बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ सेमिनार
हल्द्वानी/ दिनांक 30 नवंबर 2025 को समाज में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार हल्द्वानी के सत्यन
हल्द्वानी/ दिनांक 30 नवंबर 2025 को समाज में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार हल्द्वानी के सत्यन
हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल
देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये
हल्द्वानी/ विगत 16 नवम्बर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के उजाला नगर में मंदिर के पास बछड़े का सिर मिलने की खबर फैली। खबर फैलते ही इसे साम्प्रदाय
महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति ने मानव इतिहास में एक नये युग की शुरुआत की थी। महान लेनिन और बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व में 1917 में रूस में संपन्न हुई इस क्रांति ने इतिहास में पहली बार किसी एक देश क
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर 9 नवम्बर को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा रामनगर, हरिद्वार और लालकुंआ में सभायें कर धामी सरकार पर अमानवीय शोषण करने का आरोप ल
लखनऊ/ नागरिक अखबार द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करण भाई सभागार में ‘‘अंधराष्ट्रवाद और मीडिया’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेम
दिल्ली/ रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बंगाली बस्ती पिछले 35 सालों से आबाद है। यह AP वंडर्स अपार्टमेंट के पीछे स्थित है। 7 नवंबर 2025 की रात को 10ः30
लालकुंआ/ सेन्चुरी पेपर मिल भारत में एकल स्थान पर पल्प, पेपर, बोर्ड और टिश्यू का उत्पादन करने वाली सबसे बड़ी विनिर्माण सुविधाओं में से एक है। इसकी कुल उत्प
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।