कांवड़ यात्रा और कांवड़िये
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही जगह 2017 से भाजपा की सरकारें हैं। उत्तर भारत में हर साल जुलाई-अगस्त (सावन) के महीने में कांवड यात्रा शुरू होती है। इस यात्रा में कांवड़ि
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही जगह 2017 से भाजपा की सरकारें हैं। उत्तर भारत में हर साल जुलाई-अगस्त (सावन) के महीने में कांवड यात्रा शुरू होती है। इस यात्रा में कांवड़ि
‘वंदे मातरम’ एक बार फिर से चर्चा में है। मोदी सरकार और संघ के लिए राष्ट्र गीत और नारा भी उसी तरह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथियार है जैसे राम। राम के नाम पर लूट-खसोट मचाने
घोटाले कई तरह के होते हैं। ‘आर्थिक घोटाला’, ‘राजनैतिक घोटाला’, ‘न्यायिक घोटाला’, ‘प्रशासनिक घोटाला’, ‘बौद्धिक घोटाला’, ‘साहित्यिक घोटाला’ वगैरह, वगैरह। क्या कोई ये सब घोट
पिछले कुछ दशकों से, ‘इंडियन नालेज सिस्टम’ (IKS) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत के अपने बौ
कहते हैं कि रामराज्य में एक धोबी के सवाल पर भी राजा राम ने जवाब दिया था। लेकिन कलियुग के इस नए रामराज्य में करोड़ों भक्त सवाल पूछ रहे हैं और जवाब में उन्हें टीवी डिबेट, प्
हमारे देश में धर्म, राष्ट्रवाद, नैतिकता, संस्कृति, संस्कार आदि के दो सबसे बड़े ठेकेदार हैं। एक श्रीमान मोदी जी हैं जो देश की सरकार चलाते हैं और अपनी पार्टी के अघोषित सर्वे
अब तो मुसलमान होना ही काफी है बिना कोई नोटिस बिना कोई सूचना बस बुलडोजर लाओ और घरों को तोड़ दो। गुजरात के सूरत शहर स्थित नासिर नगर क्षेत्र में 30 मई से 2 जून तक बड़े पैमाने
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।
उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या ने हमारे समाज में मौजूद जाति के कोढ़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। टिहरी के देवल गांव के 18 वर्षीय केतन
हाल के दिनों में हरिद्वार में कुछ दक्षिणपंथी और धार्मिक संगठनों (अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, परशुराम अखाड़ा आदि) ने ‘वेज बिरयानी’ नाम के खिलाफ अभियान चलाया है। दुकानों और ठेल
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?