तृणमूल कांग्रेस की टूटन-फूटन

Published
Tue, 06/16/2026 - 06:50
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जब से ममता बनर्जी पं.बंगाल का चुनाव हारी हैं तब से उनकी पार्टी में जबरदस्त टूटन-फूटन का दौर चल रहा है। कोई नेता पार्टी छोड़कर भाग रहा है तो कोई नेता अलग गुट बनाकर पार्टी में फूट डाल रहा है। ममता बनर्जी का राजनैतिक कौशल चूक गया है और भाजपा, ममता बनर्जी की पार्टी को निगलती जा रही है। ममता के हाथ से सत्ता गयी तो मित्र-सहयोगी-अनुयायी सब कोई अपना-अपना रास्ता नाप रहे हैं। भाजपा बंगाल की शेरनी को भीगी बिल्ली बनाने के षड्यंत्र में लगी है और अपने इस मंसूबे को पूरा करने के लिए ‘साम-दाम-दण्ड-भेद’ की नीति पर चल रही है। 
    
ममता को भले ही विधानसभा में बड़ी चुनावी हार मिली हो पर उसके और भाजपा के मत प्रतिशत में महज 5 फीसदी का ही फर्क है। अभी भी करीब दो करोड़ मतदाताओं का ममता को समर्थन हासिल है। लेकिन जिस तरह से ममता की पार्टी में टूटन-फूटन हो रही है उसमें इसमें से कितना आधार बचेगा यह समय ही बतायेगा। 
    
ममता की पार्टी का हाल ऐसा कैसे हुआ। ममता को चुनाव में सत्ता विरोधी लहर के साथ भाजपा की कुटिल चालों का भी सामना करना पड़ा। विशेष गहन पुनर्रीक्षण (एस आई आर) ममता पर भारी पड़़ गया। भाजपा के षड्यंत्र-तिकडम का तोड़ ममता नहीं ढूंढ पायी। भाजपा के पास अपने घोर साम्प्रदायिक राजनीतिक दुष्प्रचार के अलावा चुनाव आयोग, सीबीआई, आई टी, ई डी जैसी संस्थाओं का खुला-छिपा हाथ था। चुनाव में पैसा बहाने के लिए भाजपा के पास कुबेर का खजाना था। ममता यहां भी मात खा गयी। अब बेचारी शेरनी अपने कुनबे को नहीं बचा पा रही है। यहां तक कि अब उनकी ‘घर वापसी’ की भी बात हो रही है। 
    
वैसे भाजपा व टी एम सी में ज्यादा से ज्यादा फर्क यह है कि एक फासीवादी दल है तो दूसरा अर्द्ध फासीवादी दल है। एक हिन्दू फासीवाद का वाहक है तो दूसरे का अर्द्ध फासीवाद गैर धार्मिक रंग का है। ममता बनर्जी ने बंगाल में जिस ढंग से ‘वामपंथियों’ का किला ध्वस्त किया था अपनी बारी में उसका किला भी कुछ उसी तरह ध्वस्त हो गया। अब ‘पहले राम फिर वाम’ का नारा लगाने वाले अपने लिए अवसर ढूंढ रहे हैं। पतित पूंजीवादी राजनीति जो न करवाये वह कम है। 

ममता के दिन बहुरेंगे या नहीं फिलवक्त भाजपा उनकी पार्टी में झाडू बुहार रही है। और ममता कोलकाता छोड़कर दिल्ली में अपनी पार्टी, अपना भविष्य बचाने की जद्दोजहद में लगी है। कांग्रेस में वापसी (घर वापसी) मीडिया का शिगूफा है या ममता का इरादा यह समय ही बतायेगा। 

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