रिपोर्ट

गिरफ्तार मजदूरों व मजदूर नेताओं को रिहा करो!

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....विगत 2 अप्रैल से गुड़गांव के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में होंडा कंपनी के ठेका मजदूरों से शुरू हुई मजदूरों की स्वतः स्फूर्त हड़तालें और प्रदर्शन मानेसर की अनेकों कंपनियों

शहीद दिवस पर पदयात्रा

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पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल को पंतनगर गोलीकांड व जलियांवाला बाग कांड की स्मृति में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, प्रगतिशील महिला

एस आई आर के विरोध में सेमिनार

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क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड को याद करते हुए 12 अप्रैल को हल्द्वानी, मऊ, हरिद्वार, बरेली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सेमिनार आयोजित क

विद्युत संविदा कर्मचारियों का सम्मेलन सम्पन्न

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लखनऊ/ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का चतुर्थ द्विवार्षिक सम्मेलन 4-5 अप्रैल 2026 को गांधी भवन प्रेक्षागृह कैसर बाग लखनऊ में आयो

पेरिस कम्यून दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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18 मार्च, 1871 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में मजदूरों ने अपना पहला राज कायम किया था, जो कि मानव इतिहास के गौरवशाली पन्नों में ‘‘पेरिस कम्यून’’ के नाम से दर्ज है। फ्रांस औ

युद्ध विरोधी नारों के साथ मनाया गया शहादत दिवस

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इस बार भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहादत दिवस युद्ध की गूंज के बीच साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया। 22 व 23 मार्च को विचार गोष्ठी, युद्ध विरोधी सभा, साम्र

बनभूलपुरा को उजाड़ने से बचाने की मांग

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हल्द्वानी/ विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री को बनभूलपुरा की जनता के आवास की रक्ष

अब शहीदों की प्रतिमाओं से भी इन्हें डर लगने लगा है

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23 मार्च 2026 को जबकि भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस पर लोग उन्हें याद कर रहे थे, उसी रात तड़के 3 बजे भाजपा सरकार द्वारा शाहजहांपुर में नगर निगम के पास 1972 में

न्यूनतम वेतनमान को लेकर हरियाणा सरकार की नौटंकी

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11 साल से अधिक समय से हरियाणा राज्य में न्यूनतम वेतनमान पुनर्निधारित (रिवाइज) नहीं हुआ है। हर 5 साल में न्यूनतम वेतनमान रिवाइज करने का नियम है। महंगाई के सापेक्ष जरूरत की

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?