नये लेबर कोड्स के विरुद्ध सेमिनारों का आयोजन
इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 26 जनवरीः गणतंत्र दिवस के अवसर पर नये लेबर कोड्स पर दिल्ली-एनसीआर, गढ़वाल (हरिद्वार), कुमाऊं (काशीपुर) उत्तर प्रदेश (बरेली) एवं पूर्वांचल (मऊ-ब
इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 26 जनवरीः गणतंत्र दिवस के अवसर पर नये लेबर कोड्स पर दिल्ली-एनसीआर, गढ़वाल (हरिद्वार), कुमाऊं (काशीपुर) उत्तर प्रदेश (बरेली) एवं पूर्वांचल (मऊ-ब
बदायूं/ दिनांक 29 जनवरी 2026 को जनहित सत्याग्रह मोर्चा और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकार
मऊ में 16 जनवरी को राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बिजली बिल 2025, मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं, वी बी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन
दिल्ली/ मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स एवं किसान विरोधी-जन विरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा आहूत देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के
वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबार
उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं लंबे समय से न्यूनतम वेतन व स्थाई रोजगार के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुनी कर रही है। इसलिए प
रुद्रपुर/ रुद्रपुर नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को खेड़ा बस्ती स्थित ईदगाह के मैदान पर अन्यायपूर्ण तरीके से कब्जा कर लिया गया। नगर निगम द्वारा
अंकिता भण्डारी प्रकरण में संलिप्त वी आई पी का नाम सामने आने के बाद से समूचे उत्तराखण्ड में जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदेश की जनता, विभिन्न क्रांतिकारी-जनवादी संगठन, कांग्रे
गुडगांव/ दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेलसोनिका यूनियन ने 4 घोर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स पर गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार की शुरुआत क्रांतिकारी
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।