वेनेजुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबार
वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबार
उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं लंबे समय से न्यूनतम वेतन व स्थाई रोजगार के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुनी कर रही है। इसलिए प
रुद्रपुर/ रुद्रपुर नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को खेड़ा बस्ती स्थित ईदगाह के मैदान पर अन्यायपूर्ण तरीके से कब्जा कर लिया गया। नगर निगम द्वारा
अंकिता भण्डारी प्रकरण में संलिप्त वी आई पी का नाम सामने आने के बाद से समूचे उत्तराखण्ड में जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदेश की जनता, विभिन्न क्रांतिकारी-जनवादी संगठन, कांग्रे
गुडगांव/ दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेलसोनिका यूनियन ने 4 घोर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स पर गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार की शुरुआत क्रांतिकारी
हरिद्वार/ हेमिल्टन हाउसवेयर्स प्राइवेट लिमिटेड (Hamilton Housewares Pvt.
दिनांक 3 जनवरी को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर विचार गोष्ठी-परिचर्चाओं का आयोजन किया गया। रामनगर, हरिद्
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में हुये नये खुलासे में वीआईपी के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम उर्फ ‘गट्टू’ क
रामनगर/ वन ग्राम पूछडी में बुल्डोजर कार्रवाही के बाद भड़के ग्रामीणों के आक्रोश ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 21 दिसंबर
अंकिता भण्डारी केस में एक बार फिर से उबाल आ चुका है। भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर द्वारा केस में वी आई पी के बतौर भाजपा के राष्ट्रीय
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।