मोदी फजीहत से बचे पर कब तक..
महिला पहलवान विनेश फोगाट ओलंपिक मेडल जीतते-जीतते रह गयीं। 50 किलो भार वर्ग में 100 ग्राम वजन ज्यादा होने से उन्हें फाइनल में पहुंचने के बाद भी अयोग्य करार दिया गया। ये वह
महिला पहलवान विनेश फोगाट ओलंपिक मेडल जीतते-जीतते रह गयीं। 50 किलो भार वर्ग में 100 ग्राम वजन ज्यादा होने से उन्हें फाइनल में पहुंचने के बाद भी अयोग्य करार दिया गया। ये वह
बरेली/ दिनांक 18 जुलाई 2024 को पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर बरेली (उत्तर प्रदेश) के दोनों सांसदों को संयुक
अमरीकी ‘‘लोकतंत्र’’ की यही सबसे बड़ी सच्चाई है कि इस ‘‘लोकतंत्र’’ में हर चार साल बाद यह तय करना होता है कि अमरीकी एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग के किस गुट को शासन हेतु चुना जाए। इस ‘‘लोकतंत्र’’ में मजदूर-मेहनतकश आबादी के ऊपर कौन सा गुट शासन करेगा, इस चुनाव में भी हमेशा की तरह यही फैसला होगा।
हरिद्वार/ सिडकुल (हरिद्वार) में लक्जर राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड पेन निर्माता कम्पनी है। हरिद्वार सिडकुल में इसके दो प्लांट हैं जिसमें हजारो
किसी भी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था भी अपने बुनियादी चरित्र में अराजक है। इसमें कौन कितना पैदा करेगा और कौन कितना उपभोग करेगा यह बाजार से तय होता है और बाजार में मांग और पूर्ति का राज होता है। कभी मांग पूर्ति से आगे निकलती है तो कभी पूर्ति मांग से। दोनों के बीच संतुलन यानी मांग और पूर्ति का बराबर होना यदा-कदा ही होता है। इस सबमें प्रतियोगिता निर्णायक होती है। कौन कितना बाजार हथिया लेता है, हर कोई इसी में लगा होता है। यहां तक कि मजदूर भी इस प्रतियोगिता में उतर पड़ते हैं- ज्यादा बेहतर मजदूरी और काम की शर्तों के लिए।
हल्द्वानी/ बनभूलपुरा में रेलवे द्वारा जमीन लिए जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। 24 जुलाई की सुनवाई में सुप्
मोदी सरकार ने अगस्त, 2023 के संसद सत्र में आपराधिक कानूनों से संदर्भित तीन विधेयकों को पास किया था। गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में इन विधेयकों को पास कराते समय बोला था कि
रुद्रपुर/ मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही के विरोध में 7 जुलाई की मजदूर महापंचायत की जबरदस्त सफलता, सिडकुल (रुद्रपुर-पंतनगर) में मजदूरों की व्याप
वो चाहते हैं बांटना
हमारी रोटियों को हिंदू और मुसलमां में
चाहते हैं सींचना खून से युवा नस्लों को
ताकि काट सकें लहलहाती
वोटों की फसलों को।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?