों- सेंटर फार स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (CSTU), इंकलाबी मजदूर केंद्र, जनसंघर्ष मंच (हरियाणा), मजदूर संघर्ष संगठन, ग्रामीण मजदूर यूनियन (बिहार), बिहार निर्माण एवं असंगठित मजदूर यूनियन, लाल झंडा मजदूर यूनियन (LJMU), कर्नाटक श्रमिक शक्ति इत्यादि ने बढ़कर उत्तर एवं दक्षिण भारत में विभिन्न जगहों पर मई दिवस के कार्यक्रमों को आयोजित कर मई दिवस के अमर शहीदों- अल्बर्ट पार्सन्स, आगस्त स्पाइस, जार्ज एंजेल और एडोल्फ फिशर को श्रद्धांजलि अर्पित की। मजदूर आंदोलन की गौरवशाली विरासत तथा वर्तमान हालातों पर विस्तार से चर्चा की। मजदूर आंदोलन के दमन का पुरजोर विरोध किया। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा भी मजदूरों की वर्गीय ताकत से घबराकर इस मई दिवस पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष तौर पर अलर्ट किये जाने ने भी, इस बार मई दिवस को खास बना दिया।
दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा मई दिवस की सभा का आयोजन किया गया।
फरीदाबाद में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा सेक्टर-24 के औद्योगिक क्षेत्र में मई दिवस की सभा का आयोजन किया गया तदुपरांत जुलूस भी निकाला गया। कार्यक्रम में फरीदाबाद के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।
गुड़गांव में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा मजदूर बस्ती सूरत नगर में मई दिवस की सभा आयोजित की गई।
जिला कैथल, हरियाणा में जनसंघर्ष मंच (हरियाणा), मनरेगा मजदूर यूनियन एवं निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन ने संयुक्त रूप से अम्बेडकर भवन में मई दिवस की सभा की तदुपरांत प्रदर्शन आयोजित किया।
कुरुक्षेत्र में जनसंघर्ष मंच (हरियाणा) मनरेगा मजदूर यूनियन और निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन द्वारा शहर के लेबर चैकों पर मई दिवस की सभायें की गईं।
गोहाना में जनसंघर्ष मंच (हरियाणा) एवं निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन द्वारा ब्रह्म भवन में मई दिवस की सभा की गई।
मेरठ के शेखपुरा में मजदूर संघर्ष संगठन द्वारा मई दिवस पर सभा का आयोजन किया गया।
हरिद्वार में मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले मई दिवस की सभा आयोजित की गई।
काशीपुर में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा मजदूर बस्ती हिम्मतपुर में मई दिवस की सभा का आयोजन किया गया।
रामनगर में मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले शहीद पार्क में मई दिवस की सभा का आयोजन किया गया तदुपरांत शहर में जुलूस निकाला गया। इसके अलावा रामनगर में ही समाजवादी लोक मंच द्वारा झंडारोहण का कार्यक्रम किया गया।
रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सिडकुल चैक पर मई दिवस की सभा की गई।
पंतनगर में इंकलाबी मजदूर केंद्र और ठेका मजदूर कल्याण समिति द्वारा यूनियन हाल में मई दिवस की सभा की गई।
लालकुआं में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा गांधी पार्क में मई दिवस की सभा की गई।
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले मई दिवस की सभा आयोजित की गई।
बरेली में इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव डी सी मौर्य एवं लालजी कुशवाहा को मई दिवस की पूर्व संध्या पर ही पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया और 5 घंटे सीबीगंज थाने में बैठा कर रखने के बाद उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया। उनके घर के आगे पुलिस तैनात कर डर-आतंक कायम करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत दामोदर स्वरूप पार्क में मई दिवस की सभा का आयोजन किया गया। तदुपरांत सभी अम्बेडकर पार्क में बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन द्वारा आयोजित मई दिवस की सभा में शामिल हुये। मजदूर आंदोलन से डरी योगी सरकार की पुलिस ने मई दिवस का जुलूस नहीं निकालने दिया।
मऊ में जिला श्रमिक समन्वय समिति के बैनर तले मई दिवस के जुलूस एवं सभा का आयोजन किया गया।
बलिया में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा रसड़ा तहसील मुख्यालय तक जुलूस निकालकर मई दिवस की सभा की गई।
जिला रोहतास, बिहार में ग्रामीण मजदूर यूनियन (बिहार), इंकलाबी निर्माण कामगार यूनियन और प्रगतिशील महिला मंच ने संयुक्त रूप से मई दिवस की सभा की और जुलूस निकाला।
पटना में बिहार निर्माण और असंगठित मजदूर यूनियन ने पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी पटना में तीन जगहों पर मई दिवस की सभा आयोजित की।
कोलकाता के जादवपुर में सेंटर फार स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (CSTU) द्वारा मई दिवस की सभा आयोजित की गई। होजरी यूनियन द्वारा भी कोलकाता में मई दिवस मनाया गया। इसके अलावा हावड़ा के फुलेश्वर में भी मई दिवस की रैली निकाली गई एवं श्रमिक आंदोलन की आज की स्थिति पर चर्चा की गई।
दार्जिलिंग में हिल प्लांटेशन एम्प्लोयीज यूनियन (HPEU) द्वारा मई दिवस मनाया गया।
लुधियाना, पंजाब में कारखाना मजदूर यूनियन और टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन द्वारा नौजवान भारत सभा के सहयोग से ‘मजदूर दिवस सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुक्ति संग्राम मजदूर मंच और पंजाब स्टूडेंट यूनियन (ललकार) से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी की। -विशेष संवाददाता