सैमसंग के मज़दूरों की हड़ताल समाप्त

/samsung-ke-majadooron-ki-hadataal-samaapt

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में श्रीपेरम्दुर में 9 सितम्बर से जारी सैमसंग के मज़दूरों की हड़ताल 16 अक्टूबर को उनकी मांगों पर बातचीत जारी रहने के आश्वासन के बाद समाप्त हो गयी। हालांकि यूनियन को मान्यता देने पर कम्पनी अभी कोई बात नहीं करेगी। मज़दूर 17 अक्टूबर से अपने काम पर वापिस लौट जाएंगे।

इस हड़ताल का नेतृत्व सी पी एम का ट्रेड यूनियन सेंटर सीटू कर रहा था। हड़ताल को समाप्त करते हुए सीटू के नेतृत्व ने कहा कि हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया गया है क्योंकि सैमसंग प्रबंधन उच्च वेतन, चिकित्सा बीमा और अन्य सुविधाओं पर बातचीत करने को तैयार है। यूनियन (सैमसंग इंडिया लेबर वेलफेयर यूनियन) पंजीकरण का मुद्दा अदालत से तय होगा।

ज्ञात हो कि सैमसंग के 1500 से ज्यादा मज़दूर अपनी यूनियन को मान्यता देने और वेतन सहित अन्य मांगों के लिए 9 सितम्बर से हड़ताल पर चले गये थे। बाद में कुछ मज़दूर काम पर वापिस लौट गये। फिलहाल 1000 मज़दूर हड़ताल पर डटे थे।

इसे भी पढ़ें :-

1. सैमसंग मज़दूरों की हड़ताल दूसरे महीने भी जारी

https://enagrik.com/samsung-majadooron-ki-hadataal-dusare...

2. सैमसंग इलेक्ट्रानिक्स के मजदूरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

https://enagrik.com/samsung-elecatronics-ke-majadooron-ki...

नागरिक अखबार के :-

telegram channel से जुड़ें👇

https://t.me/nagrikakhbaar

you tube से जुड़ें :-👇

https://youtube.com/@nagrikakhbaar?si=nyIP0v64mNo5z1S0

Facebook से जुड़ें :- 👇

https://www.facebook.com/nagriknews1998?mibextid=ज़बवकवल

Twitter से जुड़ें :-👇

https://x.com/nagriknews1998?t=9xIfh6rSQ6Iuz4ABNS79Rg&s=09

Instagram से जुड़ें :-👇https://www.instagram.com/invites/contact/...

website से जुड़ें :-👇

enagrik.com

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?